संसद में आज: सरकार ने माना, नदी व समुद्री कटाव से हर साल हजारों लोग घर छोड़ने को मजबूर

मानसून सत्र के दूसरे दिन, 21 जुलाई 2026 को संसद के दोनों सदनों में सरकार के मंत्रियों ने कृषि, पर्यावरण, पशु कल्याण और स्वच्छ ऊर्जा सहित कई अहम मुद्दों पर सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए।
संसद में आज: सरकार ने माना, नदी व समुद्री कटाव से हर साल हजारों लोग घर छोड़ने को मजबूर
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सारांश
  • मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकार ने फसल विविधीकरण, बाढ़ राहत, कार्बन क्रेडिट, ग्रीन हाइड्रोजन और पशु कल्याण से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

  • लोकसभा और राज्यसभा में किसानों की आय, नदी कटाव, आवारा कुत्तों की समस्या तथा स्वच्छ ऊर्जा पर सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी।

  • संसद में कृषि, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और हरित ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं की प्रगति तथा भविष्य के लक्ष्यों पर सरकार ने जानकारी दी।

  • सरकार ने संसद में फसल विविधीकरण, एनडीआरएफ सहायता, कार्बन बाजार, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और पशु जन्म नियंत्रण नियमों की जानकारी दी।

  • किसानों की आय बढ़ाने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को राहत, नदी कटाव पुनर्वास और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने पर सरकार ने विस्तार से जवाब दिया।

फसल विविधीकरण कार्यक्रम

संसद का मानसून सत्र जारी है। सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि भारत सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए फसल विविधीकरण कार्यक्रम चला रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को अधिक पानी वाली धान की खेती से हटाकर दूसरी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे पानी की बचत होगी और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।

चौहान ने कहा कि यह कार्यक्रम पहले पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लागू किया गया था। बाद में इसे आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे तंबाकू उत्पादक राज्यों तक बढ़ाया गया। बिहार सहित कई राज्यों में सरकार मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के माध्यम से फल, सब्जियां, मसाले, फूल और अन्य बागवानी फसलों की खेती को भी बढ़ावा दे रही है।

बाढ़ और नदी कटाव का कृषि पर असर

बाढ़ और नदी कटाव का खेती पर असर को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में कहा कि भारत के कई राज्यों में हर साल बाढ़ और नदी कटाव से किसानों की फसलें और खेती की जमीन प्रभावित होती हैं। ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्य सरकारें राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से राहत उपलब्ध कराती हैं।

मंत्री ने कहा कि यदि आपदा बहुत गंभीर होती है, तो केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त सहायता देती है। इसके लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के माध्यम से दी जाने वाली राशि राहत के लिए होती है, नुकसान की भरपाई के रूप में नहीं।

ठाकुर ने केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि साल 1986 से 2022 तक भारत में लगभग 2.1213 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ है। वहीं विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2.0538 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया है। असम में 24.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ है।

देश में आवारा कुत्तों की समस्या

सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में मंत्री रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में कहा कि देश के कई शहरों और गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है। इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 लागू किए हैं।

इन नियमों के तहत स्थानीय निकाय कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का कार्य करते हैं। 19 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी इन नियमों को सही माना और राज्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वित्तीय सहायता राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही भारत सरकार वर्ष 2026-27 में स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (एसएएससीआई) योजना चला रही है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकारें डॉग शेल्टर, पशु आश्रय और पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित कर सकती हैं।

नदी कटाव से विस्थापित लोगों का पुनर्वास

नदी कटाव से विस्थापित लोगों के पुनर्वास को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि नदी और समुद्री कटाव के कारण हर साल हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए 15वें वित्त आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों को पुनर्वास नीति बनाने की सिफारिश की थी।

राय ने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के रिकवरी एंड रिकंस्ट्रक्शन फंड के अंतर्गत 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। केंद्र सरकार ने नदी और तटीय कटाव से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की नीति बनाई है। इस योजना का लाभ लेने के लिए राज्य सरकारों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भेजनी होती है। अब तक केवल असम ने प्रस्ताव भेजा है और अभी तक किसी भी राज्य को इस मद में धनराशि जारी नहीं की गई है।

कार्बन क्रेडिट से किसानों की आय

सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी दते हुए कहा कि भारत सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना, 2023 लागू की है। इसका उद्देश्य देश में कार्बन बाजार को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण करना है।

इस योजना के तहत कृषि क्षेत्र के लिए दो महत्वपूर्ण पद्धतियों को मंजूरी दी गई है। पहली, पशुओं और गोबर से निकलने वाली मीथेन गैस का बेहतर प्रबंधन। दूसरी, धान की खेती में बेहतर तकनीकों का उपयोग करके ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना। इन तरीकों से किसान भविष्य में कार्बन क्रेडिट हासिल कर सकते हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक यह आकलन नहीं किया है कि इससे किसानों की आय कितनी बढ़ेगी।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्यमंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्य सभा में कहा कि भारत सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) शुरू किया है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

मंत्री ने बताया कि इस मिशन के तहत हरित हाइड्रोजन बनाने वाली कंपनियों को पहले वर्ष 50 रुपये प्रति किलोग्राम, दूसरे वर्ष 40 रुपये प्रति किलोग्राम और तीसरे वर्ष 30 रुपये प्रति किलोग्राम की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। इसके साथ ही 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने, आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश, छह लाख से अधिक रोजगार और हर साल पांच करोड़ मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

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