संसद में आज: कृषि अनुसंधान व शिक्षा के लिए बजट बढ़कर 10,466.39 करोड़ रुपये हुआ

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज, 13 मार्च, 2026 को एंटीबायोटिक, आयुष्मान भारत, एआई, जलवायु, बीमा व कृषि अनुसंधान को लेकर संसद में पूछे गए सवालों का सरकार के मंत्रियों ने जवाब दिया।
संसद में आज: कृषि अनुसंधान व शिक्षा के लिए बजट बढ़कर 10,466.39 करोड़ रुपये हुआ
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सारांश
  • सरकार ने बताया कि एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना 2.0 लागू की जा रही है।

  • प्लास्टिक उद्योग को बढ़ावा देने के लिए देश में 10 प्लास्टिक पार्क स्वीकृत किए गए हैं।

  • छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत मामले में जांच में खांसी की दवा में जहरीला डाइएथिलीन ग्लाइकोल पाया गया, कंपनी का लाइसेंस रद्द।

  • इंडिया एआई मिशन के माध्यम से उद्योगों में एआई तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए बजट बढ़कर 2025-26 में 10,466.39 करोड़ रुपये हुआ।

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस की बढ़ती समस्या

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में कहा कि भारत सरकार ने एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) यानी एंटीबायोटिक दवाओं के असर कम होने की समस्या को गंभीरता से लिया है। यह समस्या केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के 100 से अधिक देशों में तेजी से बढ़ रही है। जब बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं तो इलाज कठिन हो जाता है और बीमारी ज्यादा खतरनाक बन सकती है।

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना का नाम है रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्य योजना 2.0 है। यह योजना विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक कार्य योजना के अनुरूप है। जाधव ने कहा कि पशुपालन और पर्यावरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों को साथ लेकर इस समस्या से लड़ने के लिए काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं का सही उपयोग हो और एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग कम किया जाए।

देश में प्लास्टिक पार्क योजना

देश में प्लास्टिक पार्क को लेकर सदन में उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए आज, रसायन और उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में बताया कि भारत में प्लास्टिक उद्योग को मजबूत बनाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। इसी दिशा में रसायन और पेट्रो रसायन विभाग द्वारा प्लास्टिक पार्क योजना लागू की जा रही है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देना और उद्योगों को एक ही स्थान पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्लास्टिक पार्कों में उद्योगों को सड़क, बिजली, पानी, गोदाम और अन्य साझा सुविधाएं दी जाती हैं। इससे उद्योगों को काम करना आसान हो जाता है और लागत भी कम होती है।

इस योजना के तहत देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 10 प्लास्टिक पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

खांसी की दवा से बच्चों की मृत्यु का मामला

सदन में पूछे गए एक और सवाल के जवाब में आज, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हाल ही में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इन मौतों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की एक टीम भेजी। इस टीम में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के विशेषज्ञ शामिल थे।

जांच के दौरान कुल 19 दवा के नमूने लिए गए जो बच्चों ने उपयोग किए थे। इनमें से 15 नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए, जबकि 4 नमूने मानक के अनुरूप नहीं थे।

जांच में यह भी पाया गया कि एक खांसी की दवा में डाइएथिलीन ग्लाइकोल नामक जहरीला रसायन बहुत अधिक मात्रा में मौजूद था। यह दवा श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा कांचीपुरम, तमिलनाडु में बनाई गई थी।

जांच में कंपनी के कारखाने में कई गंभीर गड़बड़ियां पाई गई। इसके बाद तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर ने कंपनी का निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पुदुचेरी में इस दवा की बिक्री पर रोक लगा दी गई और बाजार से इसे वापस मंगाया गया। मंत्री ने कहा कि दोषी कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन

आयुष्मान भारत को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन शुरू किया है। इस योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाना और भविष्य में आने वाली महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने की तैयारी करना है।

इस योजना की कुल लागत लगभग 64,180 करोड़ रुपये है और यह योजना वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक लागू की जा रही है। इसके तहत देशभर में अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत बनाया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाना और लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।

उद्योगों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव

सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तेजी से विकसित हो रही तकनीक है। भारत सरकार भी इसके विकास और उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए इंडिया एआई मिशन शुरू किया गया है।

एआई के उपयोग से उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है, काम की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे नए नवाचार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री ने कहा कि सरकार जिम्मेदारी के साथ एआई तकनीक को अपनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। साथ ही, कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुसार प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और आम की फसल

सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर अब कृषि पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर आम की फसल पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है। तापमान में वृद्धि, अनियमित बारिश, तेज हवाएं और सूखे जैसी स्थितियां आम के पेड़ों पर बुरा असर डालती हैं।

इन परिस्थितियों में पौधों के हार्मोन में असंतुलन हो सकता है जिससे आम के फल समय से पहले गिर सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे तनाव के कारण पौधों में एबीए और एथिलीन जैसे हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे फल गिरने लगते हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालय जलवायु सहनशील किस्मों का विकास कर रहे हैं। इसी दिशा में अर्क उदय नामक आम की किस्म विकसित की गई है। चौधरी ने बताया कि सरकार किसानों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है।

किसानों को मुआवजा और बीमा सहायता

किसानों को मुआवजे को लेकर सदन में उठाए गए एक और सवाल के जवाब में, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि सरकार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। साल 2020-21 से 2024-25 के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत 1,14,369.79 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

इसके अलावा किसानों की फसल की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी लागू है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने बीमा कंपनियों को प्रीमियम सब्सिडी के रूप में 65,649.88 करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए बजट

सदन में प्रश्नों का सिलसिला जारी रहा। इसी क्रम में एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने बताया कि भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार बजट बढ़ा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद देश में कृषि अनुसंधान और शिक्षा के समन्वय का मुख्य संस्थान है।

पिछले दस वर्षों में इसके बजट में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 में इसका बजट 6,144.39 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में 10,466.39 करोड़ रुपये हो गया है। चौधरी ने कहा कि कृषि अनुसंधान में निवेश बढ़ने से नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

इस तरह सरकार ने संसद के दोनों सदनों में कहा कि वह स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाएं और कार्यक्रम चला रही है। इन पहलों का उद्देश्य देश के विकास को तेज करना, लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए देश को तैयार करना है।

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