मानसून में 15% कमी, 54 बड़े जलाशयों में भंडारण सामान्य के 80% से नीचे, सिंचाई-पेयजल पर खतरा

जून में 40% वर्षा की कमी, असमान मानसून वितरण और बढ़ती जल खपत से 54 बड़े जलाशयों में भंडारण सामान्य के 80% से नीचे, कई बांधों में आधे से भी कम पानी है
फाइल फोटो- सीएसई
फाइल फोटो- सीएसई
Published on

जुलाई के तीसरे सप्ताह ठीकठाक बारिश होने के बावजूद देश के जलाशयों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 16–22 जुलाई के सप्ताह में देशभर में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई और कमी केवल एक प्रतिशत रही। हालांकि मानसून सीजन (1 जून से 25 जुलाई) तक सामान्य के मुकाबले 15 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

उधर केंद्रीय जल आयोग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, 166 प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 36 प्रतिशत कम है और सामान्य स्तर से भी नीचे बना हुआ है।

23 जुलाई तक 166 जलाशयों में कुल 70.432 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध था, जो उनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 38.37 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी समय इन जलाशयों में 110.519 बीसीएम पानी था, जबकि सामान्य भंडारण 75.661 बीसीएम था। यानी मौजूदा भंडारण पिछले साल के मुकाबले केवल 63.73 प्रतिशत और सामान्य का 93.09 प्रतिशत है।

यह स्थिति तब है जब भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 16–22 जुलाई के सप्ताह में देशभर में 66.8 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य 67.3 मिमी से केवल 1 प्रतिशत कम है।

हालांकि पूरे मानसून सीजन (1 जून–25 जुलाई) में वर्षा अभी भी सामान्य से 15 प्रतिशत कम बनी हुई है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार जुलाई के तीसरे सप्ताह में मध्य भारत में सामान्य से 10 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 5 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 26 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।

दक्षिण भारत में सबसे अधिक संकट

क्षेत्रवार आंकड़े बताते हैं कि सबसे खराब स्थिति दक्षिण भारत की है। यहां 47 प्रमुख जलाशयों में केवल 30.26 प्रतिशत क्षमता तक ही पानी है। यह पिछले वर्ष के 69.43 प्रतिशत और सामान्य 44.18 प्रतिशत दोनों से काफी कम है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और विशेषकर तेलंगाना के जलाशयों में सामान्य से भारी कमी बनी हुई है। तेलंगाना में जलाशयों का भंडारण सामान्य से 57 प्रतिशत कम है।

उत्तर भारत और मध्य भारत भी दबाव में

उत्तरी क्षेत्र के जलाशय कुल क्षमता के केवल 35.58 प्रतिशत तक भरे हैं, जबकि मध्य भारत के जलाशयों में 39.11 प्रतिशत पानी है। दोनों क्षेत्रों का भंडारण पिछले वर्ष और सामान्य स्तर से नीचे है। पूर्वी क्षेत्र में स्थिति सामान्य से बेहतर अवश्य है, लेकिन वहां भी पिछले वर्ष की तुलना में भंडारण कम है। केवल पश्चिमी क्षेत्र (गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा) में भंडारण सामान्य से बेहतर है, हालांकि वह भी पिछले वर्ष के स्तर तक नहीं पहुंचा है।

54 जलाशय सामान्य के 80 प्रतिशत से नीचे

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 166 में से 54 जलाशयों में भंडारण सामान्य के 80 प्रतिशत या उससे कम है। इनमें से 22 जलाशय ऐसे हैं जिनमें सामान्य का आधा या उससे भी कम पानी बचा है। इनमें श्रीशैलम, नागार्जुन सागर, तुंगभद्रा, कृष्णराज सागर, पेरियार, तवा, वैगई, अलीयार, सिंगूर और मऊदाहा जैसे महत्वपूर्ण जलाशय शामिल हैं।

भारी बारिश का असर जलाशयों तक क्यों नहीं पहुंचा?

इस बार मानसून का वितरण बेहद असमान रहा। जून में देशभर में 40 प्रतिशत वर्षा की कमी रही। जुलाई के तीसरे सप्ताह में अच्छी बारिश होने के बावजूद यह कमी पूरी तरह नहीं भर पाई। कई जलग्रहण क्षेत्रों में अभी भी सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि कुछ स्थानों पर अत्यधिक बारिश अल्प अवधि में हुई, जिससे पानी तेजी से बहकर निकल गया और जलाशयों में अपेक्षित मात्रा में संग्रह नहीं हो सका।

इसके अलावा सिंचाई, पेयजल, उद्योगों और जलविद्युत उत्पादन के लिए लगातार पानी छोड़े जाने से भी भंडारण पर दबाव बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग ने भी बुलेटिन में स्पष्ट किया है कि जलाशयों का भंडारण उपयोग के कारण लगातार घटता रहता है।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in