ऑक्सफोर्ड अध्ययन में खुलासा, 79 प्रतिशत बड़ी कंपनियों ने जैव विविधता के वादे किए, लेकिन केवल 13 प्रतिशत प्रतिबद्धताएं मजबूत मिलीं।
बड़ी कंपनियों के पर्यावरणीय दावे अस्पष्ट, वैज्ञानिकों ने पारदर्शी लक्ष्य, समयसीमा और सही निगरानी व्यवस्था की जरूरत बताई।
कृषि क्षेत्र की कंपनियां जैव विविधता संरक्षण में आगे, जबकि तेल, गैस और दवा कंपनियां पीछे नजर आईं।
शोध में सामने आया, कमजोर पर्यावरणीय वादों से जवाबदेही प्रभावित होती है और प्रकृति संरक्षण के प्रयासों पर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों की सलाह, कंपनियों को स्पष्ट योजनाओं, बेहतर रिपोर्टिंग और वैज्ञानिक सहयोग से जैव विविधता बचाने में योगदान देना चाहिए।
दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पर्यावरण और जैव विविधता बचाने के लिए बड़े-बड़े वादे कर रही हैं, लेकिन एक नए अध्ययन में सामने आया है कि ज्यादातर कंपनियों के ये वादे इतने स्पष्ट नहीं हैं कि यह पता लगाया जा सके कि वे वास्तव में कितना काम कर रही हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के स्टॉकहोम रेजिलिएंस सेंटर के शोधकर्ताओं ने 180 बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अध्ययन किया। ये कंपनियां खेती, तेल, गैस, दवा और अन्य क्षेत्रों में काम करती हैं और दुनिया के प्राकृतिक संसाधनों पर इनका काफी प्रभाव है। अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल ‘वन अर्थ’ में प्रकाशित हुए हैं।
79 प्रतिशत कंपनियों ने किए जैव विविधता से जुड़े वादे
अध्ययन में पाया गया कि 180 में से करीब 79 प्रतिशत कंपनियों ने किसी न किसी रूप में जैव विविधता बचाने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, केवल 13 प्रतिशत कंपनियों के वादे इतने मजबूत पाए गए, जिनके आधार पर यह जांच की जा सकती है कि वे अपने लक्ष्यों को पूरा कर रही हैं या नहीं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी भी गंभीर पर्यावरणीय वादे में यह साफ होना चाहिए कि कंपनी क्या बचाना चाहती है, किस जगह पर काम करेगी, कब तक लक्ष्य हासिल करेगी और सफलता को कैसे मापा जाएगा। अगर ये बातें स्पष्ट नहीं हों तो ऐसे वादे केवल अच्छे इरादों की घोषणा बनकर रह जाते हैं।
बड़ी कंपनियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
पिछले 50 वर्षों में बड़ी कंपनियों का दुनिया के संसाधनों, उत्पादन और व्यापार पर प्रभाव बहुत बढ़ा है। इसलिए इन कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे जैव विविधता की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाएं।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि कंपनियों को महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ व्यावहारिक योजनाएं भी बनानी होंगी। केवल कानून का पालन करने का वादा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह बताना जरूरी है कि लक्ष्य हासिल करने के लिए कदम कैसे उठाए जाएंगे।
कई वादे सिर्फ दिखावे तक सीमित
अध्ययन में पाया गया कि कई कंपनियों के जैव विविधता संबंधी वादों में स्पष्टता की कमी थी। कुछ कंपनियों ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिनका अर्थ साफ नहीं था। कुछ मामलों में कंपनियों ने चुनिंदा आंकड़ों या अध्ययनों का इस्तेमाल अपने कम प्रयासों को सही ठहराने के लिए किया।
शोधकर्ताओं ने बताया कि एक कृषि रसायन कंपनी ने एक अध्ययन के आधार पर यह दावा किया कि कीड़ों की संख्या में कमी के लिए कीटनाशक मुख्य कारण नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने इस तरह के दावों को सावधानी से देखने की जरूरत बताई।
खेती से जुड़ी कंपनियां आगे
अध्ययन में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर देखा गया। खेती और कृषि से जुड़ी कंपनियों के जैव विविधता लक्ष्य अपेक्षाकृत बेहतर पाए गए।
कोको क्षेत्र में शामिल पांच बड़ी कंपनियों में से चार ने ऐसे लक्ष्य बनाए थे जिन्हें मजबूत माना गया। इसी तरह सोयाबीन क्षेत्र में छह में से पांच कंपनियों ने स्पष्ट और बेहतर प्रतिबद्धताएं दिखाई। इसके विपरीत तेल और गैस तथा पशु दवा क्षेत्र की कई कंपनियां पीछे रहीं। पशु दवा क्षेत्र की आधी कंपनियों के पास जैव विविधता से जुड़ा कोई वादा तक नहीं था।
बेहतर व्यवस्था से बढ़ सकती है जवाबदेही
शोधकर्ताओं का कहना है कि कंपनियों के कमजोर वादों के पीछे कई कारण हैं। इनमें व्यापारिक हितों से टकराव, लक्ष्य पूरा न होने पर छवि खराब होने का डर, सही जानकारी की कमी और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पर्यावरणीय आंकड़ों का अभाव शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सरकारों को कंपनियों के लिए जैव विविधता रिपोर्टिंग को अनिवार्य बनाना चाहिए। इसके अलावा वैज्ञानिकों और कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने, निवेशकों का दबाव बढ़ाने और शेयर बाजारों में पर्यावरणीय मानकों को शामिल करने की जरूरत है।
प्रकृति संरक्षण के लिए ठोस कदम जरूरी
यह अध्ययन बताता है कि केवल पर्यावरण बचाने के वादे करना काफी नहीं है। कंपनियों को अपने लक्ष्यों को स्पष्ट, मापने योग्य और समय सीमा के साथ तय करना होगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर बड़ी कंपनियां अपनी ताकत और संसाधनों का सही इस्तेमाल करें तो वे जैव विविधता की रक्षा और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।