कई अन्य क्षेत्रों में बर्फ इतनी तेजी से घट रही है कि भालू अनुकूलन नहीं कर पा रहे।  फोटो साभार: आईस्टॉक
वन्य जीव एवं जैव विविधता

बढ़ती गर्मी और पिघलती बर्फ के कारण संकट में हैं ध्रुवीय भालू

अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस: जलवायु परिवर्तन के कारण ध्रुवीय भालुओं के आवास और जीवनशैली में गंभीर और व्यापक बदलाव देखे जा रहे हैं

Dayanidhi

  • ध्रुवीय भालुओं की वैश्विक संख्या लगभग 26,000-31,000 है, जो 20 उप-आबादियों में बंटी हुई हैं और “संवेदनशील” श्रेणी में हैं।

  • नर भालू 350-600 किलोग्राम वजन और 2.5-3 मीटर लंबाई तक पहुंचते हैं, जबकि मादा भालू छोटे आकार की होती हैं।

  • ध्रुवीय भालू मुख्य रूप से रिंग्ड और बीयर्डेड सील का शिकार करते हैं, शिकार की सफलता दर लगभग दो प्रतिशत है।

  • वे समुद्री स्तनधारी हैं, आर्कटिक महासागर में बर्फ पर रहते हैं, लंबी दूरी तक तैर सकते हैं और सूंघने में तेज हैं।

  • जलवायु परिवर्तन और समुद्री बर्फ के घटने के कारण आबादी संकट में हैं, 2100 तक कुछ स्थानीय उप-आबादी समाप्त हो सकती हैं।

हर साल 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस मनाया जाता है। पहली नजर में ध्रुवीय भालू बहुत प्यारे और नरम-मुलायम लगते हैं। कार्टूनों में उन्हें बर्फ के गोले से खेलते, फिसलते या अपने बच्चों को गले लगाते दिखाया जाता है। उनके गोल कान, सफेद फर और भारी चाल उन्हें किसी बड़े टेडी बियर जैसा बना देते हैं।

लेकिन सच्चाई इससे अलग है। ध्रुवीय भालू आर्कटिक के सबसे ताकतवर शिकारी हैं। उनका जीवन बेहद कठोर और ठंडे वातावरण में बीतता है, जहां केवल वही जीव टिक पाते हैं जो पूरी तरह अनुकूलित हों।

आबादी और संरक्षण स्थिति

दुनिया में ध्रुवीय भालुओं की संख्या लगभग 26,000 से 31,000 के बीच मानी जाती है। इन्हें 20 अलग-अलग उप-आबादियों (सबपॉपुलेशन) में बांटा गया है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने ध्रुवीय भालू को “असुरक्षित” यानी संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इसका मुख्य कारण समुद्री बर्फ का तेजी से कम होना है।

ध्रुवीय भालुओं की स्थिति पर नजर रखने के लिए आईयूसीएन ध्रुवीय भालू विशेषज्ञ समूह काम करता है, जिसकी स्थापना 1973 में हुई थी। इस समूह की नवीनतम रिपोर्ट अक्टूबर 2024 में प्रकाशित हुई।

शारीरिक बनावट और विशेषताएं

ध्रुवीय भालू का शरीर बहुत शक्तिशाली होता है।

नर भालू का वजन 350 से 600 किलोग्राम तक होता है, और कुछ क्षेत्रों में 800 किलोग्राम तक भी पहुंच सकता है।

मादा भालू अपेक्षाकृत छोटी होती है, जिनका वजन 150 से 290 किलोग्राम के बीच होता है।

इनकी लंबाई 2.5 से 3 मीटर तक हो सकती है।

उनकी त्वचा काली होती है और ऊपर से सफेद, पारदर्शी फर से ढकी रहती है। यह फर उन्हें ठंड से बचाता है और बर्फ में छिपने में मदद करता है।

आवास और क्षेत्र

ध्रुवीय भालू आर्कटिक महासागर के आसपास के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से निम्न देशों में रहते हैं -

  • कनाडा

  • यूनाइटेड स्टेट्स (अलास्का)

  • रूस

  • ग्रीनलैंड

  • नॉर्वे

ध्रुवीय भालू अपना अधिकांश जीवन समुद्री बर्फ पर बिताते हैं। यही बर्फ उनके लिए शिकार का मंच होती है।

भोजन और शिकार

ध्रुवीय भालू मुख्य रूप से सील का शिकार करते हैं, खासकर रिंग्ड सील और बीयर्डेड सील।

हालांकि वे बहुत ताकतवर होते हैं, लेकिन उनका शिकार हमेशा सफल नहीं होता। अनुमान है कि दो प्रतिशत से भी कम प्रयास सफल होते हैं। वे बर्फ में बने छेदों के पास घंटों इंतजार करते हैं और जैसे ही सील सांस लेने के लिए ऊपर आती है, वे झपट्टा मारते हैं।

उनकी सूंघने की शक्ति बहुत तेज होती है। वे एक किलोमीटर से भी अधिक दूरी से या बर्फ के नीचे छिपी सील को पहचान सकते हैं।

व्यवहार और प्रजनन

ध्रुवीय भालू बहुत अच्छे तैराक होते हैं। वे लगातार कई दिनों तक तैर सकते हैं।

मादा भालू सर्दियों में बर्फ के अंदर मांद बनाती है और वहीं शावकों को जन्म देती है। जन्म के समय शावक का वजन एक किलोग्राम से भी कम होता है। मां अपने बच्चों की कई महीनों तक देखभाल करती है।

चुनौतियां

ध्रुवीय भालुओं का अध्ययन करना आसान नहीं है। उनका आवास बहुत दूर और कठिन क्षेत्रों में है। 1960 और 1970 के दशक में वैज्ञानिक हवाई सर्वेक्षण, पकड़-कर-छोड़ने की विधि और स्थानीय लोगों के ज्ञान का उपयोग करते थे। 1980 के बाद से उपग्रह ट्रैकिंग और आनुवंशिक (जेनेटिक) अध्ययन भी किए जाने लगे। इससे उनकी संख्या और गतिविधियों को बेहतर समझा जा सका।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

ध्रुवीय भालुओं के जीवन में समुद्री बर्फ बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है।

कुछ ऊंचे आर्कटिक क्षेत्रों में बर्फ पिघलने से अस्थायी रूप से शिकार की उपलब्धता बढ़ी है। लेकिन कई अन्य क्षेत्रों में बर्फ इतनी तेजी से घट रही है कि भालू अनुकूलन नहीं कर पा रहे। कुछ क्षेत्रों में उनकी शारीरिक स्थिति खराब हो रही है, बच्चों की संख्या कम हो रही है और मृत्यु दर बढ़ रही है।

भविष्य की चिंता

अध्ययनों के अनुसार, यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं किया गया, तो साल 2100 तक कई क्षेत्रों से ध्रुवीय भालू पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं। यदि उत्सर्जन को मध्यम स्तर तक भी कम किया जाए, तब भी कुछ स्थानीय आबादियां खत्म होने की आशंका है।

ध्रुवीय भालू केवल एक जानवर नहीं हैं, बल्कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का प्रतीक हैं। उनका भविष्य हमारे पर्यावरणीय निर्णयों पर निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस हमें याद दिलाता है कि इन शक्तिशाली जीवों की रक्षा के लिए हमें अभी कदम उठाने की आवश्यकता है।