दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत प्रजातियां वेटलैंड में रहती और प्रजनन करती हैं, जिससे जैव विविधता सीधे इन पर निर्भर है।
पीटलैंड्स पृथ्वी के भूमि-आधारित कुल कार्बन का लगभग एक-तिहाई संग्रहित करते हैं, जो सभी वनों से दोगुना है।
हर आठ में से एक व्यक्ति मछली, खेती, पर्यटन और अन्य कार्यों के लिए आर्द्रभूमियों पर निर्भर है।
तटीय वेटलैंड लगभग 60 प्रतिशत तटीय आबादी को बाढ़, तूफान और जलवायु आपदाओं से सुरक्षा देती हैं।
वेटलैंड वनों की तुलना में तीन गुना तेजी से नष्ट हो रही हैं, जिससे प्रकृति, जल सुरक्षा और मानव जीवन खतरे में है।
वेटलैंड (आर्द्रभूमियां) पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण और उपयोगी पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं। ये हमें स्वच्छ पानी देती हैं, बाढ़ को रोकने में मदद करती हैं, वन्यजीवों को आश्रय प्रदान करती हैं और लाखों लोगों की आजीविका का साधन हैं। इसके बावजूद, वेटलैंड दुनिया में सबसे अधिक खतरे में पड़ी प्राकृतिक प्रणालियों में शामिल हैं।
हर साल दो फरवरी को पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि दिवस (वर्ल्ड वेटलैंड डे) मनाया जाता है। यह दिन हमें यह याद दिलाने के लिए मनाया जाता है कि वेटलैंड हमारे जीवन और पृथ्वी के लिए कितनी आवश्यक हैं और हमें इनके संरक्षण के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।
वेटलैंड क्या हैं?
वेटलैंड वे क्षेत्र होते हैं जहां भूमि और पानी एक साथ पाए जाते हैं। इनमें झीलें, नदियां, दलदल, बाढ़ के मैदान, पीटलैंड, मैंग्रोव और तटीय क्षेत्र शामिल हैं। ये क्षेत्र साल भर या कुछ समय के लिए पानी से भरे रहते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत प्रजातियां जैसे मछलियां, पक्षी, उभयचर और पौधे वेटलैंड में रहती हैं या वहीं प्रजनन करती हैं। इससे स्पष्ट है कि वेटलैंड का नष्ट होना सीधे जैव विविधता के नुकसान से जुड़ा है।
जैव विविधता और भोजन सुरक्षा
वेटलैंड दुनिया की सबसे अधिक उत्पादक प्रणालियों में से हैं। ये एक लाख से अधिक प्रजातियों का घर हैं। मछली, चावल और अन्य जलीय खाद्य पदार्थों का बड़ा हिस्सा वेटलैंड से ही हासिल होता है।
विश्व स्तर पर, वेटलैंड वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लाखों लोग मछली पकड़ने और जल आधारित खेती पर निर्भर हैं।
आजीविका और संस्कृति से जुड़ाव
दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में वेटलैंड से अपनी आजीविका कमाता है। इसमें मछुआरे, किसान, पशुपालक, कारीगर और पर्यटन से जुड़े लोग शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वेटलैंड केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक जीवन के लिए भी कितनी आवश्यक हैं।
कई आदिवासी और स्थानीय समुदाय सदियों से वेटलैंड के साथ रहते आए हैं। उनकी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और जीवनशैली ने इन पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा की है।
बाढ़ और आपदाओं से सुरक्षा
वेटलैंड प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं। ये भारी बारिश के समय अतिरिक्त पानी को सोख लेती हैं और धीरे-धीरे छोड़ती हैं, जिससे बाढ़ का खतरा कम होता है।
आंकड़ों के अनुसार, तटीय वेटलैंड लगभग 60 प्रतिशत तटीय आबादी को बाढ़, सूखा और समुद्री तूफानों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। मैंग्रोव वन समुद्री लहरों की गति को कम कर तटों की रक्षा करते हैं।
जलवायु परिवर्तन और कार्बन भंडारण
वेटलैंड जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। विशेष रूप से पीटलैंड्स, जो पृथ्वी की सतह का बहुत छोटा हिस्सा हैं, लेकिन इनमें भूमि-आधारित कुल कार्बन का लगभग एक-तिहाई संग्रहित है।
यह मात्रा दुनिया के सभी वनों में संग्रहित कार्बन से भी लगभग दोगुनी है। जब पीटलैंड नष्ट होते हैं, तो यह कार्बन वातावरण में चला जाता है और जलवायु परिवर्तन को तेज करता है।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस का इतिहास
दो फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह वेटलैंड की रक्षा के लिए बनी दुनिया की पहली और एकमात्र अंतरराष्ट्रीय संधि है।
आज 172 देश इस संधि के सदस्य हैं और वेटलैंड के संरक्षण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस पहली बार 1997 में मनाया गया था और 2022 में इसे संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया।
विश्व वेटलैंड दिवस 2026 की थीम - वेटलैंड और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। यह थीम इस बात को दर्शाती है कि कैसे आदिवासी और स्थानीय समुदायों का पारंपरिक ज्ञान पीढ़ियों से वेटलैंड की रक्षा करता आया है।
तेजी से घटते वेटलैंड
आंकड़ों के अनुसार, वेटलैंड वनों की तुलना में तीन गुना तेजी से नष्ट हो रही हैं। इसके मुख्य कारण - भूमि उपयोग में बदलाव, प्रदूषण, अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन आदि हैं। यह स्थिति मानव जीवन, जल सुरक्षा और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
आंकड़े साफ बताते हैं कि वेटलैंड हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ी हुई हैं, भोजन, पानी, आजीविका, जलवायु और सुरक्षा। विश्व वेटलैंड दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि यदि हम आज वेटलैंड को नहीं बचाएंगे, तो भविष्य की पीढ़ियां भारी नुकसान झेलेंगी।