मध्य प्रदेश की 13,565 आर्द्रभूमियों को अतिक्रमण और अवैध कब्जों से बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है।
एनजीटी ने आदेश दिया है कि राज्य की सभी वेटलैंड्स का जमीन पर स्पष्ट सीमांकन कर छह महीने के भीतर सीमा स्तंभ लगाए जाएं, ताकि संरक्षण केवल कागजों तक सीमित न रहे।
अधिकरण ने मुख्य सचिव को विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को हर महीने प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। तुलसी सरोवर मामले में भी दो महीने के भीतर मौके पर मुन्नार लगाने और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया है।
एनजीटी ने चेताया कि समय पर सीमांकन नहीं हुआ तो भविष्य में वेटलैंड्स पर अवैध कब्जे बढ़ने का खतरा रहेगा। यह फैसला राज्य के जल स्रोतों, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की रक्षा की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश की सभी आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) को सुरक्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने 12 फरवरी 2026 को आदेश दिया कि राज्य की सभी आर्द्रभूमियों की जमीन का स्पष्ट सीमांकन किया जाए और चारों ओर सीमा स्तंभ (मुन्नार) लगाए जाएं। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वेटलैंड नियम 2017 के तहत प्रभावी संरक्षण के लिए यह काम अत्यंत जरूरी है और इसे तत्काल आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश में कुल 13,565 आर्द्रभूमियों की मैपिंग की जा चुकी है। सूची से यह भी सामने आया कि इन आर्द्रभूमियों का स्वामित्व अलग-अलग सरकारी विभागों के पास है, इनमें नगर निगम, राजस्व विभाग, वन विभाग और जल संसाधन विभाग सहित कई एजेंसियां इसमें शामिल हैं।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि राज्यभर में इतने बड़े पैमाने पर सीमांकन का काम किसी एक एजेंसी के लिए संभव नहीं है। इसलिए जिस विभाग के अधीन आद्रभूमि आती है, वही विभाग अपने स्तर पर सीमांकन की योजना बनाए और उसे लागू करे।
अधिकरण ने विभिन्न विभागों, नगर निकायों और वेटलैंड प्राधिकरण के बीच समन्वय की आवश्यकता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित विभागों को आवश्यक आदेश जारी करें और यह काम छह महीने के भीतर पूरा कराया जाए।
साथ ही, राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव को हर महीने प्रगति की समीक्षा करने और विभागों को वैज्ञानिक तरीके से तकनीकी सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।
लोगों को जागरूक करने के लिए लगेंगे साइनबोर्ड
एनजीटी ने कहा कि सीमांकन पूरा होने के बाद आद्रभूमियों के आसपास प्रमुख स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाए जाएं, जिनमें वेटलैंड नियमों के अहम प्रावधान लिखे हों। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को आर्द्रभूमियों के महत्व और समाज में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना है।
मामले में तुलसी सरोवर (अशोकनगर) को वेटलैंड सूची से हटाने की मांग भी उठी थी। लेकिन राज्य सरकार और वेटलैंड प्राधिकरण ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार तुलसी सरोवर को आधिकारिक रूप से वेटलैंड के रूप में सूचीबद्ध और संरक्षित किया गया है।
एनजीटी ने अधिकारियों को तय समय सीमा में तुलसी सरोवर से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि आगे की कम्प्लायंस रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर दाखिल की जानी चाहिए। पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पेश वकील ने दलील दी है कि अतिक्रमण हटाना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और राज्य प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के वकील ने अपने जवाब में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 4 अक्टूबर 2017 के आदेश के पालन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 8 मार्च 2022 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था।
इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय वेटलैंड सूची, 2011 के अनुसार देश में 2.25 हेक्टेयर से बड़ी कुल 2,01,503 आर्द्रभूमियों को वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के नियम 4 के तहत संरक्षित किया जाना अनिवार्य है।
दो महीने में तय होगी तुलसी सरोवर की सीमा
बताया गया है कि इसरो द्वारा 2021 में जारी लिस्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुल 13,565 आद्रभूमियों की मैपिंग की गई है और अशोकनगर की वेटलैंड्स लिस्ट में तुलसी सरोवर भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान तुलसी सरोवर की हदबंदी के मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई और बताया गया कि तुलसी सरोवर की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लेकिन एनजीटी ने कहा कि केवल कागजों पर सीमांकन पर्याप्त नहीं है, जमीन पर सीमा स्तंभ लगाना जरूरी है ताकि भविष्य में अतिक्रमण रोका जा सके।
अधिकरण ने अशोकनगर के कलेक्टर को आदेश दिया कि वे दो महीने के भीतर तुलसी सरोवर के चारों ओर मुन्नार स्थापित करें। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण इस पूरे कार्य की निगरानी करेगा।
एनजीटी ने अपने आदेश में चेतावनी दी कि यदि सीमांकन नहीं किया गया तो भविष्य में वेटलैंड्स पर अवैध कब्जे बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना को लेकर राज्य सरकार के वकील ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों और क्षेत्र की आबादी को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारी और तकनीकी टीम इस पर दोबारा विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सीवेज की मात्रा और उसके सरोवर में बहाव को देखते हुए उचित व्यवस्था की जाएगी।
यह आदेश मध्य प्रदेश की हजारों आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो जल स्रोतों, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम हैं।