डार्क मैटर के आपसी टकराव से ब्रह्मांड में असामान्य घनत्व और संरचनाओं के बनने की नई संभावना सामने आई है। प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

स्वयं टकराने वाले डार्क मैटर से ब्रह्मांड के तीन बड़े रहस्यों का हुआ खुलासा: शोध

नए शोध में दावा किया गया है कि डार्क मैटर की आपसी टक्कर से तीन अलग खगोलीय रहस्यों की एक साथ व्याख्या संभव हो सकती है

Dayanidhi

  • डार्क मैटर के आपसी टकराव से ब्रह्मांड में असामान्य घनत्व और संरचनाओं के बनने की नई संभावना सामने आई है।

  • वैज्ञानिकों ने कहा कि एक ही सिद्धांत तीन अलग खगोलीय घटनाओं को समझाने में सक्षम हो सकता है।

  • जेवीएएस बी1938+666 में अत्यधिक घने पदार्थ की संरचना डार्क मैटर टकराव से उत्पन्न हो सकती है।

  • जीडी-1 तारों की धारा में दिखा रहस्यमय निशान संभवतः घने डार्क मैटर समूह के गुजरने से बना हो सकता है।

  • फोर्नैक्स 6 तारा समूह का असामान्य निर्माण स्वयं-परस्पर क्रिया करने वाले डार्क मैटर के गुरुत्वीय प्रभाव से समझाया जा सकता है।

अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया विचार सामने आया है, जो ब्रह्मांड के तीन अलग-अलग रहस्यों को एक ही सिद्धांत से समझाने का दावा करता है। यह विचार “स्वयं-परस्पर क्रिया करने वाले डार्क मैटर” से जुड़ा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि डार्क मैटर के कण आपस में टकरा सकते हैं, तो यह कई ऐसी खगोलीय घटनाओं को समझा सकता है, जो अब तक रहस्य बनी हुई थीं।

डार्क मैटर क्या है?

वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर से बना है। यह वह पदार्थ है जिसे हम देख नहीं सकते, क्योंकि यह प्रकाश या किसी भी प्रकार की विद्युत चुंबकीय किरणों के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता। इसी कारण यह अदृश्य रहता है।

डार्क मैटर केवल गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से दिखाई देता है। इसका मतलब यह है कि हम इसके प्रभाव को तारों, आकाशगंगाओं और प्रकाश के झुकाव के रूप में महसूस कर सकते हैं, लेकिन सीधे इसे देख नहीं सकते।

“मानक मॉडल” की मान्यता

अब तक वैज्ञानिकों के बीच सबसे स्वीकार्य सिद्धांत लैम्डा-सीडीएम मॉडल है। इस मॉडल के अनुसार डार्क मैटर “ठंडा” और “टकराव-रहित” होता है। इसका अर्थ है कि इसके कण एक-दूसरे से नहीं टकराते और एक-दूसरे से होकर आसानी से गुजर जाते हैं।

इस सिद्धांत के अनुसार डार्क मैटर सिर्फ गुरुत्वाकर्षण के जरिए संरचनाएं बनाता है, जैसे आकाशगंगाओं के समूह और बड़े ब्रह्मांडीय ढांचे।

नया विचार: आपस में टकराने वाला डार्क मैटर

नए शोध में वैज्ञानिकों ने कहा है कि यदि डार्क मैटर के कण एक-दूसरे से टकरा सकते हैं, तो उनका व्यवहार पूरी तरह बदल सकता है। इस सिद्धांत को स्व-अंतर्क्रियाशील डार्क मैटर कहा जाता है।

इस विचार के अनुसार डार्क मैटर सिर्फ “अदृश्य और शांत” नहीं है, बल्कि यह आपस में टकराकर ऊर्जा और गति का आदान-प्रदान कर सकता है। इससे आकाशगंगाओं के भीतर इसकी संरचना बदल सकती है और यह अधिक घना या अधिक जटिल रूप ले सकता है।

तीन अलग-अलग रहस्यों की व्याख्या

वैज्ञानिकों ने इस नए सिद्धांत को तीन अलग-अलग खगोलीय घटनाओं से जोड़कर देखा है। पहला मामला एक दूर स्थित गुरुत्वाकर्षण लेंस प्रणाली जेवीएएस बी1938+666 से जुड़ा है। इसमें अत्यधिक घना पदार्थ पाया गया है, जो सामान्य डार्क मैटर मॉडल से समझाना कठिन है। नए सिद्धांत के अनुसार, डार्क मैटर के कणों की आपसी टक्कर से ऐसा घना क्षेत्र बन सकता है।

दूसरा रहस्य हमारी ही आकाशगंगा में मौजूद जीडी-1 स्टार स्ट्रीम से जुड़ा है। यह तारों की एक लंबी धारा है, जिसमें एक जगह ऐसा निशान मिला है जैसे किसी अदृश्य वस्तु ने इसे काट दिया हो। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रभाव एक घने डार्क मैटर समूह की वजह से हो सकता है, जो टकराव-योग्य डार्क मैटर से बना हो।

तीसरा मामला फोर्नैक्स 6 नामक एक असामान्य तारा समूह से जुड़ा है, जो फोर्नैक्स बौनी आकाशगंगा में स्थित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समूह तब बना होगा जब डार्क मैटर का कोई घना हिस्सा पास से गुजरते हुए तारों को अपनी ओर खींच ले गया होगा

शोध में वैज्ञानिकों के हवाले से कहा गया है कि यह मॉडल एक साथ तीन अलग-अलग ब्रह्मांडीय समस्याओं को समझा सकता है। उनके अनुसार, यदि डार्क मैटर आपस में टकराता है, तो यह अपनी संरचना को बदल सकता है और बेहद घने क्षेत्र बना सकता है।

यह नया सिद्धांत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह ब्रह्मांड की समझ को बदल सकता है। यदि यह सही साबित होता है, तो डार्क मैटर के बारे में हमारी अब तक की समझ पूरी तरह बदल सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इस पर और गहराई से शोध किया जाएगा। यह शोध फिजिकल रिव्यू लेटर्स नाकम पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।