घोल ने सेब की सतह से एसीटामिप्रिड के करीब 93 प्रतिशत और इमिडाक्लोप्रिड के करीब 89 प्रतिशत अवशेष हटाए। प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

फल-सब्जियों की सफाई और ताजगी, दोनों में मदद करेगा वैज्ञानिकों का नया जैविक घोल

वैज्ञानिकों ने फल व सब्जियों को धोने के लिए एक ऐसा घोल विकसित किया है जो कीटनाशकों के अवशेषों को हटाता है और इन्हें लंबे समय तक ताजा रखता है।

Dayanidhi

  • नए जैविक घोल ने सेब की सतह से थायाबेंडाजोल जैसे कीटनाशक अवशेषों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हटाया।

  • घोल ने सेब की सतह से एसीटामिप्रिड के करीब 93 प्रतिशत और इमिडाक्लोप्रिड के करीब 89 प्रतिशत अवशेष हटाए।

  • 15 दिनों में बिना उपचार वाले अंगूरों का वजन 45 प्रतिशत घटा, जबकि उपचारित अंगूरों में केवल 21 प्रतिशत कमी आई।

  • 48 घंटे में बिना उपचार वाले कटे सेबों का वजन 17 प्रतिशत घटा, जबकि उपचारित सेबों में केवल नौ प्रतिशत कमी आई।

  • एक सेब के लिए इस जैविक घोल में इस्तेमाल कच्चे माल की अनुमानित लागत 0.032 अमेरिकी डॉलर से कम आंकी गई है।

बाजार से फल और सब्जियां खरीदने के बाद उन्हें घर लाकर धोना लगभग हर परिवार की रोजमर्रा की आदत है। लोग इन्हें साफ करते हैं ताकि सतह पर मौजूद मिट्टी, गंदगी और कीटनाशकों के अवशेष कुछ हद तक हट सकें। लेकिन ताजे फल और सब्जियां जल्दी खराब भी होने लगते हैं। अंगूर सिकुड़ जाते हैं, कटे हुए सेब भूरे पड़ने लगते हैं और जामुन जैसे फल कुछ ही समय में खराब हो सकते हैं।

अब वैज्ञानिकों ने ऐसा जैविक घोल विकसित किया है, जो फल की सतह से कुछ कीटनाशक अवशेष हटाने के साथ उसकी ताजगी बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। हालांकि इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने से पहले अभी और जांच की जरूरत जताई गई है।

पानी से ज्यादा असरदार होने का दावा

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की सलाह है कि फलों और सब्जियों को बहते पानी में धोना चाहिए। उन्हें साफ करने के लिए साबुन, डिटर्जेंट या बाजार में मिलने वाले कमर्शियल प्रोड्यूस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पानी सतह पर मौजूद कुछ गंदगी और अवशेष हटाने में मदद करता है, लेकिन हर तरह के कीटनाशक को पूरी तरह हटाना संभव नहीं होता।

एसीएस नैनो नामक पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन में तैयार किए गए घोल का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह फल की सतह पर मौजूद कुछ कीटनाशकों को हटाने के साथ एक बहुत पतली परत भी बना सकता है। यह परत फल से पानी की कमी को धीमा करने में मदद करती है और उसे लंबे समय तक ताजा रखने में सहायक हो सकती है।

स्टार्च, टैनिक एसिड और आयरन से तैयार

इस जैविक घोल में स्टार्च के बेहद छोटे कण, टैनिक एसिड और आयरन का इस्तेमाल किया गया है। स्टार्च पौधों से मिलने वाला पदार्थ है और इसका इस्तेमाल खाद्य विज्ञान में पतली परत बनाने के लिए किया जाता है। टैनिक एसिड कई पौधों और खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। आयरन टैनिक एसिड के साथ मिलकर एक महीन संरचना बनाने में मदद करता है।

सरल शब्दों में कहें तो स्टार्च इस घोल का आधार है, टैनिक एसिड उपयोगी रासायनिक गुण देता है और आयरन पूरी संरचना को जोड़ने में मदद करता है। फल को इस वॉश में धोने पर यह संरचना सतह पर मौजूद कुछ कीटनाशक अणुओं के साथ संपर्क करती है और उन्हें हटाने में मदद कर सकती है।

सेब पर 85 प्रतिशत से ज्यादा कीटनाशक हटे

शोधकर्ताओं ने सेब पर इस घोल का परीक्षण किया। इसमें थायाबेंडाजोल नाम के फफूंदनाशक को हटाने की क्षमता 85 प्रतिशत से अधिक रही। इसकी तुलना में सामान्य नल के पानी से करीब 48 प्रतिशत, बेकिंग सोडा से 65 प्रतिशत और सामान्य स्टार्च से 61 प्रतिशत अवशेष हटे।

दो अन्य कीटनाशकों पर भी परीक्षण किया गया। शोध के अनुसार, घोल ने सेब की सतह से एसीटामिप्रिड के करीब 93 प्रतिशत और इमिडाक्लोप्रिड के करीब 89 प्रतिशत अवशेष हटाए।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि यह फल के अंदर मौजूद सभी कीटनाशकों को निकाल सकता है। कुछ कीटनाशक पौधे के अंदर तक पहुंच सकते हैं और उन्हें फल की बाहरी सतह धोकर हटाना मुश्किल होता है।

अंगूर और सेब ज्यादा समय तक रहे ताजा

इस घोल का दूसरा फायदा फल की ताजगी से जुड़ा पाया गया। 15 दिन के परीक्षण में बिना उपचार वाले अंगूरों का वजन करीब 45 प्रतिशत कम हो गया। वहीं, घोल से उपचारित अंगूरों के वजन में लगभग 21 प्रतिशत की कमी आई।

इसी तरह, कटे हुए सेबों में 48 घंटे के दौरान बिना उपचार वाले नमूनों का वजन करीब 17 प्रतिशत घटा, जबकि उपचारित सेबों में यह कमी लगभग नौ प्रतिशत रही। उपचारित अंगूर ज्यादा ताजा दिखाई दिए और सेब के टुकड़े भी लंबे समय तक कम भूरे नजर आए।

प्रयोगशाला में इस परत ने ऑक्सीकरण को धीमा करने और एक प्रकार के बैक्टीरिया की वृद्धि रोकने की क्षमता भी दिखाई। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वॉश उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। इसके लिए अभी कई और सुरक्षा परीक्षण जरूरी हैं।

फिलहाल फैक्ट्री में इस्तेमाल की संभावना

शोधकर्ताओं का मानना है कि शुरुआती दौर में इस घोल का इस्तेमाल घर की रसोई के बजाय फल और सब्जियों की प्रोसेसिंग इकाइयों में ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। वहां पानी की मात्रा, घोल की सांद्रता और धोने का समय बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

शोध में कच्चे माल की अनुमानित लागत एक सेब के लिए 0.032 अमेरिकी डॉलर से कम बताई गई है। वैज्ञानिक अब घरों में इस्तेमाल किए जा सकने वाले स्प्रे के रूप पर भी काम कर रहे हैं।

फिलहाल इस तकनीक को लेकर उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन इसे बाजार में लाने से पहले अलग-अलग फलों और सब्जियों पर बड़े स्तर पर परीक्षण और जरूरी नियामकीय मंजूरी की जरूरत होगी। अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो भविष्य में एक ऐसा घोल संभव हो सकता है जो फल को साफ करने के साथ उसकी ताजगी भी कुछ समय तक बनाए रखने में मदद करे।