वैज्ञानिकों ने बताया कि केवल सही दूरी नहीं, पर्याप्त पानी और जलवायु संतुलन भी जीवन के लिए जरूरी होता है। फोटो साभार: आईस्टॉक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

नए शोध में बड़ा खुलासा: कई ग्रहों जिन्हें रहने लायक माना जा रहा था, वो भी जीवन के लिए आसान नहीं

शोध के मुताबिक, कई ग्रह सही जगह होने के बावजूद पानी कम होने और जलवायु संतुलन की कमी से जीवन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त पाए गए।

Dayanidhi

  • नए शोध में पता चला कि रहने योग्य क्षेत्र के कई ग्रह पानी की कमी से जीवन के लिए अनुपयुक्त हो सकते हैं।

  • वैज्ञानिकों ने बताया कि केवल सही दूरी नहीं, पर्याप्त पानी और जलवायु संतुलन भी जीवन के लिए जरूरी होता है।

  • अध्ययन के अनुसार कई एक्सोप्लैनेट “रहने योग्य” दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे सूखे और जीवन के लिए असुरक्षित हैं।

  • कार्बन चक्र टूटने से ग्रहों का तापमान बढ़ता है और वे धीरे-धीरे जीवन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो जाते हैं।

  • शुक्र ग्रह जैसे उदाहरण बताते हैं कि शुरुआती पानी की कमी किसी ग्रह को गर्म और जीवनहीन बना सकती है।

हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक नई रिसर्च ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है। अब तक माना जाता था कि जो ग्रह अपने तारे के “रहने योग्य क्षेत्र” में होते हैं, वहां जीवन की संभावना हो सकती है क्योंकि वहां तापमान तरल पानी के लिए उपयुक्त हो सकता है। लेकिन अब नए अध्ययन से पता चला है कि केवल सही दूरी पर होना ही जीवन के लिए पर्याप्त नहीं है। अगर किसी ग्रह पर पानी बहुत कम है, तो वह ग्रह जीवन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो सकता है।

यह शोध अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में बताया गया है कि पृथ्वी जैसे किसी ग्रह को लंबे समय तक रहने योग्य बनाए रखने के लिए उसमें कम से कम पृथ्वी के महासागरों के पानी का लगभग 20 से 50 प्रतिशत हिस्सा होना जरूरी है। इससे कम पानी होने पर ग्रह की जलवायु व्यवस्था बिगड़ सकती है और जीवन संभव नहीं रह सकता। यह शोध दि प्लेनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

अब तक 6000 से अधिक एक्सोप्लैनेट की खोज

वैज्ञानिक अब तक 6000 से अधिक ऐसे ग्रहों की खोज कर चुके हैं जो हमारे सौर मंडल के बाहर स्थित हैं, जिन्हें एक्सोप्लैनेट कहा जाता है। माना जाता है कि आकाशगंगा में ऐसे अरबों ग्रह मौजूद हो सकते हैं। इनमें से कई ग्रह अपने तारे के उस क्षेत्र में स्थित हैं जहां तापमान तरल पानी के लिए अनुकूल हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल सही स्थान पर होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्रह की आंतरिक संरचना और उसमें पानी की मात्रा भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पानी और जीवन का गहरा संबंध

पानी को जीवन का आधार माना जाता है, लेकिन यह भी सच है कि केवल पानी की मौजूदगी ही जीवन की गारंटी नहीं देती। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने उन ग्रहों पर ध्यान दिया जिनमें बहुत कम मात्रा में पानी हो सकता है। ऐसे ग्रह, जिन्हें “डेजर्ट प्लैनेट” यानी रेगिस्तानी ग्रह कहा जाता है, देखने में रहने योग्य क्षेत्र में हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे जीवन के लिए अनुकूल नहीं होते।

अध्ययन के अनुसार, ग्रह की जलवायु को संतुलित रखने में “कार्बन चक्र” नामक एक प्राकृतिक प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण होती है। पृथ्वी पर यह प्रक्रिया पानी के माध्यम से काम करती है और लंबे समय तक तापमान को नियंत्रित रखती है।

कार्बन चक्र कैसे काम करता है

पृथ्वी पर जब ज्वालामुखी से कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, तो वह वायुमंडल में जमा होती है। बारिश के पानी में यह गैस घुलकर चट्टानों के साथ प्रतिक्रिया करती है। धीरे-धीरे यह कार्बन समुद्र के तल में जमा हो जाता है और फिर भूगर्भीय प्रक्रियाओं के माध्यम से वापस पृथ्वी के अंदर चला जाता है। यह चक्र लाखों वर्षों तक चलता रहता है और पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखता है।

लेकिन अगर किसी ग्रह पर पानी बहुत कम हो, तो बारिश ठीक से नहीं हो पाती और यह पूरा चक्र टूट जाता है। ऐसे में कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में बढ़ती रहती है, जिससे ग्रह का तापमान लगातार बढ़ने लगता है।

सूखे ग्रहों पर जीवन क्यों मुश्किल है

जब किसी ग्रह पर पानी की कमी होती है, तो वह अपनी जलवायु को नियंत्रित नहीं कर पाता। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, बचा हुआ पानी भी वाष्प बनकर उड़ जाता है। इससे ग्रह और भी गर्म होता जाता है और अंत में वहां जीवन के लिए परिस्थितियां पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे ग्रह, भले ही शुरुआत में रहने योग्य लगें, समय के साथ पूरी तरह अनुपयुक्त बन सकते हैं।

शुक्र ग्रह एक उदाहरण के रूप में

हमारे सौर मंडल का पड़ोसी ग्रह शुक्र इस स्थिति का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है। आकार में यह पृथ्वी के लगभग समान है और माना जाता है कि यह भी लगभग उसी समय बना था। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआती समय में यहां भी पानी मौजूद हो सकता था।

लेकिन आज शुक्र ग्रह की स्थिति बहुत भयानक है। वहां का तापमान इतना अधिक है कि यह किसी भट्टी जैसा महसूस होता है। वायुमंडलीय दबाव इतना अधिक है कि अगर कोई वहां खड़ा हो तो उसे भारी दबाव झेलना पड़ेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि शुक्र पर पानी की कमी और कार्बन चक्र के असंतुलन ने इसे इतना गर्म और जीवन के लिए असंभव बना दिया।

भविष्य की खोजों के लिए महत्वपूर्ण संकेत

यह शोध अंतरिक्ष विज्ञान के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका मतलब है कि जब वैज्ञानिक भविष्य में जीवन योग्य ग्रहों की खोज करेंगे, तो उन्हें केवल ग्रह की स्थिति नहीं, बल्कि उसकी पानी की मात्रा और भूगर्भीय प्रक्रियाओं पर भी ध्यान देना होगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें अभी तक ऐसे ग्रहों की पूरी समझ नहीं है, लेकिन आने वाले समय में नई अंतरिक्ष मिशन और शोध इस रहस्य को और स्पष्ट करेंगे।

इस नई खोज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ब्रह्मांड में जीवन की संभावना केवल “सही दूरी” पर निर्भर नहीं करती। पानी, कार्बन चक्र और ग्रह की आंतरिक संरचना भी उतनी ही जरूरी हैं। यदि किसी ग्रह पर ये संतुलन नहीं है, तो वह ग्रह भले ही देखने में पृथ्वी जैसा लगे, लेकिन वह जीवन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो सकता है।