भारत में मिली 3.5 अरब साल पुरानी चट्टान में वैज्ञानिकों ने प्राचीन सूक्ष्म जीवों के संभावित जैविक संकेत खोजे हैं। फोटो साभार: प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

3.5 अरब साल पुरानी भारतीय चट्टान में जीवन के शुरुआती संकेत मिलने का दावा

3.5 अरब साल पुरानी भारतीय चट्टान में मिले जीवन के संभावित निशान, वैज्ञानिकों का दावा; खोज से पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के रहस्य खुलने की उम्मीद

Dayanidhi

  • भारत में मिली 3.5 अरब साल पुरानी चट्टान में वैज्ञानिकों ने प्राचीन सूक्ष्म जीवों के संभावित जैविक संकेत खोजे हैं।

  • सिंहभूम क्रेटन की कार्बनयुक्त चर्ट में माइक्रोबियल मैट जैसी परतें मिलीं, जो शुरुआती जीवन की मौजूदगी का संकेत देती हैं।

  • यूरेनियम-लेड डेटिंग से चट्टान की उम्र करीब 3.497 अरब साल आंकी गई, जिससे खोज का महत्व बढ़ गया है।

  • कार्बन-12 और कार्बन-13 के अनुपात तथा रमन जांच ने कार्बन के जैविक स्रोत की संभावना मजबूत की है।

  • वैज्ञानिकों के अनुसार, स्वतंत्र जांच से पुष्टि होने पर यह पृथ्वी पर जीवन के सबसे पुराने प्रमाणों में शामिल होगा।

वैज्ञानिकों की एक टीम ने पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत से जुड़े एक महत्वपूर्ण संकेत मिलने का दावा किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, उन्हें करीब 3.5 अरब साल पुरानी एक चट्टान में सूक्ष्म जीवों के जीवन के निशान मिले हैं। यह चट्टान कार्बन से भरपूर है और इसकी परतों में ऐसे संकेत दिखाई देते हैं, जो प्राचीन सूक्ष्म जीवों की बस्तियों यानी माइक्रोबियल मैट से मिलते-जुलते हैं।

यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। अगर इस खोज की स्वतंत्र जांच में भी पुष्टि होती है, तो यह पृथ्वी पर जीवन के सबसे पुराने सीधे प्रमाणों में से एक हो सकता है।

पृथ्वी पर जीवन कब शुरू हुआ?

पृथ्वी की उम्र करीब 4.5 अरब साल मानी जाती है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारे ग्रह पर जीवन कब और कैसे शुरू हुआ। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए वे पृथ्वी की सबसे पुरानी चट्टानों का अध्ययन करते हैं।

हालांकि यह काम आसान नहीं है। अरबों साल के दौरान चट्टानों को अत्यधिक गर्मी, दबाव और रासायनिक बदलावों का सामना करना पड़ा है। इस वजह से उनमें मौजूद पुराने जैविक संकेत बदल सकते हैं या पूरी तरह नष्ट भी हो सकते हैं।

ग्रीनलैंड, दक्षिण अफ्रीका और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से मिली कुछ चट्टानों में भी 3.4 से 3.8 अरब साल पुराने जीवन के संभावित संकेत मिले हैं। लेकिन उन खोजों को लेकर वैज्ञानिकों के बीच पूरी सहमति नहीं है।

भारत की चट्टान पर हुआ अध्ययन

नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित सिंहभूम क्रेटन की एक चट्टान का अध्ययन किया। यह क्षेत्र बेहद पुरानी चट्टानों के लिए जाना जाता है। शोधकर्ताओं ने जिस चट्टान को जांचा, वह एक प्रकार का पत्थर है जिसे चर्ट कहा जाता है। यह चट्टान कार्बन से भरपूर थी और इसमें सिलिका तथा कार्बन वाले पदार्थ की बहुत पतली, बार-बार दिखाई देने वाली परतें थीं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन परतों की बनावट प्राचीन माइक्रोबियल मैट जैसी है। माइक्रोबियल मैट सूक्ष्म जीवों, खासकर बैक्टीरिया और आर्किया, से बनी कई परतों वाली चादर जैसी संरचनाएं होती हैं। ऐसे जीव समुद्र या गर्म पानी वाले वातावरण में एक साथ रह सकते हैं।

चट्टान की उम्र कैसे पता चली?

वैज्ञानिकों ने चट्टान में मौजूद जिरकॉन नाम के छोटे खनिज कणों की उम्र पता करने के लिए यूरेनियम-लेड डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। इस जांच से चट्टान की उम्र करीब 3.497 अरब साल सामने आई। शोधकर्ताओं का मानना है कि उस समय इस क्षेत्र में ज्वालामुखीय गतिविधियां भी हो रही थीं। ज्वालामुखीय गतिविधि के दौरान बने जिरकॉन क्रिस्टल चट्टान की उम्र समझने में मदद करते हैं।

अगर यह उम्र चट्टान में मौजूद परतों के बनने के समय को सही तरीके से दर्शाती है, तो इसमें पाए गए जीवन के संकेत बेहद प्राचीन माने जाएंगे।

कार्बन ने दिया जीवन का संकेत

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चट्टान में मौजूद कार्बन के अलग-अलग रूपों का भी अध्ययन किया। कार्बन के दो महत्वपूर्ण रूप कार्बन-12 और कार्बन-13 हैं। जीवित सूक्ष्म जीवों द्वारा कार्बन का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में अक्सर कार्बन-12 की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक रह जाती है। इस चट्टान में भी ऐसा ही कार्बन अनुपात पाया गया। वैज्ञानिकों ने इसे जैविक गतिविधि के पक्ष में एक महत्वपूर्ण संकेत माना।

इसके अलावा रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी नाम की तकनीक से कार्बन की संरचना की जांच की गई। इसमें बड़ी मात्रा में अपेक्षाकृत कम व्यवस्थित केरोजन मिला। केरोजन एक ठोस कार्बनयुक्त पदार्थ है, जो कई प्राचीन तलछटी चट्टानों में पाया जाता है।

अभी और जांच जरूरी

वैज्ञानिकों का दावा अहम है, लेकिन इसे अंतिम प्रमाण मानने से पहले और शोध की जरूरत है। भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएं भी कभी-कभी ऐसे रासायनिक संकेत पैदा कर सकती हैं, जो जीवन से जुड़े संकेतों जैसे दिखाई देते हैं।

इसलिए दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा स्वतंत्र जांच करना जरूरी होगा। वे यह देख सकते हैं कि जिरकॉन वास्तव में चट्टान के बनने का समय बताते हैं या नहीं। साथ ही, आसपास की चट्टानों में भी ऐसी ही परतें, सूक्ष्म संरचनाएं और रासायनिक संकेत खोजे जा सकते हैं।

यदि भविष्य के अध्ययनों में इन नतीजों की पुष्टि होती है, तो भारत की यह करीब 3.5 अरब साल पुरानी चट्टान पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती इतिहास को समझने में एक बेहद महत्वपूर्ण खोज साबित हो सकती है।