डंपसाइट पर जमा कचरे का पहाड़; प्रतीकात्मक तस्वीर: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) 
स्वच्छता

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026: 100 किलो से ज्यादा कचरा? अब निपटान की जिम्मेदारी आपकी

एनजीटी ने इस मामले में एक संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति 2026 के नियमों के प्रभावी पालन की जांच करेगी, जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएगी और छह हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपेगी।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • एनजीटी ने तीन अहम मामलों में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक जांच और समयबद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत हर दिन 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले सभी संस्थानों को अपने कचरे के निपटान की सीधी जिम्मेदारी दी गई है। एनजीटी ने इस मामले में नियम के प्रभावी पालन की निगरानी के लिए राजस्थान में एक संयुक्त समिति गठित कर छह सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।

  • वहीं पश्चिम बंगाल के बाराबनी क्षेत्र में अवैध ईंट भट्टों को लेकर एनजीटी ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही यदि नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिकायतों में बिना अनुमति संचालन, कृषि भूमि पर कब्जा और मिट्टी के अवैध दोहन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

  • इसी तरह झारखंड के रामगढ़ में स्पंज आयरन फैक्ट्रियों से हो रहे प्रदूषण पर भी एनजीटी ने संज्ञान लेते हुए दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसे मौके पर निरीक्षण कर छह सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

  • इन तीनों आदेशों से स्पष्ट है कि एनजीटी अब पर्यावरण उल्लंघनों पर निगरानी और प्रवर्तन को और अधिक कठोर और जवाबदेह बनाने की दिशा में सक्रिय है।

एक अप्रैल 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत अब वे सभी संस्थान और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान जैसे केंद्रीय सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, निजी कंपनियां, औद्योगिक इकाइयां, होटल, अस्पताल, मॉल और हाउसिंग सोसायटी, जो हर रोज 100 किलो से अधिक कचरा पैदा करते हैं, उसके निपटान के लिए खुद जिम्मेदार होंगे।

इस अहम प्रावधान पर 15 अप्रैल 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की केंद्रीय पीठ में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

एनजीटी ने निर्देश दिया कि एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जिसमें राजस्थान के शहरी विकास विभाग, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति 2026 के नियमों के प्रभावी पालन की जांच करेगी, जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएगी और छह हफ्तों के भीतर तथ्यात्मक व कार्रवाई रिपोर्ट अदालत में सौंपेगी।

एनजीटी के इस सख्त रुख और नए नियमों के लागू होने के साथ अब बड़े कचरा उत्पादकों के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता अनिवार्य हो गई है। आने वाले समय में नियमों के प्रभावी पालन पर ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा और शहरों की स्वच्छता की वास्तविक तस्वीर तय होगी।

पश्चिम बंगाल: क्या पर्यावरण नियमों को ताक पर रख चले रहे ईंट भट्ठे, एनजीटी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 13 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के बाराबनी में चल रहे अवैध ईंट भट्टों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने आदेश और एप्लीकेशन की एक कॉपी पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी को भेजने का निर्देश दिया है।

साथ ही बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एक अधिकारी को मौके पर भेजे और यह जांच करे कि क्या संबंधित ईंट भट्ठे बिना वैध अनुमति और पर्यावरणीय शर्तों के तो नहीं चल रहे। एनजीटी ने साफ कहा है कि यदि जांच में किसी भी तरह का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार इकाइयों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह मामला एक शिकायत पत्र के आधार पर दर्ज किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि बाराबनी के जॉयमडांगा, बाराबनी स्टेशन और भनौरा क्षेत्र में ‘राजा ब्रिक्स’, ‘जेएमबी ब्रिकफील्ड’ और ‘जीआरसी ब्रिकफील्ड’ बिना पर्यावरणीय मंजूरी के चल रहे हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन इकाइयों द्वारा कृषि भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है और जंगल से ऊपरी उपजाऊ मिट्टी का अवैध दोहन किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

यह मामला केवल अवैध ईंट भट्टों तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब एनजीटी के निर्देशों के बाद साफ है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।

हवा में जहर, घरों तक धूल: रामगढ़ प्रदूषण मामले में एनजीटी ने दिए जांच के आदेश

झारखंड के रामगढ़ में स्पंज आयरन फैक्ट्रियों से फैल रहे प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने फैक्ट्रियों द्वारा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच समिति के गठन का आदेश दिया है।

समिति में रामगढ़ के जिलाधिकारी और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करे और छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे।

एनजीटी ने इस मामले में झारखंड सरकार, पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव, रामगढ़ के जिलाधिकारी, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फाउंड्री एंड कास्टिंग्स और गौतम फेरो अलॉयज सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।

याचिकाकर्ता की शिकायत है कि रामगढ़ के मरार क्षेत्र में मौजूद बिहार फाउंड्री कास्टिंग और गौतम फेरो अलॉयज अवैध रूप से चल रही हैं। इनसे हर दिन करीब 400 से 500 ग्राम कोयले की धूल आसपास के घरों तक पहुंच रही है, जिससे लोगों का जीवन दूभर हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का दर्द है कि फैक्ट्रियों की धूल और प्रदूषण ने उनकी सांसों तक को भारी कर दिया है।

आरोप है रामगढ़ में कई स्पंज फैक्ट्रियां गैर-कानूनी तरीके से चल रही हैं, जिससे वहां लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अब उम्मीद है कि एनजीटी की यह सख्त पहल रामगढ़ की हवा में घुलते जहर पर लगाम लगाएगी और लोगों को राहत की सांस मिल सकेगी।