प्रदूषण

शिप्रा नदी प्रदूषण पर एनजीटी की नजर, कैंची धाम में बेकाबू निर्माण पर मांगा जवाब

अदालत ने जिला विकास प्राधिकरण नैनीताल से मांगा पूरा ब्योरा, कचरा-सीवेज प्रबंधन पर जवाब तलब

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नैनीताल के कैंची धाम में अनियंत्रित निर्माण और शिप्रा नदी के प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया है।

  • एनजीटी ने जिला विकास प्राधिकरण को सभी निर्माण कार्यों का विवरण देने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश दिया है। ठोस कचरा और सीवेज प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

  • यह मामला हल्द्वानी (नैनीताल) में हीरा विहार के निवासियों द्वारा भेजी गई एक पत्र याचिका के बाद सामने आया है। याचिका में कैंची धाम क्षेत्र में शिप्रा नदी के प्रदूषण, ठोस कचरे और सीवेज के अव्यवस्थित प्रबंधन तथा औद्योगिक व व्यावसायिक अपशिष्ट को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज की गई थीं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 27 जनवरी 2026 को कैंची धाम में हुए निर्माण कार्यों और संभावित अतिक्रमणों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

मामला उत्तराखंड के नैनीताल जिले का है। अधिकरण ने नैनीताल के जिला विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह कैंची धाम में हुए सभी निर्माण कार्यों का पूरा विवरण दे, साथ ही यह भी बताए कि कहीं अतिक्रमण हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो उसे हटाने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।

एनजीटी ने नैनीताल के मुख्य विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ठोस कचरा, सीवेज और औद्योगिक/व्यावसायिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी सभी जानकारियां प्रस्तुत करें। साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के पालन की क्या स्थिति है उसे भी स्पष्ट करने को कहा गया है।

यह मामला हल्द्वानी (नैनीताल) में हीरा विहार के निवासियों द्वारा भेजी गई एक पत्र याचिका के बाद सामने आया है। याचिका में कैंची धाम क्षेत्र में शिप्रा नदी के प्रदूषण, ठोस कचरे और सीवेज के अव्यवस्थित प्रबंधन तथा औद्योगिक व व्यावसायिक अपशिष्ट को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज की गई थीं।

रिपोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों की कमी पर जताई चिंता

उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा 28 अगस्त 2025 को दाखिल जवाबी हलफनामे में बताया गया कि 18 अगस्त 2025 को क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। इस संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक भवाली-कैंची धाम क्षेत्र में पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय स्वच्छता और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नदी की गुणवत्ता बनाए रखने और मंदिर की पवित्रता की रक्षा के लिए उपयुक्त स्थानों पर पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था जरूरी है।

इसके साथ ही, पर्यटकों की भारी आवाजाही से उत्पन्न हो रहे ठोस कचरे को देखते हुए डस्टबिन की संख्या बढ़ाने और कचरे के संग्रह व पृथक्करण की प्रभावी व्यवस्था करने की भी सिफारिश की गई है। इसके अलावा, क्षेत्र में उत्पन्न सीवेज और अपशिष्ट के निपटारे के लिए उचित क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्राथमिकता के आधार पर स्थापित करने की जरूरत बताई गई है।

निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने 4 अगस्त 2025 की अधिसूचना के जरिए श्री कैंची धाम के दो किलोमीटर के दायरे को नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के अंतर्गत विकास क्षेत्र घोषित किया है।

एनजीटी की सख्ती ने साफ कर दिया है कि आस्था के केंद्रों में भी पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एनजीटी के निर्देशों के बाद यह देखना अहम होगा कि प्रशासन कब और कैसे कैंची धाम क्षेत्र में निर्माण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और नदी संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाता है।