ओडिशा के मयूरभंज जिले में बुढ़ाबलंग नदी की रेत को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने नदी के प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव की तस्वीर सामने रखी है।
टेंटल और पांडुपाल रेत घाटों पर खनन के लिए न तो लीज दी गई थी और न ही रेत उठाने की कोई अल्पकालिक अनुमति थी। इसके बावजूद यहां बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने के आरोप लगे हैं।
आवेदक के मुताबिक, दोनों जगहों पर 15 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 5 लाख घन मीटर से ज्यादा रेत निकाली जा रही थी। साथ ही अवैध भंडारण और नदी के तटबंधों को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं।
खनन विभाग ने एनजीटी को बताया कि रंगापानी पुल के पास रात में हुई कार्रवाई में करीब 4,000 घन मीटर रेत अवैध रूप से निकाले जाने का मामला सामने आया था। इस्तेमाल की गई खुदाई मशीन भी जब्त की गई।
एनजीटी के आदेश पर गठित संयुक्त समिति ने जून में दोनों स्थलों का निरीक्षण किया। अब विभाग ने 2023–2026 के बीच निकाली गई रेत की वास्तविक मात्रा जानने के लिए वैज्ञानिक आकलन मांगा है। इस बीच पांडुपाल में बनाई गई अवैध अस्थायी सड़क भी ध्वस्त की जा चुकी है। मामला सिर्फ रेत की लूट का नहीं, बल्कि नदी के भविष्य और उसके प्राकृतिक संतुलन का भी है।
मयूरभंज जिले की बुढ़ाबलंग नदी में टेंटल और पांडुपाल रेत घाटों से कथित अवैध खनन का मामला सामने आया है।
ओडिशा के खनन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों रेत घाटों को ओडिशा माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स, 2016 (ओएमएमसी रूल्स, 2016) के तहत न तो लीज दी गई थी और न ही रेत उठाने की कोई अल्पकालिक अनुमति जारी की गई थी। ऐसे में यहां से किसी भी तरह से रेत निकालना अवैध खनन माना जाएगा।
यह जानकारी मयूरभंज के खनन अधिकारी ने 7 सितंबर 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में दी है। यह रिपोर्ट ओडिशा के इस्पात एवं खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मयूरभंज के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट और भद्रक के खान विभाग के उपनिदेशक की ओर से दाखिल की गई है।
यह मामला मयूरभंज जिले के बादशाही तहसील के अंतर्गत आने वाले बुढ़ाबलंग नदी के टेंटल और पांडुपाल रेत घाटों से जुड़ा है।
5,00,000 घन मीटर से ज्यादा रेत के खनन का लगा है आरोप
आवेदक ने एनजीटी में आरोप लगाया था कि दोनों जगहों पर 15 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 5,00,000 घन मीटर से ज्यादा रेत निकाली जा रही थी। इसके अलावा रेत का अवैध भंडारण करने और नदी के तटबंध काटने के भी आरोप लगे हैं।
खनन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, एनजीटी में आवेदन दायर होने से पहले ही विभाग को टेंटल के रंगापानी पुल के पास रात में अवैध रूप से रेत उठाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद एपीआर बल और खनन दस्ते ने संयुक्त कार्रवाई की।
जांच में पुल के सुरक्षा क्षेत्र से करीब 4,000 घन मीटर रेत निकालकर ले जाने की बात सामने आई। इस मामले में खननकर्ता के खिलाफ केस दर्ज किया गया। रेत निकालने में इस्तेमाल की गई खुदाई मशीन (एक्सकेवेटर) को बाद में बलका जंगल से पकड़ा गया और उसके खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
एनजीटी के आदेश पर बनी संयुक्त समिति
इस मामले में एनजीटी के 12 मई 2026 के आदेश के बाद एक संयुक्त समिति बनाई गई। समिति को दोनों जगहों का दौरा कर वास्तविक स्थिति की जांच करने और नुकसान की भरपाई तथा आगे की रोकथाम के उपाय सुझाने के निर्देश दिए गए थे। समिति ने 22 जून 2026 को दोनों रेत घाटों का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में मौके पर देखी गई स्थिति दर्ज की।
अवैध रूप से निकाली गई रेत की वास्तविक मात्रा का पता लगाने के लिए खनन अधिकारियों ने ओडिशा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 9 जुलाई और 17 अगस्त 2026 को पत्र भेजे।
विभाग ने 2023 से 2026 के बीच रेत की दोबारा भरपाई और डिजिटल एलिवेशन मॉडल के आधार पर दोनों जगहों से अवैध रूप से निकाली गई रेत की मात्रा का आकलन मांगा है। हालांकि, रिपोर्ट दाखिल होने तक ओडिशा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर से ये रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थीं।
पांडुपाल में बनाई अस्थाई सड़क भी हटाई गई
नदी से रेत का इस तरह लगातार और बिना अनुमति के उठाया जाना केवल खनिज संसाधन की चोरी का मामला नहीं है। नदी की तलहटी और उसके किनारों में होने वाला अनियंत्रित बदलाव स्थानीय जलप्रवाह और नदी के प्राकृतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में 3 जून 2026 से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 लागू की गई है। इसके बाद पुलिस, राजस्व और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने 13 मई 2026 को पांडुपाल में बनाई गई अवैध अस्थाई सड़क को ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई अवैध गतिविधियों को रोकने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए की गई थी।
बुढ़ाबलंग नदी के ये रेत घाट अब केवल खनन नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं रह गए हैं। यह मामला इस बड़े सवाल की ओर भी इशारा करता है कि नदियों से रेत निकालने की सीमा तय न हो और निगरानी कमजोर रहे, तो नदी का प्राकृतिक संसाधन कितनी तेजी से खत्म हो सकता है। रेत नदी के लिए सिर्फ एक खनिज नहीं, बल्कि उसके प्रवाह, किनारों और पूरे नदी तंत्र का अहम हिस्सा है।