यह दिन धूम्रपान करने वालों को प्रोत्साहित करता है कि वे एक दिन धूम्रपान मुक्त शुरू करें, धीरे-धीरे छोड़ने की शुरुआत करें।
11 मार्च 2026 को जागरूकता कार्यक्रम, डिजिटल अभियान और स्थानीय गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, तंबाकू के स्वास्थ्य जोखिमों पर प्रकाश डालने हेतु।
धूम्रपान निषेध दिवस की शुरुआत 1984 में यूनाइटेड किंगडम में हुई थी, और अब मार्च में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य संगठनों द्वारा समर्थन मिलता है।
2026 की थीम, “एक धूम्रपान मुक्त जीवन एक धूम्रपान मुक्त दिन से शुरू होता है”, 11 मार्च को धूम्रपान छोड़ने का दिन बनाती है।
धूम्रपान निषेध दिवस या नो स्मोकिंग डे हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक करना और धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। साल 2026 में धूम्रपान निषेध दिवस 11 मार्च को पड़ रहा है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं और एक स्वस्थ जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं।
धूम्रपान निषेध दिवस 2026 की थीम
इस साल की थीम: एक धूम्रपान मुक्त जीवन एक धूम्रपान मुक्त दिन से शुरू होता है। इस संदेश का मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति एक दिन भी धूम्रपान नहीं करता, तो यह उसके लिए धूम्रपान छोड़ने की यात्रा का पहला कदम हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि यह छोटा कदम भी आत्मविश्वास बढ़ाता है और भविष्य में पूरी तरह तंबाकू छोड़ने में मदद करता है।
भारत में तंबाकू का प्रयोग
भारत में तंबाकू का उपयोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, लगभग 10-11 फीसदी वयस्क लोग धूम्रपान करते हैं। भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग धूम्रपान करते हैं। तंबाकू के कारण सालाना 13.5 लाख से अधिक मौतें होती हैं।
धूम्रपान से ज्यादा जिह्वा या अन्य रूप में तंबाकू का उपयोग होता है, जो 21.4 फीसदी वयस्कों को प्रभावित करता है। तंबाकू से होने वाली बीमारियां भारत में कुल मौतों का 9.5 फीसदी हिस्सा हैं। भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और निर्माता है। सस्ते और आसानी से उपलब्ध उत्पादों के कारण तंबाकू का उपयोग बहुत आम है।
तंबाकू उपयोग के आंकड़े
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस ) 2016-17 के अनुसार, भारत में 26.7 करोड़ वयस्क (15 वर्ष से ऊपर) तंबाकू का उपयोग करते हैं। यह कुल वयस्क आबादी का लगभग 29 फीसदी है।
सामान्य तंबाकू उत्पादों में स्मोकेलेस तंबाकू - खैनी, गुटखा, सुपारी व पान में तंबाकू, जर्दा, धूम्रपान के रूप: बीड़ी, सिगरेट, हुक्का शामिल हैं।
तंबाकू का आर्थिक प्रभाव
तंबाकू का उपयोग केवल स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर डालता है।
साल 2017-18 में 35 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का कुल आर्थिक नुकसान लगभग 1,77,341 करोड़ रुपये के बराबर था। इसमें स्वास्थ्य खर्च, उत्पादकता में कमी और सामाजिक खर्चे भी शामिल हैं।
धूम्रपान निषेध दिवस का इतिहास
नो स्मोकिंग डे की शुरुआत 1984 में यूनाइटेड किंगडम में हुई थी। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान था जो लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद करने के लिए बनाया गया।
समय के साथ, यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हुई और अब स्वास्थ्य संगठनों और जागरूकता समूहों द्वारा कई देशों में समर्थन किया जाता है।
हर साल इस अवसर पर जागरूकता अभियान, स्कूल और कॉलेज कार्यक्रम, डिजिटल और सोशल मीडिया अभियान चलाए जाते हैं। साथ ही सामुदायिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं ताकि लोगों को तंबाकू के नुकसान के बारे में बताया जा सके और स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित किया जा सके।
धूम्रपान निषेध दिवस क्यों अहम है?
धूम्रपान कई गंभीर बीमारियों से जुड़ा है, जिसमें फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), साथ ही, सेकंड-हैंड स्मोक (धूम्रपान के धुएं का दूसरे लोगों पर प्रभाव) भी सांस और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाता है।
धूम्रपान निषेध दिवस याद दिलाता है कि एक दिन भी धूम्रपान न करना एक स्वस्थ और तंबाकू मुक्त जीवन की शुरुआत हो सकती है।
धूम्रपान निषेध दिवस हर व्यक्ति को स्वस्थ जीवन अपनाने, तंबाकू छोड़ने और अपने परिवार की सुरक्षा करने का अवसर देता है। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो आज से ही एक दिन धूम्रपान मुक्त शुरू करें। यह पहला कदम आपके स्वस्थ और खुशहाल भविष्य की ओर एक मजबूत शुरुआत है।