अटलांटिक क्रूज जहाज पर संदिग्ध हंटावायरस प्रकोप से तीन लोगों की मौत, कई यात्री बीमार, स्वास्थ्य एजेंसियां जांच में जुटी हैं
हंटावायरस चूहों से फैलने वाला दुर्लभ लेकिन गंभीर संक्रमण, इंसानों में सीधे फैलाव के आसार बहुत कम माने जाते हैं
शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे, लेकिन बाद में सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों में समस्या जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है
इस वायरस का कोई विशेष इलाज नहीं, समय पर अस्पताल में भर्ती और सहायक उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती
बचाव के लिए साफ-सफाई जरूरी, चूहों से दूरी बनाए रखें और गंदगी साफ करते समय सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अटलांटिक महासागर पार कर रहे एक क्रूज जहाज पर संदिग्ध हंटावायरस संक्रमण के कारण कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है। कई अन्य यात्री बीमार हैं और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारी तेजी से जांच में जुटे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमण कैसे फैला और इसे आगे फैलने से कैसे रोका जाए। यह घटना लोगों के बीच चिंता का कारण बन गई है।
क्या है हंटावायरस?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, हंटावायरस एक प्रकार का वायरस समूह है, जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य छोटे कुतरने वाले जानवरों में पाया जाता है। ये जानवर खुद बीमार नहीं होते, लेकिन उनके मूत्र, मल और लार के जरिए यह वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है। जब यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो यह फेफड़ों या किडनी को प्रभावित कर सकता है।
इससे होने वाली बीमारी के दो प्रमुख रूप हैं। पहला है हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (एचपीएस), जो फेफड़ों पर असर डालता है और काफी गंभीर होता है। दूसरा है हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (एचएफआरएस ), जो किडनी को प्रभावित करता है। एचपीएस खासतौर पर खतरनाक माना जाता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।
यह बीमारी कहां से आई?
हंटावायरस कोई नई बीमारी नहीं है। इसे पहली बार कई दशक पहले एशिया में पहचाना गया था। इसके अलग-अलग प्रकार दुनिया के कई हिस्सों में पाए जाते हैं। चूंकि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के चूहे होते हैं, इसलिए यह वायरस लगभग हर जगह मौजूद हो सकता है, चाहे वह गांव हो, जंगल हो या शहर।
कैसे फैलता है हंटावायरस?
यह वायरस आमतौर पर इंसान से इंसान में नहीं फैलता, जो एक राहत की बात है। ज्यादातर लोग तब संक्रमित होते हैं जब वे ऐसे धूलकणों को सांस के जरिए अंदर लेते हैं, जिनमें चूहों के मल या मूत्र के अंश होते हैं। इसके अलावा संक्रमित सतह को छूने और फिर चेहरे को छूने से भी संक्रमण हो सकता है।
कुछ मामलों में संक्रमित भोजन खाने या चूहे के काटने से भी यह फैल सकता है। हालांकि, इंसान से इंसान में इसका फैलना बेहद दुर्लभ है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्रूज जहाज पर यह संक्रमण किसी पर्यावरणीय कारण से फैला होगा, जैसे किसी कमरे या सामान का दूषित होना।
लक्षण कैसे पहचानें?
हंटावायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं। मरीज को बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और ठंड लगना जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों को उल्टी या पेट की समस्या भी हो सकती है।
लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, स्थिति गंभीर हो सकती है। मरीज को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और फेफड़ों में पानी भरने जैसी समस्या हो सकती है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और तुरंत अस्पताल में भर्ती की जरूरत होती है।
इलाज क्या है?
हंटावायरस का कोई विशेष इलाज या दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज को केवल सहायक उपचार देते हैं। इसमें ऑक्सीजन देना, वेंटिलेटर की मदद से सांस दिलाना और अन्य जरूरी चिकित्सा सहायता शामिल होती है। गंभीर मामलों में मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है। समय पर इलाज मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।
कैसे करें बचाव?
इस बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है चूहों और उनके संपर्क से दूर रहना। घर में साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है। दीवारों और दरवाजों में बने छेद बंद कर देने चाहिए ताकि चूहे अंदर न आ सकें।
अगर कहीं चूहों के मल या गंदगी दिखे तो उसे साफ करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। सीधे झाड़ू लगाने या सूखी सफाई करने से बचें, क्योंकि इससे वायरस हवा में फैल सकता है। पहले उस जगह पर कीटाणुनाशक छिड़कें और फिर दस्ताने पहनकर साफ करें।
क्रूज जहाज पर हुई यह घटना चिंताजनक जरूर है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। हंटावायरस एक दुर्लभ बीमारी है और यह आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती। सावधानी और जागरूकता से इस बीमारी से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सफाई और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।