भारत में 2023 में लगभग 24,700 माएं गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण मरीं, कुछ राज्यों में अभी भी भारी खतरा बना हुआ है। प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

भारत में मातृ मृत्यु दर में हुआ सुधार, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार: अध्ययन

अध्ययन के अनुसार, साल 2023 में दुनियाभर में लगभग 2.4 लाख महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित कारणों से हुई।

Dayanidhi

  • 1990 से 2023 तक दुनिया में मातृ मृत्यु दर में कमी आई, लेकिन हाल के वर्षों में सुधार धीमा पड़ गया।

  • भारत में 2023 में लगभग 24,700 माएं गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण मरीं, कुछ राज्यों में अभी भी भारी खतरा बना हुआ है।

  • अधिकतर मातृ मौतें गंभीर रक्तस्राव, प्रीक्लेम्पसिया, संक्रमण, असुरक्षित गर्भपात और प्रसव जटिलताओं जैसी रोकथाम योग्य समस्याओं से होती हैं।

  • 2020-21 में कोविड-19 ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया, जिससे मातृ देखभाल बाधित हुई और अस्थायी रूप से मातृ मृत्यु बढ़ी।

  • सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता देखभाल, समान स्वास्थ्य तक पहुंच और अधिक खतरे वाली गर्भस्थाओं पर ध्यान देना जरूरी।

'द लैंसेट' में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि दुनिया भर में माओं की मृत्यु दर पिछले तीन दशकों में काफी कम हुई है। लेकिन हाल के वर्षों में सुधार एक बार धीमा पड़ गया है। मातृ मृत्यु का मतलब है कि किसी महिला की गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के एक साल के भीतर किसी भी कारण से मृत्यु हो जाना, जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से गर्भावस्था से जुड़ा हो।

1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में मातृ मृत्यु दर के रुझानों का अध्ययन किया गया है। इसके अनुसार, 2023 में दुनियाभर में लगभग 2.4 लाख महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित कारणों से हुई। इसका मतलब है कि आज भी कई देशों में गर्भावस्था और प्रसव महिलाओं के लिए खतरनाक है, खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में।

वैश्विक मातृ मृत्यु दर

वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2023 में लगभग 190 मौतें प्रति एक लाख जन्मों के आसपास थी। यह 1990 में 320 से अधिक था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दशकों में काफी सुधार हुआ है। फिर भी, यह संख्या सुरक्षित स्तर से बहुत दूर है। संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि 2030 तक यह अनुपात 70 से कम हो, लेकिन दुनिया के आधे से अधिक देश अभी तक इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं।

भारत में मातृ मृत्यु

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां माताओं की संख्या सबसे अधिक है। 2023 में भारत में लगभग 24,700 महिलाओं की मृत्यु हुई, जो कुल वैश्विक मातृ मृत्यु का एक बड़ा हिस्सा है। भारत में लंबे समय के आंकड़े बताते हैं कि सुधार हुआ है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं।

1990 में भारत में मातृ मृत्यु लगभग 1.19 लाख थी और मातृ मृत्यु अनुपात 508 था। 2015 में यह घटकर 36,900 हो गया। 2023 में यह और कम होकर 24,700 तक पहुंच गया और मातृ मृत्यु अनुपात 116 हो गया। यह स्पष्ट करता है कि वर्षों में काफी सुधार हुआ है, लेकिन काम अभी अधूरा है।

भारत में राज्यों के बीच भी काफी असमानता है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य लगभग वैश्विक लक्ष्यों के करीब हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्य अभी भी उच्च मातृ मृत्यु दर दर्ज की जा रही है।

मातृ मृत्यु के पीछे के प्रमुख कारण

अधिकांश मातृ मौतें पूरी तरह से रोकने योग्य होती हैं। इनकी मुख्य वजहें हैं प्रसव के बाद गंभीर रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप संबंधी समस्याएं जैसे प्रीक्लेम्पसिया, संक्रमण, असुरक्षित गर्भपात और प्रसव के दौरान जटिलताएं। इसके अलावा, पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी समस्याएं भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।

भारत में मृत्यु के पीछे अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं तक देर से पहुंच, सेवाओं की गुणवत्ता में कमी और क्षेत्रीय असमानताएं मुख्य कारण हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का असमान वितरण और आपातकालीन देखभाल में देरी से महिलाएं गंभीर जोखिम में आ जाती हैं।

कोविड-19 का प्रभाव

अध्ययन में यह भी पाया गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 और 2021 में मातृ मृत्यु अस्थायी रूप से बढ़ी। स्वास्थ्य प्रणालियां महामारी के दौरान अधिक दबाव में थीं और नियमित मातृ देखभाल बाधित हुई। कुछ देशों में गर्भवती महिलाएं कोविड-19 संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील भी थीं। अनुमान के अनुसार, इस महामारी के कारण दुनिया भर में हजारों से लेकर लाखों अतिरिक्त मातृ मौतें हुई होंगी।

सुधार के उपाय और आवश्यकता

मातृ मृत्यु दर में पिछले तीन दशकों में कमी का मुख्य कारण बेहतर जागरूकता, अस्पताल में प्रसव, स्वास्थ्य योजनाएं और सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप रहे हैं। 2000 से 2015 के बीच यह कमी सबसे तेज रही।

लेकिन हाल के वर्षों में सुधार धीमा पड़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है। विशेष रूप से भारी खतरे वाली गर्भवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में गुणवत्ता देखभाल बढ़ाना बेहद जरूरी है।

मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार के लिए यह आवश्यक है कि सभी महिलाएं समय पर और उचित स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करें। यह न केवल जीवन रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह समाज और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि सही कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक सुरक्षित मातृत्व का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

दुनिया भर में मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी कई देशों में खतरनाक स्तर पर है। भारत में हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु में कमी आई है, लेकिन राज्यों के बीच अंतर और कुछ रोकथाम योग्य कारण अभी भी चुनौती बने हुए हैं। कोविड-19 महामारी ने स्थिति को अस्थायी रूप से और बिगाड़ा।

माताओं की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना, उच्च गुणवत्ता की देखभाल सुनिश्चित करना और सभी महिलाओं तक सेवाओं की समान पहुंच होना आवश्यक है। सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच ही नहीं, बल्कि जीवन के लिए एक मूलभूत अधिकार भी है।