कांगो में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 710 पहुंची, जबकि संक्रमण से अब तक 149 लोगों की मौत हुई।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 324 मरीज अस्पतालों और आइसोलेशन केंद्रों में भर्ती हैं, जबकि 35 संक्रमित पूरी तरह स्वस्थ हुए।
सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज करते हुए ऐसी किसी योजना से इनकार किया।
इस बार का प्रकोप दुर्लभ बंडिबुग्यो वायरस स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसके लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी कि बढ़ते मामलों और फैलाव के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है।
अफ्रीकी देश लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 13 जून, 2026 को बताया कि इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 710 हो गई है। इनमें 149 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और इसे नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बीमारी से मृत्यु दर लगभग 21 प्रतिशत दर्ज की गई है। वर्तमान में 324 मरीज अस्पतालों या आइसोलेशन केंद्रों में उपचाराधीन हैं। वहीं, 35 मरीज बीमारी से ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
लॉकडाउन की अफवाहों का खंडन
सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैल रही थी कि इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का लॉकडाउन लागू नहीं किया गया है और ऐसी कोई योजना भी नहीं है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही आधी-अधूरी जानकारी पर विश्वास न करें। अधिकारियों ने कहा कि नागरिक केवल सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें।
संक्रमण रोकने के प्रयास जारी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि सरकार प्रांतीय प्रशासन, स्वास्थ्य साझेदारों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम कर रही है। संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय लागू किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि संक्रमित लोगों की पहचान, जांच, इलाज और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं।
दुर्लभ वायरस स्ट्रेन बना चुनौती
इस बार का इबोला प्रकोप बंडिबुग्यो नामक दुर्लभ वायरस स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
इसके विपरीत, इबोला के जायर स्ट्रेन के लिए कुछ प्रभावी टीके और उपचार विकसित किए जा चुके हैं। कांगो में पहले हुए अधिकांश इबोला प्रकोप इसी जायर स्ट्रेन से जुड़े रहे हैं।
जांच बढ़ने से सामने आए अधिक मामले
अधिकारियों ने बताया कि मामलों में अचानक हुई वृद्धि का एक कारण जांच क्षमता का विस्तार भी है। हाल के दिनों में प्रयोगशालाओं की संख्या और परीक्षण सुविधाओं को बढ़ाया गया है। इसके कारण पहले से एकत्र किए गए नमूनों की जांच तेजी से हो रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 137 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 35 नमूने पॉजिटिव पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि संक्रमण अभी भी फैल रहा है और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।
डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से बदल रहा है। नए क्षेत्रों में संक्रमण फैलने और मामलों की संख्या बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है।
संगठन ने यह भी कहा कि वर्तमान में दर्ज 21 प्रतिशत मृत्यु दर वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाती है। कई मौतों की जांच अभी जारी है, जो बीमारी के आधिकारिक रूप से घोषित होने से पहले हुई थीं। जांच पूरी होने के बाद मृत्यु दर और अधिक हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, इलाज और जागरूकता के माध्यम से ही इस खतरनाक बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। फिलहाल कांगो की सरकार और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां मिलकर इस चुनौती का सामना करने में जुटी हुई हैं।