नए संक्रमण घटे, लेकिन दुनिया भर में हर दिन 4900 लोग हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित हो रहे हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

दुनिया में हेपेटाइटिस पर लगाम के बावजूद हर साल 18 लाख संक्रमित,13 लाख से ज्यादा मौतें: डब्ल्यूएचओ

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 के बाद से स्थिति में कुछ सुधार आया, हेपेटाइटिस बी के नए मामलों में 32 प्रतिशत की कमी, जबकि हेपेटाइटिस सी से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

Dayanidhi

  • डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट: हेपेटाइटिस से 2024 में 13.4 लाख मौतें, दुनिया में अब भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।

  • नए संक्रमण घटे, लेकिन दुनिया भर में हर दिन 4900 लोग हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित हो रहे हैं।

  • 2015 के बाद सुधार: हेपेटाइटिस बी में 32% कमी, हेपेटाइटिस सी मौतों में 12% गिरावट दर्ज की गई है।

  • इलाज की बड़ी कमी: हेपेटाइटिस बी के मरीजों को 5% से कम और सी मरीजों को 20% ही इलाज मिल पा रहा है।

  • भारत, चीन, पाकिस्तान सहित कई देशों पर हेपेटाइटिस के बहुत ज्यादा मामले हैं, वैश्विक मामलों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों में है।

28 अप्रैल, 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी एक नई वैश्विक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में संक्रामक हेपेटाइटिस से निपटने के प्रयासों में प्रगति हुई है, लेकिन यह बीमारी अभी भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनी हुई है। यह रिपोर्ट विश्व हेपेटाइटिस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत की गई, जिसमें कई देशों के विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया।

हेपेटाइटिस से मौतें अब भी चिंता का विषय

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में हेपेटाइटिस बी और सी के कारण लगभग 13.4 लाख लोगों की मौत हुई। ये दोनों प्रकार के संक्रमण दुनिया में हेपेटाइटिस से होने वाली कुल मौतों के लगभग 95 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही, हर दिन करीब 4900 नए संक्रमण सामने आ रहे हैं, यानी साल भर में लगभग 18 लाख लोग इस बीमारी से संक्रमित हो रहे हैं।

2015 के बाद से सुधार के संकेत

डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2015 के बाद से स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है। हेपेटाइटिस बी के नए मामलों में 32 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि हेपेटाइटिस सी से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में हेपेटाइटिस बी का प्रसार घटकर 0.6 प्रतिशत रह गया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

यह प्रगति वर्ष 2016 में विश्व स्वास्थ्य सभा में तय किए गए वैश्विक लक्ष्यों के बाद संभव हो पाई है, जहां सदस्य देशों ने हेपेटाइटिस को समाप्त करने का संकल्प लिया था।

लक्ष्य तक पहुंचने में अभी भी धीमी रफ्तार

हालांकि सुधार हुआ है, लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वर्तमान गति 2030 तक हेपेटाइटिस को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस के हवाले से कहा गया है कि कई लोग अब भी जांच और इलाज से वंचित हैं। इसका कारण सामाजिक कलंक, कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं और इलाज तक असमान पहुंच है।

करोड़ों लोग अब भी संक्रमित

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में लगभग 28.7 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी या सी के साथ जीवन बिता रहे थे। इनमें से अधिकांश लोगों को अपनी बीमारी के बारे में जानकारी ही नहीं है। यही कारण है कि समय पर इलाज नहीं हो पाता और बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

इलाज की पहुंच बेहद सीमित

हेपेटाइटिस बी से पीड़ित करीब 24 करोड़ लोगों में से पांच प्रतिशत से भी कम लोग इलाज हासिल कर रहे हैं। वहीं, हेपेटाइटिस सी के मरीजों में भी स्थिति बेहतर नहीं है। वर्ष 2015 से अब तक केवल 20 प्रतिशत मरीजों का इलाज हो पाया है, जबकि इसके लिए आठ से 12 सप्ताह की दवा से 95 प्रतिशत तक ठीक होने की संभावना होती है।

कुछ देशों में ज्यादा मामले

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों पर हेपेटाइटिस सी के मामले सबसे अधिक है। ये तीनों देश मिलकर दुनिया के लगभग 39 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा अफ्रीकी देशों में हेपेटाइटिस बी के नए मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है, लेकिन वहां टीकाकरण की दर बहुत कम है

संक्रमण के प्रमुख कारण

हेपेटाइटिस के फैलने के कई कारण हैं, जिनमें असुरक्षित इंजेक्शन का उपयोग, संक्रमित खून, और नशीले पदार्थों का सेवन शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस सी के 44 प्रतिशत नए मामले उन लोगों में पाए गए जो इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थ लेते हैं।

समाधान मौजूद, जरूरत है तेजी की

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि हेपेटाइटिस से निपटने के लिए प्रभावी उपाय पहले से मौजूद हैं। हेपेटाइटिस बी का टीका 95 प्रतिशत से अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, हेपेटाइटिस बी के लिए लंबे समय तक चलने वाला इलाज और हेपेटाइटिस सी के लिए कम समय में पूरी तरह ठीक करने वाली दवाएं उपलब्ध हैं।

मिस्र, रवांडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों ने यह साबित किया है कि सही रणनीति और निवेश से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

आगे की राह

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए जांच और इलाज की सुविधाओं को बढ़ाना होगा। खासकर नवजात शिशुओं के लिए हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण बढ़ाना जरूरी है। इसके साथ ही, गर्भवती महिलाओं की जांच और सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं को भी बढ़ावा देना होगा।

कुल मिलाकर, हेपेटाइटिस के खिलाफ लड़ाई में दुनिया ने कुछ महत्वपूर्ण कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन मंजिल अभी दूर है। यदि सरकारें और स्वास्थ्य संगठन मिलकर तेजी से काम करें, तो आने वाले वर्षों में इस गंभीर बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।