रोजाना एक से ज्यादा बार मीठे पेय पीने वालों में पेट के कैंसर की घटनाएं अधिक पाई गईं, लेकिन सीधा कारण साबित नहीं हुआ। प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

मीठे पेय पीने से बढ़ सकता है पेट के कैंसर का खतरा, नई रिसर्च में सामने आया संबंध

रोजाना ज्यादा मीठे पेय पीने वालों में पेट के कैंसर के मामले ज्यादा, डाइट ड्रिंक्स वाले पेय से ऐसा संबंध नहीं मिला, नई रिसर्च का दावा

Dayanidhi

  • रोजाना एक से ज्यादा बार मीठे पेय पीने वालों में पेट के कैंसर की घटनाएं अधिक पाई गईं, लेकिन सीधा कारण साबित नहीं हुआ।

  • कम मात्रा में मीठे पेय पीने वालों में पेट के कैंसर का खतरा प्रतिभागियों के समूह से ज्यादा स्पष्ट नहीं दिखा।

  • कृत्रिम मिठास वाले कम कैलोरी पेय और पेट के कैंसर के बीच अध्ययन में कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला।

  • अध्ययन में मीठे पेय और पेट के कैंसर के संबंध को समझने के लिए एच. पाइलोरी संक्रमण की भी जांच की गई।

  • शोधकर्ताओं ने कहा कि इन नतीजों की पुष्टि के लिए बड़े और अलग-अलग आबादी वाले अध्ययनों की जरूरत जताई है।

एक नई रिसर्च में रोजाना ज्यादा मात्रा में शुगर-स्वीटेंड बेवरेज यानी चीनी वाले पेय पीने और पेट के कैंसर के खतरे के बीच संबंध पाया गया है। इनमें नियमित सोडा, एनर्जी ड्रिंक, लेमोनेड, पंच और ऐसे स्पोर्ट्स ड्रिंक शामिल हैं, जिनमें अतिरिक्त चीनी होती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह नहीं कहा है कि मीठे पेय सीधे तौर पर पेट के कैंसर का कारण बनते हैं।

यह अध्ययन मेडिकल जर्नल गैस्ट्रो हेप एडवांसेज में प्रकाशित एक शोध में किया गया। शोध में अमेरिका के दो बड़े स्वास्थ्य अध्ययन समूहों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।

3.2 करोड़ से ज्यादा व्यक्ति-वर्ष के आंकड़े

शोधकर्ताओं ने नर्सेज हेल्थ स्टडी और हेल्थ प्रोफेशनल्स फ़ॉलो-अप स्टडी के आंकड़ों का विश्लेषण किया। पहले अध्ययन में महिला नर्सें और दूसरे में पुरुष स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। दोनों समूहों में कुल मिलाकर 1.12 लाख से ज्यादा लोगों को अंतिम विश्लेषण में शामिल किया गया।

प्रतिभागियों से उनकी खाने-पीने की आदतों के बारे में नियमित अंतराल पर जानकारी ली गई। खास तौर पर हर चार साल में भोजन और पेय पदार्थों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। इसके अलावा धूम्रपान, शराब का सेवन, शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां भी दर्ज की गईं।

लगभग 32 लाख व्यक्ति-वर्ष के फॉलो-अप के दौरान पेट के कैंसर के 278 मामले सामने आए। इनमें 140 मामले महिलाओं के समूह में और 138 मामले पुरुषों के समूह में थे।

रोजाना एक से ज्यादा बार लेने वालों में ज्यादा मामले

रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों ने रोजाना एक से ज्यादा बार शुगर-स्वीटेंड बेवरेज लिया, उनमें पेट के कैंसर की घटनाएं उन लोगों की तुलना में ज्यादा थीं, जो महीने में एक बार से भी कम ऐसे पेय लेते थे।

एक बार में लगभग आठ औंस यानी करीब 237 मिलीलीटर माना गया था। खास बात यह रही कि कैंसर का बढ़ा हुआ संबंध मुख्य रूप से सबसे ज्यादा सेवन करने वाले समूह में दिखाई दिया। कम मात्रा में मीठे पेय लेने वाले समूहों में आंकड़े तुलना वाले समूह से बहुत अलग नहीं थे।

महिलाओं और पुरुषों, दोनों के अध्ययन समूहों में सबसे ज्यादा एसएसबी सेवन करने वालों में पेट के कैंसर की घटनाएं अधिक देखी गईं।

आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले पेय से संबंध नहीं मिला

शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल स्वीटेंड बेवरेज यानी कृत्रिम मिठास वाले कम कैलोरी पेय पदार्थों की भी जांच की। इनमें लो-कैलोरी कार्बोनेटेड ड्रिंक शामिल थे।

इस मामले में पेट के कैंसर और पेय पदार्थों के सेवन के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला। जैसे-जैसे इन पेय पदार्थों का सेवन बढ़ा, कैंसर के मामलों में कोई लगातार बढ़ता हुआ पैटर्न दिखाई नहीं दिया। यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कृत्रिम मिठास, खासकर एस्पार्टेम, को लेकर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस अध्ययन में एएसबी सेवन और पेट के कैंसर के बीच स्पष्ट संबंध सामने नहीं आया।

एच. पाइलोरी पर भी हुई जांच

पेट के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में एच. पाइलोरी संक्रमण शामिल है। इसलिए शोधकर्ताओं ने यह भी देखने की कोशिश की कि कहीं मीठे पेय और कैंसर के बीच संबंध एच. पाइलोरी संक्रमण से तो नहीं जुड़ा है।

इसके लिए दोनों अध्ययन समूहों के एक छोटे उपसमूह में खून की जांच के जरिए एच. पाइलोरी संक्रमण के संकेत देखे गए। इस सीमित विश्लेषण में एसएसबी या एएसबी सेवन और एच. पाइलोरी संक्रमण के बीच कोई संबंध नहीं मिला। हालांकि, शोधकर्ताओं ने माना कि एच. पाइलोरी से जुड़ी जानकारी सीमित थी। इसलिए इस नतीजे को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फ्रुक्टोज सेवन भी जांच के दायरे में

अध्ययन में कुल फ्रुक्टोज यानी एक प्रकार की चीनी के सेवन और पेट के कैंसर के बीच भी संबंध देखा गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि ज्यादा फ्रुक्टोज सेवन पेट के कैंसर की अधिक घटनाओं से जुड़ा था। यह संबंध खास तौर पर महिलाओं के समूह में दिखाई दिया। हालांकि, फ्रुक्टोज से जुड़े विस्तृत आंकड़े अध्ययन की सप्लीमेंट्री टेबल में दिए गए हैं।

रिसर्च की कुछ सीमाएं

शोधकर्ताओं ने माना कि अध्ययन की कुछ सीमाएं हैं। उदाहरण के लिए, पेट के कैंसर के शरीर में किस हिस्से में होने की जानकारी सभी प्रतिभागियों के लिए उपलब्ध नहीं थी। परिवार में पेट के कैंसर का इतिहास और पहले कराई गई ऊपरी पाचन तंत्र की एंडोस्कोपी की जानकारी भी सीमित थी।

इसके अलावा दोनों अध्ययन समूहों में ज्यादातर प्रतिभागी श्वेत अमेरिकी थे। इसलिए इन नतीजों को अलग-अलग नस्लीय या जातीय समूहों और कम उम्र के लोगों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

कारण अभी पूरी तरह साफ नहीं

शोधकर्ताओं ने कई कारणों का उल्लेख किया है। ज्यादा मीठे पेय वजन बढ़ने, इंसुलिन प्रतिरोध, शरीर में सूजन, हार्मोनल बदलाव, डीएनए को नुकसान और आंतों के बैक्टीरिया में बदलाव से जुड़े हो सकते हैं। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कौन-सा कारण पेट के कैंसर से संभावित संबंध के पीछे जिम्मेदार है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन परिणामों की पुष्टि के लिए आगे और अध्ययन की जरूरत है। फिलहाल यह रिसर्च केवल इतना बताती है कि रोजाना ज्यादा मात्रा में शुगर-स्वीटेंड बेवरेज पीना पेट के कैंसर की अधिक घटनाओं से जुड़ा पाया गया, जबकि कृत्रिम मिठास वाले पेय के लिए ऐसा संबंध नहीं मिला। इसे कारण और प्रभाव का सीधा प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।