नए अध्ययन में खुलासा, भारत में कम फल और साबुत अनाज का सेवन टाइप-2 डायबिटीज बढ़ने का बड़ा कारण बन रहा है।
सिर्फ चीनी कम करना पर्याप्त नहीं, विशेषज्ञों ने संतुलित आहार में फल, फाइबर और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने पर दिया जोर।
एशिया में डायबिटीज के कारण अलग, भारत में रिफाइंड अनाज और पोषण की कमी बनी प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती।
डायबिटीज मरीजों में फल को लेकर गलतफहमी दूर करने की जरूरत, फलों के पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण।
भारत में लगभग 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि करीब 13.6 करोड़ लोगों को प्री-डायबिटीज है।
डायबिटीज या मधुमेह को लेकर आम धारणा रही है कि बीमारी का सबसे बड़ा कारण ज्यादा चीनी, मिठाई और फास्ट फूड का सेवन है। लेकिन एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने भारत के लिए एक अलग चिंता सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में टाइप-टू डायबिटीज बढ़ने के पीछे कम फल खाना और साबुत अनाज की कमी भी एक बड़ा कारण बन रही है।
डायबिटीज रिसर्च और क्लिनिकल न्यूट्रिशन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि डायबिटीज से बचाव के लिए केवल मीठी चीजों से दूरी बनाना काफी नहीं है। भोजन में फल, सब्जियां, फाइबर और पौष्टिक अनाज की पर्याप्त मात्रा शामिल करना भी जरूरी है।
एशिया में डायबिटीज का बढ़ता बोझ
एशिया के 34 देशों में किए गए इस अध्ययन में साल 2023 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि खान-पान से जुड़े कारणों की वजह से एशिया में टाइप-टू डायबिटीज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है।
अध्ययन के अनुसार, कम फल खाना एशिया में डायबिटीज से जुड़े सबसे बड़े आहार संबंधी कारणों में शामिल है। इसके कारण लाखों लोग बीमारी और उससे जुड़ी जटिलताओं का सामना कर रहे हैं।
भारत की स्थिति अलग
रिपोर्ट में बताया गया है कि एशिया के अलग-अलग देशों में डायबिटीज बढ़ने के कारण अलग-अलग हैं। चीन, जापान और मध्य एशिया के कई देशों में ज्यादा मात्रा में लाल मांस और प्रोसेस्ड मीट का सेवन बड़ा कारण बनकर सामने आया है।
लेकिन भारत और दक्षिण एशिया की स्थिति अलग है। यहां कम फल खाना, कम साबुत अनाज लेना और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन का अधिक सेवन डायबिटीज के खतरे को बढ़ा रहा है। भारत में सफेद चावल, मैदा और अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन का सेवन आम है। दूसरी ओर, फल, सब्जियां, दालें और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ कई लोगों की डाइट में कम जगह बना पाए हैं।
देश में करोड़ों लोग प्रभावित
भारत दुनिया में डायबिटीज मरीजों की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है। अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं।
भारतीय शोधों में भी यह बात सामने आई है कि देश के लोगों के भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा है। वहीं, प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अपेक्षाकृत कम है।
फल खाने से बचने की सोच बदलने की जरूरत
डायबिटीज के कई मरीज प्राकृतिक शुगर के डर से फल खाना कम कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सोच बदलने की जरूरत है।
फलों में मौजूद फाइबर, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। सही मात्रा में पूरे फल खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है। हालांकि डायबिटीज के मरीजों को अपनी स्थिति के अनुसार फल की मात्रा और समय के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
पॉलिश किए अनाज से बढ़ रही परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सफेद चावल और रिफाइंड अनाज का इस्तेमाल बढ़ा है। पॉलिशिंग के दौरान अनाज की बाहरी परत हट जाती है, जिससे फाइबर कम हो जाता है।
फाइबर की कमी से शरीर में शुगर का नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। इसलिए भोजन में साबुत गेहूं, मोटे अनाज, दालें और अन्य फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
खाने से क्या हटाएं ही नहीं, क्या जोड़ें भी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज की रोकथाम के लिए लोगों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सी चीजें नहीं खानी हैं। उन्हें यह भी समझाना होगा कि स्वस्थ रहने के लिए कौन-से खाद्य पदार्थ भोजन का हिस्सा बनने चाहिए।
भारत में मौसमी फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और पौष्टिक खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। संतुलित भोजन और बेहतर जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नई रिपोर्ट का संदेश साफ है कि भारत में डायबिटीज से लड़ाई केवल चीनी कम करने की नहीं, बल्कि पोषण की कमी को दूर करने की भी है।