हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाने वाला विश्व किडनी दिवस किडनी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अभियान है।
किडनी शरीर से विषैले पदार्थ निकालने, रक्तचाप नियंत्रित करने और शरीर में पानी व खनिजों का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दुनिया भर में लगभग 85 करोड़ लोग किडनी रोगों से प्रभावित हैं, जिनमें लंबे समय के वृक्क रोग, सबसे आम बीमारी मानी जाती है।
किडनी रोग के प्रमुख कारणों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, धूम्रपान और अस्वस्थ जीवनशैली शामिल हैं।
पर्याप्त पानी पीना, नमक कम खाना, नियमित व्यायाम करना और समय-समय पर जांच करवाना किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को किडनी, गुर्दा या वृक्क के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और किडनी से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के बारे में जानकारी देना है। इस साल यह दिवस 12 मार्च को मनाया जा रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि किडनी हमारे शरीर के लिए कितनी महत्वपूर्ण है और हमें इसकी देखभाल कैसे करनी चाहिए।
किडनी का हमारे शरीर में महत्व
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह दिन-रात बिना रुके काम करती है। किडनी का मुख्य काम खून को साफ करना और शरीर से बेकार पदार्थों को बाहर निकालना है। इसके अलावा किडनी शरीर में पानी और नमक का संतुलन बनाए रखने में भी मदद करती है। किडनी रक्तचाप को नियंत्रित करने और शरीर के लिए जरूरी हार्मोन बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए यदि किडनी ठीक से काम न करे तो शरीर के कई हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है।
इस साल की थीम
इस साल विश्व किडनी दिवस की थीम - “सभी के लिए किडनी का स्वास्थ्य: लोगों की देखभाल, धरती की सुरक्षा.” इसका अर्थ है कि सभी लोगों के लिए किडनी का स्वास्थ्य सुनिश्चित करना और पर्यावरण की भी रक्षा करना जरूरी है।
पर्यावरण में हो रहे बदलाव भी किडनी के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। बढ़ता तापमान, पानी की कमी, प्रदूषित पानी, वायु प्रदूषण और कठिन काम करने की परिस्थितियां किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। किसान, खदानों में काम करने वाले मजदूर, निर्माण श्रमिक, ट्रैफिक पुलिस, सड़क विक्रेता और सफाई कर्मचारी जैसे लोग इन खतरों से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
किडनी रोग एक बढ़ती हुई समस्या
आज दुनिया भर में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। दुनिया में लगभग 85 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की किडनी बीमारी से प्रभावित हैं। इनमें सबसे सामान्य बीमारी दीर्घकालिक वृक्क रोग (सीकेडी) है। यह बीमारी धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाती है और समय पर इलाज न मिलने पर किडनी फेल होने का खतरा भी हो सकता है।
किडनी रोग के कुछ प्रमुख कारण -
धुमेह
उच्च रक्तचाप
मोटापा
धूम्रपान
परिवार में किडनी रोग का इतिहास
इन कारणों की वजह से किडनी की बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है।
भारत में किडनी रोग की स्थिति
भारत में भी किडनी रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अध्ययनों के अनुसार, भारत में लगभग 11 से 17 प्रतिशत वयस्कों में किसी न किसी स्तर की किडनी बीमारी पाई जाती है।
मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मामलों में वृद्धि, बढ़ती उम्र की आबादी, संक्रमण और दवाओं या जहरीले पदार्थों के संपर्क जैसे कारण इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। इसके कारण किडनी रोग अब भारत में एक गंभीर गैर-संचारी बीमारी बनता जा रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका बोझ बढ़ रहा है।
समय पर जांच क्यों जरूरी है
किडनी की बीमारी अक्सर शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती। इसलिए कई बार लोगों को इसके बारे में देर से पता चलता है। अगर समय पर जांच करवाई जाए तो बीमारी को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है।
किडनी की जांच के लिए कुछ सरल टेस्ट किए जाते हैं जैसे -
रक्त परीक्षण
मूत्र परीक्षण
नियमित रूप से रक्तचाप की जांच
इन जांचों से किडनी की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है।
किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय
कुछ आसान आदतें अपनाकर हम अपनी किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना
रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना
नमक का सेवन कम करना
नियमित रूप से व्यायाम करना
बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग न करना
इन सरल उपायों से किडनी की बीमारी के खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
विश्व किडनी दिवस हमें यह संदेश देता है कि किडनी की सेहत के लिए जागरूक रहना बहुत जरूरी है। यदि हम स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, नियमित जांच कराएं और पर्यावरण की रक्षा करें, तो किडनी रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है।
किडनी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण फिल्टर हैं। इसलिए उनकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। स्वस्थ किडनी का मतलब है स्वस्थ जीवन।