सौर पैनलों के नीचे खेती से एक ही जमीन पर बिजली उत्पादन और खाद्य फसलों की पैदावार संभव हो सकती है।
पैनलों की छाया से टमाटर की पत्तियां ठंडी रहीं, जिससे तेज गर्मी में फसल पर दबाव काफी कम हुआ।
सौर पैनलों के नीचे फसलों में पानी की वाष्पीकरण से होने वाली हानि 22.4 प्रतिशत तक कम देखी गई।
फसलों की छाया से सौर पैनल 5.6 डिग्री सेल्सियस ठंडे रहे और गर्मी में उनकी दक्षता भी बेहतर हुई।
एग्रीवोल्टिक्स खेत मजदूरों को गर्मी से राहत दे सकता है और भविष्य में भोजन तथा स्वच्छ ऊर्जा दोनों जरूरतें पूरी कर सकता है।
दुनिया में बढ़ती आबादी के साथ भोजन और बिजली, दोनों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर, जलवायु परिवर्तन के कारण स्वच्छ ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। सौर ऊर्जा इस जरूरत को पूरा करने का एक अहम साधन बन रही है। लेकिन बड़े-बड़े सौर संयंत्रों के लिए काफी जमीन की जरूरत होती है। यही जमीन खेती के लिए भी जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक ही जमीन पर खेती और सौर ऊर्जा, दोनों का उत्पादन किया जा सकता है?
इस सवाल का एक जवाब एग्रीवोल्टिक्स है। इसमें सौर पैनलों के नीचे या उनके बीच फसलें उगाई जाती हैं। इससे एक ही जमीन का इस्तेमाल बिजली बनाने और भोजन पैदा करने के लिए किया जा सकता है। यह शोध जर्नल ऑफ एडवांसेज इन मॉडलिंग अर्थ सिस्टम्स में प्रकाशित किया गया है।
सौर पैनल फसलों को देते हैं छाया
एग्रीवोल्टिक्स पर पहले हुए कई अध्ययनों में पाया गया है कि सौर पैनलों की छाया कुछ फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है। तेज धूप में पौधों की पत्तियां बहुत गर्म हो जाती हैं और मिट्टी से पानी तेजी से सूखता है। पैनलों की छाया इन समस्याओं को कुछ हद तक कम कर सकती है।
हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ऐसा नया मॉडल तैयार किया है, जो सौर पैनलों और फसलों के बीच होने वाली कई तरह की प्रक्रियाओं को एक साथ समझने में मदद करता है। यह मॉडल केवल पौधों की वृद्धि नहीं देखता, बल्कि हवा, मिट्टी, पानी, तापमान और कार्बन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल जैसी चीजों को भी ध्यान में रखता है।
टमाटर की खेती पर किया गया परीक्षण
वैज्ञानिकों ने इस मॉडल का इस्तेमाल अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के प्रिंसटन क्षेत्र में टमाटर की एक काल्पनिक खेती को समझने के लिए किया। इसके लिए गर्म और उमस भरे दिन के मौसम के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि अमेरिका के घनी आबादी वाले मिड-अटलांटिक इलाके में भोजन और ऊर्जा, दोनों की जरूरत अधिक है।
अध्ययन के अनुसार, खुले खेत की तुलना में सौर पैनलों के नीचे उगाए गए टमाटरों की पत्तियां दिन में औसतन 1.84 डिग्री सेल्सियस ठंडी रहीं। दोपहर की सबसे तेज गर्मी के समय यह अंतर 7.56 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यानी सौर पैनलों की छाया ने पौधों को तेज गर्मी से काफी राहत दी।
कम पानी की जरूरत
पौधों के ठंडे रहने का एक और फायदा सामने आया। सौर पैनलों के नीचे टमाटरों से पानी के वाष्प के रूप में निकलने की प्रक्रिया, जिसे वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है, 22.4 प्रतिशत कम रही। इसका मतलब है कि गर्म मौसम में फसल को पानी की कमी से कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि पैनलों के नीचे उगने वाले पौधों को खुले खेत की तुलना में 47 प्रतिशत कम सूरज की रोशनी मिली। इसके बावजूद उनके कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण में केवल 31 प्रतिशत की कमी आई। वैज्ञानिकों का मानना है कि कम तापमान से पौधों पर गर्मी का दबाव घटा और इससे कम रोशनी के नुकसान की कुछ भरपाई हुई।
सौर पैनल भी रहे ठंडे
इस व्यवस्था का फायदा केवल फसलों को ही नहीं मिला। सौर पैनलों का तापमान भी कम रहा। फसलों के ऊपर लगे पैनल दिन में खुले और सूखी मिट्टी के ऊपर लगे पैनलों की तुलना में 5.6 डिग्री सेल्सियस ठंडे रहे।
सौर पैनल बहुत ज्यादा गर्म होने पर उनकी बिजली बनाने की क्षमता घट सकती है। अध्ययन के अनुसार, फसलों के ऊपर लगे ठंडे पैनल गर्मी के कारण होने वाली दक्षता की कमी का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा वापस हासिल कर सकते हैं। यानी खेती और सौर ऊर्जा का यह मेल बिजली उत्पादन के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
किसानों और मजदूरों के लिए राहत
एग्रीवोल्टिक्स का एक महत्वपूर्ण लाभ खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए भी हो सकता है। अध्ययन में पाया गया कि सौर पैनलों के नीचे काम करने के दौरान लोगों को महसूस होने वाला औसत तापमान 4.46 डिग्री सेल्सियस कम हुआ। गर्मी के दिनों में खेतों में लंबे समय तक काम करने वाले मजदूरों के लिए यह महत्वपूर्ण राहत हो सकती है।
भविष्य के लिए उपयोगी तकनीक
वैज्ञानिकों का कहना है कि नया मॉडल अलग-अलग फसलों, मौसम और सौर पैनलों की स्थितियों का अध्ययन करने में मदद कर सकता है। इससे यह तय करना आसान हो सकता है कि किस जगह पर कौन-सी फसल, कितनी छाया और किस तरह के सौर पैनलों के साथ बेहतर परिणाम दे सकती है।
एग्रीवोल्टिक्स अभी हर जगह खेती का विकल्प नहीं है, लेकिन यह साफ है कि सही तरीके से योजना बनाई जाए तो एक ही जमीन से भोजन, स्वच्छ बिजली और गर्मी से राहत, तीनों हासिल किए जा सकते हैं। बढ़ती ऊर्जा और खाद्य जरूरतों के बीच यह तकनीक भविष्य की खेती के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता बन सकती है।