प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
जलवायु

बढ़ते तापमान के साथ जालंधर-पटियाला जैसे भारतीय शहर तेजी से बन सकते हैं ‘हीट हॉटस्पॉट’

नया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जलवायु परिवर्तन के साथ भारत के कई शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों से डेढ़ से दो डिग्री सेल्सियस तक अधिक तक गर्म हो सकते हैं

Lalit Maurya

  • एक नए अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के चलते जालंधर और पटियाला जैसे भारतीय शहर 'हीट हॉटस्पॉट' बन सकते हैं।

  • अध्ययन में पाया गया कि शहरी क्षेत्रों में 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव के कारण तापमान तेजी से बढ़ेगा, जिससे शहरी आबादी पर गर्मी का खतरा बढ़ेगा।

  • अध्ययन से पता चला है, पंजाब के पटियाला शहर के तापमान में 1.5 से दो डिग्री सेल्सियस तक अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है, जो उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के मुकाबले करीब दोगुनी है। कुछ ऐसी ही स्थिति मिस्र के अस्यूट और चीन के शांगचिउ में भी रह सकती है।

  • अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता प्रोफेसर मनोज जोशी का इस बारे में कहना है उत्तरी भारत और उत्तर-पूर्वी चीन के कई शहरों में तापमान तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जबकि उनके आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह वृद्धि डेढ़ से दो डिग्री के बीच रह सकती है।

जलवायु संकट का असर अब केवल बढ़ते वैश्विक तापमान तक सीमित नहीं। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस के इजाफे के साथ भारत के कई शहर अनुमान से कहीं अधिक तेजी से तप सकते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया से जुड़े वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के मुताबिक, भारत जैसे मानसूनी क्षेत्रों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव जलवायु परिवर्तन के साथ और तेज हो सकता है, जिससे शहरी आबादी पर गर्मी का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) में प्रकाशित हुए हैं। अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों के शहरों को बाहर रखा है, ताकि पहाड़ों, झीलों और समुद्र जैसी भौगोलिक विशेषताओं के प्रभाव को हटाकर जलवायु से जुड़ी भौतिक प्रक्रियाओं पर आधारित संबंधों को सही तरीके से समझा जा सके।

गांवों की तुलना में शहरों में क्यों ज्यादा बढ़ेगी गर्मी?

वैज्ञानिकों के अनुसार शहर अक्सर पहले ही गांवों की तुलना में ज्यादा गर्म होते हैं। इसका मुख्य कारण है ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव, जिसमें कंक्रीट की इमारतें, घनी आबादी, कम हरियाली और बदलता स्थानीय मौसम शहरों में तापमान को बढ़ा देते हैं। नतीजन शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक गर्म हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन इस प्रभाव को और बढ़ा सकता है। खासतौर पर भारत जैसे देशों में, जहां गर्मी और आर्द्रता पहले से ही ऊंचे स्तर पर रहती है।

गौरतलब है कि अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दुनिया के 104 मध्यम आकार के शहरों (जिनकी आबादी तीन से 10 लाख) के लिए भविष्य के तापमान का अनुमान लगाया है। इनमें कई शहर भारत के मानसूनी क्षेत्र में आते हैं।

अध्ययन के मुताबिक 81 फीसदी शहरों में दिन के समय जमीनी तापमान ग्रामीण इलाकों से अधिक तेजी से बढ़ेगा। वहीं 16 फीसदी शहरों में तो अतिरिक्त गर्मी 50 से 100 फीसदी तक अधिक हो सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि दो डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचेगी, तब यह अतिरिक्त शहरी गर्मी गंभीर संकट बन जाएगी। आशंका है कि सदी के दूसरे हिस्से में बढ़ता तापमान दो डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकता है।

जालंधर-पटियाला जैसे शहरों के तापमान में हो सकती है अतिरिक्त वृद्धि

अध्ययन में भारत के कुछ शहरों को विशेष रूप से उच्च जोखिम वाला बताया गया है। अध्ययन किए गए सबसे अधिक आबादी वाले पांच बड़े शहरों में तापमान में सबसे बड़े बदलाव भारत के जालंधर, फुयांग (चीन) और इराक के किरकुक शहर में देखे गए। इन शहरों का तापमान अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 0.7 से 0.8 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है।

वहीं मोरक्को के मराकेश और ब्राजील के कैम्पो ग्रांडे में शहरों और आसपास के क्षेत्रों के बीच गर्मी में नाममात्र का अंतर दर्ज किया गया।

हालांकि, कुछ शहरों में स्थिति और भी गंभीर है। उदाहरण के लिए पंजाब के पटियाला शहर के तापमान में 1.5 से दो डिग्री सेल्सियस तक अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है, जो उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के मुकाबले करीब दोगुनी है। कुछ ऐसी ही स्थिति मिस्र के अस्यूट और चीन के शांगचिउ में भी रह सकती है।

भारत- चीन में बढ़ता शहरी हीट स्ट्रेस

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के क्लाइमेटिक रिसर्च यूनिट में प्रोफेसर और अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता मनोज जोशी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि "मौजूदा अत्याधुनिक जलवायु मॉडल शहरों में गर्मी के वास्तविक खतरे को कम आंक रहे हैं। उष्ण और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के कई शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हो सकते हैं, जिससे बढ़ते तापमान के प्रति उनकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।"

उन्होंने बताया कि उत्तरी भारत और उत्तर-पूर्वी चीन के कई शहरों में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जबकि अर्थ सिस्टम मॉडल के मुताबिक उनके आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह वृद्धि डेढ़ से दो डिग्री के बीच रह सकती है।

 उनके अनुसार, “शहरी हीट स्ट्रेस जलवायु परिवर्तन के साथ तेजी से बढ़ती चिंता है, क्योंकि शहर पहले से ही ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हैं।“

स्वास्थ्य पर गंभीर असर की आशंका

गौरतलब है कि भारत में हर साल भीषण गर्मी हजारों लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी तापमान में अतिरिक्त वृद्धि से जहां हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ेंगे, वहीं हृदय और सांस से जुड़ी बीमारियां गंभीर रूप ले लेंगी।

इतना ही नहीं भीषण गर्मी के कारण मृत्यु दर भी बढ़ सकती है। इसकी वजह से विशेष रूप से कमजोर तबके से जुड़े लोगों के साथ, बुजुर्ग और खुले में काम करने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में होंगे।

शहरी योजना में बदलाव जरूरी

ऐसे में यदि बढ़ते तापमान के विनाशकारी प्रभावों से बचना है तो शहरों को भविष्य में बढ़ती गर्मी के लिए अभी से तैयार करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए शहरी हरियाली को बढ़ाना, कंक्रीट के अनियंत्रित फैलाव पर रोक लगाना, ठंडी छतों और जल-संरक्षण जैसे उपाय अपनाना तथा प्रभावी हीट एक्शन प्लान लागू करना बेहद जरूरी है।

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि पारंपरिक जलवायु मॉडलों के साथ-साथ एआई और मशीन लर्निंग आधारित आकलनों को भी नीति निर्माण में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि शहरों को गर्मी के बढ़ते खतरे से बेहतर तरीके से सुरक्षित किया जा सके।

गौरतलब है कि सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी रिपोर्ट “स्वैल्ट्रिंग नाइट्स: डीकोडिंग अर्बन हीट स्ट्रेस इन दिल्ली” में भी खुलासा किया था कि दिल्ली में जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम तेजी से बदल रहा है। इसकी वजह से तापमान की तुलना में वातावरण में मौजूद नमी में तेजी से इजाफा हो रहा है।

दिल्ली में खत्म होती गर्मियों पर किए इस हालिया अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन ने शहर को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्म और नम बना दिया है, जिससे सर्दियों की शुरूआत के बावजूद रातों में पारा नीचे नहीं जा रहा। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें इन बदलावों की वजह से पहले से कहीं ज्यादा एसी-कूलर की जरूरत पड़ रही है। जो लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। 

रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि राजधानी में तापमान की तुलना में नमी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन साथ ही हाई हीट इंडेक्स वाले दिनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। विशेष रूप से मानसून के सीजन में ऐसा देखने को मिला है जब वातावरण में मौजूद अतिरिक्त नमी शहर के तापमान को पांच से सात डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा देती है।

यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन के साथ भारत, चीन, अफ्रीका के कई शहर आने वाले दशकों में 'हीट हॉटस्पॉट' बन सकते हैं। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि गर्मी बढ़ेगी या नहीं, बल्कि यह है कि भारत और दुनिया के दूसरे उष्णकटिबंधीय शहर इसके लिए कितने तैयार हैं।