जलवायु परिवर्तन से दुनिया के स्की रिसॉर्ट पर संकट, घटती बर्फबारी और बढ़ता तापमान बना बड़ी चुनौती।
यूरोप के 53 प्रतिशत स्की रिसॉर्ट पर भविष्य में बर्फ की भारी कमी का खतरा मंडरा रहा है।
स्विस आल्प्स में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, 2021 के बाद बर्फ की मात्रा 20 प्रतिशत घटी।
कृत्रिम बर्फ बनाना भी महंगा और मुश्किल, पानी की कमी तथा बढ़ती बिजली लागत बढ़ा रही परेशानी।
डब्ल्यूएमओ और एफआईएस ने मौसम आधारित योजना, वैज्ञानिक पूर्वानुमान और दीर्घकालिक निवेश को जरूरी बताया।
बर्फ से ढके पहाड़, सफेद ढलानें और उन पर फिसलते स्कीयर, सर्दियों में यह नजारा दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन की बढ़ती मार ने इस खूबसूरत तस्वीर पर संकट के बादल ला दिए हैं। कहीं बर्फबारी कम हो रही है, कहीं ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और कहीं तापमान इतना बढ़ रहा है कि स्की रिसॉर्ट के लिए बर्फ बचाए रखना ही बड़ी चुनौती बन गया है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अगले दिन कौन-सी लिफ्ट खुलेगी, बल्कि यह भी है कि आने वाले दशकों में ये रिसॉर्ट अपना कारोबार चला भी पाएंगे या नहीं।
इसी चुनौती को समझने और उससे निपटने की तैयारी के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और अंतरराष्ट्रीय स्की एवं स्नोबोर्ड महासंघ (एफआईएस) ने मिलकर 'वेदर एंड क्लाइमेट सर्विसेज फॉर स्की रिसॉर्ट्स' नाम से एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। इसका मकसद स्की रिसॉर्ट संचालकों, पर्वतीय पर्यटन प्रबंधकों और खेल आयोजकों को मौसम और जलवायु से जुड़ी सही जानकारी देकर बेहतर फैसले लेने में मदद करना है।
बदलती जलवायु, घटती बर्फ
रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2025 तक के साल दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहे हैं। वर्ष 2026 की गर्मियों में पश्चिमी यूरोप और अमेरिका के बड़े हिस्से ने रिकॉर्ड गर्मी का सामना किया। गर्मी और सूखे के इस दोहरे असर ने आल्प्स के ग्लेशियरों और बर्फ की परत को भारी नुकसान पहुंचाया।
जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) के अनुसार, दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों में बर्फ से ढके रहने की अवधि घट रही है। औसतन हर दशक में यह अवधि पांच दिन कम हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर कम ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों पर पड़ रहा है, जहां प्राकृतिक बर्फबारी पहले ही सीमित होती है।
यूरोप के 28 देशों के 2,234 स्की रिसॉर्ट पर हुए एक शोध ने चिंता और बढ़ा दी है। नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले के स्तर से दो डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंचता है, तो कृत्रिम बर्फ बनाने की व्यवस्था के बिना 53 प्रतिशत यूरोपीय स्की रिसॉर्ट को बर्फ की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।
स्विस आल्प्स में दिखने लगा संकट
जलवायु परिवर्तन का असर स्विट्जरलैंड के आल्प्स में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2026 में कम बर्फबारी और मई से सितंबर तक चली लंबी तथा तीव्र गर्मी की लहरों ने ग्लेशियरों को बुरी तरह प्रभावित किया। ग्लेशियर मॉनिटरिंग स्विट्जरलैंड (ग्लैमॉस) के अनुसार, इस साल ग्लेशियरों का द्रव्यमान नुकसान 2022 के बाद दूसरा सबसे खराब स्तर रहा।
2022 से 2026 के बीच ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार पिछले किसी भी दर्ज पांच साल के दौर से दोगुने से अधिक रही। साल 2021 के बाद से बर्फ की कुल मात्रा में करीब 20 प्रतिशत की कमी आ चुकी है।
स्विट्जरलैंड में 800 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 1970 के बाद से बर्फबारी वाले दिनों की संख्या आधी रह गई है। सर्दियों में शून्य डिग्री तापमान की सीमा भी पिछले 50 वर्षों में करीब 600 मीटर से बढ़कर 850 मीटर तक पहुंच गई है। यानी अब वह ऊंचाई भी बढ़ रही है, जहां प्राकृतिक रूप से बर्फ टिक सकती है।
नकली बर्फ भी नहीं आसान विकल्प
बर्फ की कमी से निपटने के लिए कई स्की रिसॉर्ट कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों पर निर्भर हो गए हैं। लेकिन यह उपाय भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए अनुकूल तापमान और पर्याप्त नमी जरूरी है। तापमान बढ़ने के साथ ये परिस्थितियां कम होती जा रही हैं।
इसके अलावा पानी की उपलब्धता, बिजली की बढ़ती कीमत और ऊर्जा की खपत भी बड़ी समस्याएं हैं। गर्मियों में कम बारिश और ग्लेशियरों से घटते पानी के कारण कई इलाकों में स्नोमेकिंग के लिए जरूरी पानी जुटाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बर्फ बनाने का खर्च भी लगातार बढ़ सकता है।
अब मौसम का पूर्वानुमान ही सबसे बड़ा सहारा
डब्ल्यूएमओ और एफआईएस की रिपोर्ट स्की रिसॉर्ट के लिए तीन स्तरों पर योजना बनाने की जरूरत बताती है। रोजमर्रा के संचालन में मौसम का तत्काल पूर्वानुमान, बर्फबारी की जानकारी और हिमस्खलन की चेतावनी लिफ्ट संचालन, सुरक्षा और पर्यटकों की आवाजाही के लिए जरूरी होगी।
मौसम के मौसमी पूर्वानुमान से रिसॉर्ट अपने खुलने-बंद होने की तारीख, कर्मचारियों की नियुक्ति, बजट, पानी और बिजली की जरूरत तथा खेल आयोजनों का कार्यक्रम तय कर सकेंगे। वहीं, लंबी अवधि के जलवायु अनुमान भविष्य के निवेश, बुनियादी ढांचे, कृत्रिम बर्फ बनाने की क्षमता और पर्यटन के नए विकल्पों पर फैसले लेने में मदद करेंगे।
पहाड़ों के भविष्य का सवाल
यह संकट केवल स्की रिसॉर्ट या खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है। पहाड़ी इलाकों की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय समुदायों का भविष्य भी इससे जुड़ा है। एफआईएस के आंतरिक आकलन के मुताबिक, 2025-26 के स्की सीजन में खराब मौसम के कारण विश्व कप की 25 रेस रद्द करनी पड़ी थीं।
साफ है कि अब पहाड़ों पर पर्यटन का भविष्य केवल अच्छी बर्फबारी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। मौसम की सटीक जानकारी, वैज्ञानिक योजना और समय रहते निवेश ही इस कारोबार को बचाने का रास्ता बन सकते हैं। वरना आने वाले वर्षों में बर्फीले पहाड़ तो रहेंगे, लेकिन उन पर स्कीइंग का रोमांच और उससे जुड़ी पूरी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे इतिहास बन सकती है।