नई रिसर्च में खुलासा, खदानें बंद होने के बाद भी सदियों तक एसिड माइन ड्रेनेज से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन जारी रह सकता है। फोटो साभार: यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्र्यूज
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खदानें बंद होने के बाद भी छोड़ती हैं कार्बन का निशान, नई रिसर्च में बड़ा खुलासा

खनन का छिपा कार्बन संकट: बंद खदानों से सदियों तक निकलती रह सकती है सीओ2, नई रिसर्च ने धातु उद्योग के पर्यावरणीय प्रभाव पर उठाए सवाल

Dayanidhi

  • नई रिसर्च में खुलासा, खदानें बंद होने के बाद भी सदियों तक एसिड माइन ड्रेनेज से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन जारी रह सकता है।

  • यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रूज अध्ययन ने बताया, खनन का छिपा कार्बन प्रभाव पारंपरिक अनुमान से कई गुना अधिक हो सकता है।

  • स्पेन की 82 खदानों के अध्ययन में सामने आया, अम्लीय जल के उपचार से भी बड़ी मात्रा में सीओ2 निकलती है।

  • धातुओं की बढ़ती मांग के बीच वैज्ञानिकों ने खनन उत्सर्जन की नई गणना और पर्यावरण संरक्षण उपायों की जरूरत बताई।

  • बंद खदानों का असर हजारों वर्षों तक रह सकता है, इसलिए टिकाऊ खनन और बेहतर उपचार तकनीक जरूरी हैं।

दुनिया भर में धातुओं की बढ़ती मांग के बीच एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने खनन उद्योग के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन में पता चला है कि धातु की खदानें बंद होने के बाद भी लंबे समय तक कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) छोड़ सकती हैं। यह उत्सर्जन कई सदियों या यहां तक कि हजारों वर्षों तक जारी रह सकता है।

अब तक खनन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की गणना करते समय मुख्य रूप से मशीनों के इस्तेमाल, बिजली की खपत, खनिजों की ढुलाई और प्रसंस्करण से निकलने वाली गैसों को शामिल किया जाता था। लेकिन नई रिसर्च बताती है कि खदानों से जुड़ी एक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया भी बड़ी मात्रा में सीओ2 पैदा कर सकती है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा है।

एसिड माइन ड्रेनेज से निकलता है कार्बन

यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रूज के वैज्ञानिकों ने किया है। यह पहली व्यापक वैज्ञानिक जांच है जिसमें धातु खनन से जुड़े एसिड माइन ड्रेनेज से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का आकलन किया गया है। यह शोध एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

एसिड माइन ड्रेनेज तब बनता है जब खनन के दौरान जमीन के अंदर मौजूद धातु सल्फाइड खनिज बाहर आ जाते हैं। ये खनिज हवा और पानी के संपर्क में आने पर रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं और अम्लीय पानी बनाते हैं। यह पानी जहरीली धातुओं को अपने साथ बहाकर नदियों और आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।

जब इस अम्लीय पानी को प्राकृतिक रूप से या उपचार प्रक्रिया के दौरान सामान्य किया जाता है, तो इस रासायनिक प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकल सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यही छिपा हुआ उत्सर्जन खनन के कुल कार्बन प्रभाव को काफी बढ़ा सकता है।

स्पेन की खदानों पर किया गया अध्ययन

वैज्ञानिकों ने अपने शोध के लिए दक्षिण-पूर्वी स्पेन की 82 सक्रिय और पुरानी खदानों का अध्ययन किया। यह क्षेत्र दुनिया में एसिड माइन ड्रेनेज की सबसे अधिक मात्रा वाले इलाकों में गिना जाता है।

शोधकर्ताओं ने वहां की नदियों के पानी का रासायनिक अध्ययन किया। उन्होंने यह पता लगाने की कोशिश की कि कितना अम्लीय पानी बन रहा है, वह कैसे सामान्य हो रहा है और इस प्रक्रिया में कितनी सीओ2 पैदा हो रही है।

उन्होंने नदियों के उस हिस्से का भी अध्ययन किया जहां नदी का पानी समुद्र के खारे पानी से मिलता है। यहां भी रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों से भी इन परिणामों की पुष्टि हुई।

खदान बंद होने के बाद भी जारी रहता है असर

शोधकर्ताओं के अनुसार, खनन का पर्यावरणीय प्रभाव केवल उस समय तक सीमित नहीं रहता जब तक खदान चालू रहती है। जमीन के ऊपर आ चुके धातु सल्फाइड खनिज धीरे-धीरे पानी और ऑक्सीजन के संपर्क में आते रहते हैं।

इन खनिजों को पूरी तरह प्रतिक्रिया करने में सैकड़ों या हजारों साल लग सकते हैं। इसका मतलब है कि पुरानी और बंद खदानें भी लंबे समय तक एसिड माइन ड्रेनेज और उससे जुड़े कार्बन उत्सर्जन का कारण बन सकती हैं।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि यह परिणाम चौंकाने वाला है। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में एसिड माइन ड्रेनेज से होने वाला कुल उत्सर्जन पारंपरिक कार्बन आकलन से दस गुना से भी अधिक हो सकता है।

हरित ऊर्जा के दौर में नई चुनौती

दुनिया सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और बिजली के नए नेटवर्क के विस्तार की ओर बढ़ रही है। इन तकनीकों के लिए तांबा और अन्य धातुओं की जरूरत बहुत अधिक बढ़ रही है।

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर धातुओं की बढ़ती मांग को पूरा करना है, तो खनन के सभी पर्यावरणीय प्रभावों को समझना जरूरी होगा। केवल खदानों में इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा से होने वाले उत्सर्जन को गिनना पर्याप्त नहीं है।

खनन के तरीके बदलने की जरूरत

शोधकर्ताओं का मानना है कि एसिड माइन ड्रेनेज को नियंत्रित करने के नए तरीके विकसित करने होंगे ताकि उपचार प्रक्रिया के दौरान होने वाले सीओ2 उत्सर्जन को कम किया जा सके। साथ ही भविष्य में खनन की कार्बन गणना में इस छिपे हुए उत्सर्जन को भी शामिल करना होगा।

यह अध्ययन बताता है कि खदानों का असर उनके बंद होने के बाद भी खत्म नहीं होता। धरती से निकाले गए खनिज लंबे समय तक पर्यावरण और जलवायु पर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य के लिए धातु उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाना जरूरी है।