अल नीनो का मौसम प्रभाव: दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया सूखे, अमेरिका दक्षिणी हिस्से, पेरू और इक्वाडोर में अधिक बारिश होगी। फोटो साभार: आईस्टॉक
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2026 में वापस आ सकता है 'अल नीनो', रिकॉर्ड गर्मी के आसार

अल नीनो और ला नीना: वैश्विक मौसम और तापमान पर उनका असर, भविष्य के रिकॉर्ड गर्म साल का अंदेशा

Dayanidhi

  • अल नीनो संभावना 2026 में: जुलाई-सितंबर में 50-60 फीसदी आसार, वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ सकता है।

  • अल नीनो का मौसम प्रभाव: दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया सूखे, अमेरिका दक्षिणी हिस्से, पेरू और इक्वाडोर में अधिक बारिश होगी।

  • ला नीना का विपरीत असर: ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण-पूर्व अफ्रीका में बारिश बढ़ती, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ता है।

  • वैश्विक तापमान वृद्धि: अल नीनो से 0.1–0.2 डिग्री सेल्सियस का अस्थायी इजाफा, बिना अल नीनो के भी गर्म साल की संभावना।

  • नोआ का नया मापदंड आरओएनआई: पूर्व-मध्य प्रशांत तापमान की तुलना पूरे उष्णकटिबंधीय महासागर से, अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय परिणाम।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल 2026 में अल नीनो के आसार हैं। अगर यह घटना होती है, तो वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। अमेरिकी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (नोआ) के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच और उसके बाद अल नीनो बनने के आसार लगभग 50 से 60 फीसदी है।

अल नीनो और ला नीना क्या हैं?

अल नीनो और इसका ठंडा साथी ला नीना (ला नीना), प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होने वाले प्राकृतिक मौसम चक्र अल नीनो-सदरन ऑस्सीलेशन (ईएनएसओ) के दो चरण हैं।

अल नीनो का नाम 19वीं सदी में पेरू और इक्वाडोर के मछुआरों ने रखा था। इसका अर्थ है “लड़का” या “क्राइस्ट चाइल्ड।” उन्होंने देखा कि क्रिसमस से ठीक पहले समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता था, जिससे उनकी मछली पकड़ने की उपज कम हो जाती थी।

ला नीना इसका उल्टा है। इसके बीच का समय “तटस्थ” (न्यूट्रल) चरण कहलाता है।

अल नीनो कैसे काम करता है?

अल नीनो के दौरान, प्रशांत महासागर में चलने वाली पूर्व से पश्चिम की लगातार चलने वाली व्यापारिक हवाएं कमजोर हो जाती हैं। इससे समुद्र का सामान्य रूप से ठंडा हिस्सा गर्म हो जाता है।

गर्म पानी और उससे निकलने वाली ऊष्मा वातावरण में ऊर्जा छोड़ती है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है और वैश्विक तापमान थोड़े समय के लिए बढ़ जाता है। नोआ के मौसम विज्ञानी के अनुसार, सामान्य अल नीनो घटना से वैश्विक औसत तापमान में लगभग 0.1 से 0.2 डिग्री सेल्सियस तक का अस्थायी इजाफा हो सकता है। अल नीनो आमतौर पर हर दो से सात साल में आता है।

अल नीनो का मौसम पर असर

अल नीनो के कारण विभिन्न क्षेत्रों में मौसम पैटर्न बदल जाते हैं।

सूखा पड़ने वाले क्षेत्र: दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका, उत्तर ब्राजील।

बारिश अधिक होने वाले क्षेत्र: अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र, अमेरिका का दक्षिणी हिस्सा, पेरू और इक्वाडोर।

2026 और संभावित रिकॉर्ड

पिछली अल नीनो घटना 2023-2024 में हुई थी। इसने 2023 को रिकॉर्ड के दूसरे स्थान और 2024 को अब तक का सबसे गर्म साल बनाया।

यूरोपीय संघ की कोपर्निकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक, अगर 2026 में अल नीनो बनता है, तो यह “एक और रिकॉर्ड-ब्रेकिंग साल” हो सकता है।

हालांकि अगर यह घटना साल के दूसरे हिस्से में बनती है, तो इसका प्रभाव 2027 में अधिक दिखाई देगा। आयरलैंड के नेशनल मेट्रोलॉजिकल सर्विस के वैज्ञानिकों के अनुसार, वैश्विक वातावरण को अल नीनो के प्रभाव का अनुभव होने में समय लगता है।

उन्होंने कहा, 2026 बिना अल नीनो के भी सबसे गर्म साल बन सकता है, क्योंकि वैश्विक गर्मी की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।

ला नीना और उसका असर

सबसे हाल की ला नीना घटना दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी और अपेक्षाकृत कमजोर और छोटी अवधि की थी। यह फरवरी-अप्रैल 2025 तक तटस्थ चरण में प्रवेश कर गई।

ला नीना प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से को ठंडा करती है और अल नीनो के विपरीत असर डालती है। इससे ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, भारत, दक्षिण-पूर्व अफ्रीका और उत्तर ब्राजील में अधिक बारिश होती है, जबकि दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ता है।

हालांकि, 2025 दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल रहा, इससे पता चलता है कि ग्लोबल वार्मिंग की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।

नोआ का नया मापदंड

फरवरी 2026 में नोआ ने अल नीनो और ला नीना की निगरानी का नया तरीका अपनाया।

पुराना तरीका ओशेनिक नीनो इंडेक्स (ओएनआई) समुद्र की सतह का तापमान तीन महीने का औसत लेकर पिछले 30 साल के औसत से तुलना करता था। लेकिन समुद्र लगातार गर्म हो रहे हैं, इसलिए यह तरीका अब सही नहीं रहता।

नया तरीका रिलेटिव ओशेनिक नीनो इंडेक्स (आरओएनआई) है। यह पूर्व-मध्य प्रशांत महासागर के तापमान की तुलना उष्णकटिबंधीय महासागर के बाकी हिस्सों से करता है। नोआ के अनुसार, यह तरीका अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय है।

यदि 2026 में अल नीनो बनता है, तो दुनिया भर में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। इसका असर 2027 में और भी स्पष्ट हो सकता है।

इसके बावजूद, ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अल नीनो के बिना भी दुनिया में अधिक गर्म वर्ष आने की आशंका बनी रहती है।

अल नीनो और ला नीना जैसी प्राकृतिक घटनाएं यह दिखाती हैं कि हमारा मौसम कितना संवेदनशील है और वैश्विक तापमान पर इनका गहरा असर पड़ता है।