2025 दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा, जबकि पिछले 11 साल लगातार सबसे गर्म वर्षों में दर्ज हुए। फोटो साभार: स्टेट ऑफ द क्लाइमेट रिपोर्ट
जलवायु

2025 में जलवायु संकट और गहराया, ग्रीनहाउस गैस, समुद्र स्तर व महासागर की गर्मी रिकॉर्ड स्तर पर

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में धरती और गर्म हुई, समुद्र का जलस्तर बढ़ा और बर्फ तेजी से पिघली, जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत सामने आए।

Dayanidhi

  • ग्रीनहाउस गैसें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, सीओ2 की मात्रा बढ़ी और जीवाश्म ईंधन से उत्सर्जन भी नए रिकॉर्ड पर रहा।

  • 2025 दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा, जबकि पिछले 11 साल लगातार सबसे गर्म वर्षों में दर्ज हुए।

  • महासागरों का तापमान और गर्मी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जबकि दुनिया के अधिकांश समुद्री क्षेत्रों में हीटवेव दर्ज की गई।

  • समुद्र का जलस्तर लगातार 14वें साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा, ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों का पिघलना जारी रहा।

  • आर्कटिक और अंटार्कटिका में रिकॉर्ड गर्मी रही, समुद्री बर्फ घटी और दुनिया में उष्णकटिबंधीय तूफानों की गतिविधि बढ़ी।

दुनिया में जलवायु परिवर्तन का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2025 में धरती के कई महत्वपूर्ण जलवायु संकेतकों ने नए रिकॉर्ड बनाए। ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा, समुद्र का जलस्तर और महासागरों में जमा गर्मी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। यह जानकारी हाल ही में अमेरिकन मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी (एएमएस) की 36वीं वार्षिक ‘स्टेट ऑफ द क्लाइमेट’ रिपोर्ट में सामने आई है।

यह रिपोर्ट दुनिया के 60 देशों के 625 वैज्ञानिकों के योगदान पर आधारित है। इसमें जमीन, समुद्र, बर्फ और अंतरिक्ष से जुटाए गए आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट पृथ्वी के बदलते मौसम और जलवायु की सबसे विस्तृत तस्वीर पेश करती है।

कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर रिकॉर्ड पर

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) की औसत मात्रा 425.6 पार्ट्स प्रति मिलियन रही। यह औद्योगिक युग से पहले के करीब 278 पार्ट्स प्रति मिलियन के स्तर से लगभग 53 प्रतिशत अधिक है। मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी अन्य प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों का स्तर भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।

जीवाश्म ईंधन से होने वाला कार्बन उत्सर्जन भी 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर रहा। अनुमान के अनुसार, यह 10.3 पेटाग्राम कार्बन प्रति वर्ष रहा। 1960 के दशक में यह आंकड़ा करीब 3 पेटाग्राम कार्बन प्रति वर्ष था। वैज्ञानिकों का कहना है कि वातावरण में इन गैसों की बढ़ती मात्रा धरती को लगातार गर्म कर रही है।

2025 रहा सबसे गर्म सालों में शामिल

2025 का वैश्विक औसत तापमान रिकॉर्ड में दर्ज तीन सबसे गर्म वर्षों में रहा। खास बात यह है कि इस दौरान अल नीनो की स्थिति नहीं थी। इसके बावजूद तापमान बेहद ऊंचा रहा।

यूरोप में 2025 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा। रूस, चीन, दक्षिण कोरिया और अर्जेंटीना में यह दूसरा सबसे गर्म साल रहा। रिपोर्ट में शामिल पांच प्रमुख वैश्विक तापमान रिकॉर्ड में एक बात समान है। साल 2015 से 2025 तक के सभी 11 साल रिकॉर्ड के सबसे गर्म 11 वर्षों में शामिल रहे।

समुद्र भी लगातार गर्म हो रहा

धरती के तापमान में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर महासागरों पर दिखाई दे रहा है। 2025 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड में तीसरा सबसे अधिक रहा। यह 1991 से 2020 के औसत से 0.38 डिग्री सेल्सियस अधिक था।

साल के दौरान दुनिया के करीब 87 प्रतिशत समुद्री क्षेत्र ने कम से कम एक बार समुद्री हीटवेव का सामना किया। इसके विपरीत केवल 26 प्रतिशत समुद्री क्षेत्र में समुद्री शीतलहर दर्ज की गई।

समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ा

महासागरों में बढ़ती गर्मी का असर समुद्र के जलस्तर पर भी पड़ रहा है। 2025 में वैश्विक औसत समुद्र स्तर लगातार 14वें साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा। यह 1993 के औसत स्तर से करीब 111.2 मिलीमीटर अधिक था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र के गर्म होने से पानी फैलता है और उसका आयतन बढ़ता है। इसके अलावा ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों के पिघलने से भी समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। वर्ष 2005 के बाद समुद्र के गर्म होने ने औसतन 1.6 मिलीमीटर और ग्लेशियरों व बर्फ की चादरों के पिघलने ने करीब 2 मिलीमीटर सालाना समुद्र स्तर बढ़ाने में योगदान दिया है।

आर्कटिक में तेजी से बदलाव

आर्कटिक क्षेत्र में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दिया। 2025 आर्कटिक के 126 साल के रिकॉर्ड में दूसरा सबसे गर्म वर्ष रहा। यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में करीब तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है।

आर्कटिक में समुद्री बर्फ का अधिकतम विस्तार 47 साल के रिकॉर्ड में सबसे कम रहा। पुरानी बर्फ भी तेजी से खत्म हो रही है। चार साल से ज्यादा पुरानी बर्फ का क्षेत्र 2025 में केवल करीब 95 हजार वर्ग किलोमीटर रह गया, जबकि 1980 के दशक में यह लगभग 15 लाख वर्ग किलोमीटर था।

अंटार्कटिका और ग्लेशियरों की चिंता

अंटार्कटिका में 2025 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा। वहां कई बर्फीली चादरों पर सतही पिघलाव सामान्य से अधिक रहा। आसपास के समुद्री क्षेत्र में बर्फ भी लगातार कम बनी रही।

दुनिया के ग्लेशियरों की स्थिति भी चिंताजनक है। भूमि आधारित ग्लेशियरों ने लगातार 38वें वर्ष बर्फ खोई। पिछले एक दशक में 1976 के बाद से ग्लेशियरों के कुल नुकसान का करीब 41 प्रतिशत हिस्सा हुआ है।

तूफानों की बढ़ी गतिविधि

2025 में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की गतिविधि भी औसत से अधिक रही। दुनिया में कुल 97 नामित उष्णकटिबंधीय चक्रवात दर्ज किए गए, जबकि 1991 से 2020 का औसत 87 था। इनमें पांच तूफान कैटेगरी 5 तक पहुंचे।

अटलांटिक में आए तूफानों में हरिकेन मेलिसा बेहद शक्तिशाली रहा। इसकी अधिकतम गति 190 मील प्रति घंटा तक पहुंची। जमैका में कैटेगरी 5 तूफान के रूप में पहुंचने के बाद इसने भारी तबाही मचाई। इससे 95 लोगों की मौत हुई और कम से कम 12.2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

वैज्ञानिकों के लिए बड़ा संकेत

रिपोर्ट की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जलवायु परिवर्तन के कई अलग-अलग संकेत एक साथ खराब होते दिखाई दे रहे हैं। वातावरण में ग्रीनहाउस गैसें बढ़ रही हैं, महासागर गर्म हो रहे हैं, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और बर्फ तेजी से पिघल रही है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, एक साल के आंकड़ों से पूरी जलवायु तस्वीर तय नहीं होती, लेकिन 2025 के आंकड़े लंबे समय से जारी गर्मी के रुझान को जरूर मजबूत करते हैं। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि धरती की जलवायु तेजी से बदल रही है और इसके प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहले से अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।