23 हजार से अधिक मोलस्क प्रजातियों के अध्ययन में जलवायु परिवर्तन का शरीर के आकार पर अलग-अलग असर सामने आया है। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

16% तक छोटे हुए समुद्री जीव, कुछ प्रजातियों का आकार 2.9% तक बढ़ने के आसार

जलवायु परिवर्तन का नया असर: गर्म होते समुद्र में कुछ जीव होंगे छोटे, वजन में करीब 41 प्रतिशत की गिरावट की आशंका, तो कुछ के आकार में हो सकती है बढ़ोतरी

Dayanidhi

  • वैज्ञानिकों ने पाया कि समुद्र गर्म होने से सभी समुद्री जीव छोटे नहीं होंगे, कुछ प्रजातियां बड़ी भी हो सकती हैं।

  • 23 हजार से अधिक मोलस्क प्रजातियों के अध्ययन में जलवायु परिवर्तन का शरीर के आकार पर अलग-अलग असर सामने आया है।

  • अधिक उत्सर्जन की स्थिति में कई समुद्री जीवों की औसत लंबाई वर्ष 2100 तक करीब 16 प्रतिशत घट सकती है।

  • आर्कटिक महासागर में स्क्विड, ऑक्टोपस सहित सेफेलोपॉड और टस्क शेल के आकार में बढ़ोतरी होने का अनुमान जताया गया है।

  • ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने से समुद्री जीवों के आकार में होने वाली संभावित गिरावट को काफी हद तक घटाया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन को लेकर लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि जैसे-जैसे समुद्र का तापमान बढ़ेगा, समुद्री जीवों का आकार छोटा होता जाएगा। लेकिन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ लुइसियाना एट लाफायेट के वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्म होते समुद्रों में सभी समुद्री जीव छोटे नहीं होंगे। कुछ जीवों का आकार घट सकता है, जबकि कुछ का आकार बढ़ भी सकता है।

यह अध्ययन समुद्री मोलस्क यानी घोंघे, सीप, क्लैम, ऑयस्टर, स्क्विड, ऑक्टोपस और चिटोन जैसे जीवों पर किया गया। वैज्ञानिकों ने 23 हजार से अधिक प्रजातियों का अध्ययन किया। शोध के नतीजे बताते हैं कि वर्ष 2100 तक दुनिया के अधिकतर समुद्री क्षेत्रों में इन जीवों के औसत आकार में कमी आ सकती है, लेकिन यह बदलाव हर जगह और हर जीव में एक जैसा नहीं होगा।

लाखों रिकॉर्ड का किया गया अध्ययन

यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ लुइसियाना एट लाफायेट के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किया गया। वैज्ञानिकों ने करीब 27.9 लाख प्रजाति रिकॉर्ड और उनके शरीर के आकार से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया। इन आंकड़ों की मदद से यह समझने की कोशिश की गई कि समुद्र का तापमान, ऑक्सीजन और समुद्र की उत्पादकता अलग-अलग जीवों के आकार को किस तरह प्रभावित करते हैं।

शोधकर्ताओं ने मोलस्क के पांच बड़े समूहों को देखा और फिर अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में साल 2100 तक उनके संभावित आकार का अनुमान लगाया। इसके लिए दुनिया के 10 प्रमुख समुद्री क्षेत्रों और कम तथा ज्यादा उत्सर्जन वाले दो जलवायु परिदृश्यों को शामिल किया गया।

कुछ जीवों का आकार 16 प्रतिशत तक घट सकता है

प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' में प्रकाशित शोध के अनुसार, यदि भविष्य में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बहुत अधिक रहता है, तो लगभग दो-तिहाई समूहों और समुद्री क्षेत्रों में जीवों के औसत आकार में महत्वपूर्ण कमी आ सकती है। कुछ मामलों में औसत शरीर की लंबाई करीब 16 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है।

शरीर की लंबाई में यह कमी उनके कुल वजन पर और भी बड़ा असर डाल सकती है। उदाहरण के लिए, बाल्टिक सागर में क्लैम की औसत लंबाई में 16.2 प्रतिशत की कमी होने पर उनके औसत शरीर के वजन में करीब 41 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इसका मतलब है कि आकार में थोड़ी कमी भी समुद्री जीवों की कुल जैविक मात्रा यानी बायोमास पर बड़ा असर डाल सकती है।

कुछ समुद्री जीव हो सकते हैं बड़े

हालांकि, अध्ययन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि सभी जीव छोटे नहीं होंगे। ज्यादा उत्सर्जन वाले परिदृश्य मंल आर्कटिक महासागर में कुछ समुद्री जीवों के आकार में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।

स्क्विड और ऑक्टोपस जैसे सेफेलोपॉड का औसत आकार करीब 2.9 प्रतिशत बढ़ सकता है। इसी तरह टस्क शेल नामक समुद्री जीवों की औसत लंबाई में करीब 3.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका एक कारण इन जीवों की अलग जैविक क्षमता हो सकती है। सेफेलोपॉड को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है, लेकिन उनका रक्त संचार तंत्र प्रभावी होता है और उनका जीवन चक्र तेज होता है। इससे कुछ परिस्थितियों में उन्हें बदलते समुद्री वातावरण के साथ तालमेल बैठाने में मदद मिल सकती है।

हर समुद्री क्षेत्र पर अलग असर

शोध में यह भी सामने आया कि जलवायु परिवर्तन का असर केवल जीवों की प्रजाति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वे किस समुद्री क्षेत्र में रहते हैं।

एक ही समूह के जीव किसी समुद्र में छोटे हो सकते हैं, जबकि दूसरे समुद्री क्षेत्र में उनका आकार बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि दुनिया के सभी समुद्री हिस्से एक समान गति से गर्म नहीं हो रहे हैं। समुद्र में ऑक्सीजन की मात्रा और भोजन पैदा होने की प्रक्रिया में भी अलग-अलग जगहों पर अलग बदलाव हो रहे हैं।

शोधकर्ता के अनुसार, समुद्री जीवों के भविष्य को समझने के लिए उनकी जैविक विशेषताओं के साथ-साथ उनके रहने वाले समुद्री क्षेत्र में होने वाले बदलावों को भी देखना जरूरी है।

उत्सर्जन कम करने से घट सकता है नुकसान

अध्ययन में भविष्य के दो अलग-अलग उत्सर्जन परिदृश्यों की तुलना की गई। कम उत्सर्जन वाले परिदृश्य में 50 समूह और समुद्री क्षेत्र के संयोजनों में से केवल 14 में आकार में महत्वपूर्ण कमी का अनुमान लगाया गया। ज्यादा उत्सर्जन की स्थिति में यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई।

इससे पता चलता है कि समुद्री जीवों के आकार में होने वाली कमी काफी हद तक इस बात पर निर्भर कर सकती है कि दुनिया भविष्य में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कितना कम करती है।

समुद्री पारिस्थितिकी पर पड़ेगा असर

मोलस्क समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वे पानी को साफ करने, पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखने, दूसरे जीवों के लिए आवास बनाने और कार्बन को जमा करने में मदद करते हैं। कई मोलस्क मानव भोजन और मछली पालन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए उनके आकार में बड़ा बदलाव केवल उन्हीं जीवों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे समुद्र की खाद्य श्रृंखला, मछली पालन और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर पड़ सकता है।

इस अध्ययन का मुख्य संदेश साफ है कि जलवायु परिवर्तन समुद्री जीवों को केवल छोटा करने वाला बदलाव नहीं है। इसका असर अलग-अलग जीवों और अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में अलग हो सकता है। लेकिन उत्सर्जन जितना अधिक होगा, समुद्री जीवों के आकार में कमी का खतरा भी उतना ही बढ़ सकता है।