जलवायु परिवर्तन से स्पेन में फ्रॉस्ट वेदरिंग घट रही है, चट्टानों के टूटने की प्रक्रिया पिछले तीन दशकों में कमजोर हुई है।
निचले क्षेत्र और तटीय इलाके लगभग फ्रॉस्ट गतिविधि से मुक्त हो रहे हैं, क्योंकि ठंड के दिन और फ्रीज-थॉ चक्र घटे हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में फ्रॉस्ट वेदरिंग अभी भी सक्रिय है और कुछ स्थानों पर यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत स्थिर या बढ़ी हुई दिखी है।
वैज्ञानिकों के अनुसार ठंड से जुड़ी चट्टान टूटने की प्रक्रिया अब नीचे से ऊपर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों की ओर खिसक रही है।
भविष्य में 2050 तक फ्रॉस्ट वेदरिंग मुख्यतः ऊंचे पर्वतों तक सीमित रह सकती है, जबकि अन्य क्षेत्र लगभग पूरी तरह मुक्त होंगे।
जलवायु परिवर्तन का असर केवल मौसम या तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरती की सतह को बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर रहा है। हाल ही में सामने आए एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि स्पेन में चट्टानों के टूटने की एक बड़ी प्रक्रिया, जिसे फ्रॉस्ट वेदरिंग कहा जाता है, पिछले तीन दशकों में बदल गई है।
यह प्रक्रिया तब होती है जब पानी चट्टानों की दरारों में घुसकर जम जाता है और फैलने के कारण चट्टानें टूटने लगती हैं। इस अध्ययन से पता चलता है कि गर्म होते जलवायु के कारण यह प्रक्रिया अब पहले जैसी नहीं रही है।
कैसे किया गया अध्ययन
यह शोध स्पेन के विभिन्न इलाकों में किया गया, जिसमें पहाड़ी क्षेत्र, तटीय क्षेत्र, आंतरिक मैदानी इलाके और कुछ ठंडे पर्वतीय क्षेत्र शामिल थे। वैज्ञानिकों ने 1993 से 2022 तक के मौसम के आंकड़ों का अध्ययन किया।
इसमें 84 मौसम केंद्रों से मिले तापमान और बारिश के रोजमर्रा के रिकॉर्ड शामिल थे। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि कितने दिनों तक तापमान शून्य डिग्री से नीचे जाता है, कितनी बार दिन और रात में तापमान जमने और पिघलने की स्थिति बनती है और यह प्रक्रिया कितनी तीव्र होती है।
क्या कहता है अध्ययन?
दि क्रायोस्फीयर में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि स्पेन के अधिकतर हिस्सों में ठंड के दिन कम हो गए हैं। बर्फ जमने और पिघलने की घटनाएं भी पहले की तुलना में घट गई हैं। इसका मतलब है कि सामान्य रूप से चट्टानों के टूटने की प्रक्रिया कमजोर हो रही है। खासकर निचले इलाकों, समुद्री तटों और दक्षिणी क्षेत्रों में अब बहुत कम या लगभग नगण्य फ्रॉस्ट गतिविधि बची है। साथ ही ठंड का मौसम भी छोटा हो गया है, जिससे चट्टानों पर इसका असर कम समय के लिए ही रह गया है।
पहाड़ों में अलग स्थिति
हालांकि पूरे देश में यह गिरावट देखी गई है, लेकिन ऊंचे पहाड़ी इलाकों में स्थिति अलग है। स्पेन के कुछ पर्वतीय और उनके आसपास के क्षेत्रों में अभी भी ऐसे तापमान मिलते हैं जो चट्टानों को तोड़ने की प्रक्रिया के लिए सबसे अनुकूल हैं। कई जगहों पर यह भी देखा गया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि कुछ ऊंचाई वाले हिस्सों में यह स्थिर बनी हुई है या स्थानीय रूप से बढ़ भी रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म जलवायु के कारण यह प्रक्रिया अब नीचे के इलाकों से हटकर ऊपर की ओर, यानी ऊंचे पहाड़ों की तरफ बढ़ रही है। इसका मतलब यह है कि फ्रॉस्ट वेदरिंग खत्म नहीं हो रही, बल्कि अपनी जगह बदल रही है।
भविष्य में क्या हो सकता है
शोध में अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक यह प्रक्रिया और भी अधिक सीमित हो जाएगी। यानी फ्रॉस्ट वेदरिंग मुख्य रूप से केवल बहुत ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों तक ही रह जाएगी। स्पेन के अधिकतर निचले और तटीय क्षेत्र लगभग पूरी तरह इससे मुक्त हो सकते हैं। विशेष रूप से स्पेन के सबसे ऊँचे पर्वत क्षेत्र जैसे पाइरेनीज में यह प्रक्रिया सबसे अधिक सक्रिय रह सकती है।
असर और चुनौतियां
इस बदलाव का असर केवल प्राकृतिक भू-आकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मानव जीवन भी प्रभावित हो सकता है। चट्टानों के टूटने से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं होती हैं, जो सड़कों, रेल मार्गों और सुरंगों के लिए खतरा पैदा करती हैं। यदि यह प्रक्रिया ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक केंद्रित हो जाती है, तो उन क्षेत्रों में खतरा बढ़ सकता है जहां पहले इतनी तीव्र गतिविधि नहीं थी।
इसके अलावा यह बदलाव पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक धरोहरों पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि पत्थर से बनी संरचनाएं भी इसी तरह की मौसमीय प्रक्रियाओं से धीरे-धीरे कमजोर होती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण इन प्रक्रियाओं का स्थान बदलना भविष्य में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।
यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें नए तरीके से और नई जगहों पर व्यवस्थित कर रहा है। स्पेन में फ्रॉस्ट वेदरिंग का घटता और ऊंचाई की ओर बढ़ता पैटर्न इस बात का संकेत है कि धरती की भू-आकृति बदलने वाली शक्तियां भी अब बदलते जलवायु के साथ खुद को ढाल रही हैं।