केवल पेड़ लगाना पर्याप्त नहीं, बल्कि पेड़, झाड़ियां और घास मिलाकर बनाई गई हरियाली ज्यादा प्रभावी साबित होती है। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

हरियाली से शहरों को 18 डिग्री तक ठंडा किया जा सकता है, लेकिन सही डिजाइन जरूरी

शहरों में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए हरियाली जरूरी है, लेकिन शोध बताता है कि सिर्फ पेड़ लगाना काफी नहीं, सही डिजाइन, जलवायु और हवा के बहाव का ध्यान रखना भी जरूरी है।

Dayanidhi

  • मेलबर्न, म्यूनिख और हांगकांग के अध्ययन से पता चला कि हरियाली शहरों की गर्मी कम कर सकती है, लेकिन असर अलग-अलग होता है।

  • केवल पेड़ लगाना पर्याप्त नहीं, बल्कि पेड़, झाड़ियां और घास मिलाकर बनाई गई हरियाली ज्यादा प्रभावी साबित होती है।

  • मेलबर्न में पेड़ों ने सतही गर्मी काफी कम की, जिससे छायादार सड़कें अधिक ठंडी और आरामदायक महसूस हुईं।

  • म्यूनिख में मिश्रित हरियाली ने गर्मी तनाव को सबसे अधिक घटाया, लेकिन घनी हरियाली ने हवा के बहाव को बाधित किया।

  • हांगकांग में अधिक नमी के कारण हरियाली का प्रभाव सीमित रहा, कभी-कभी चिपचिपी गर्मी और असुविधा भी बढ़ी।

आजकल दुनिया भर में खासकर भारत के शहर बढ़ती गर्मी से भट्ठी बनते जा रहे हैं। शहर में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे लगाने पर चर्चा जारी है। सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक जगहों पर हरियाली बढ़ाई जा रही है ताकि शहर ठंडे और रहने लायक बने रहें। लेकिन एक नए अध्ययन से पता चला है कि सिर्फ पेड़ लगाना ही काफी नहीं है। कई बार गलत तरीके से की गई हरियाली से गर्मी कम होने के बजाय असुविधा भी बढ़ सकती है।

यह शोध ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, जर्मनी के म्यूनिख और हांगकांग में किया गया। इसमें अलग-अलग प्रकार की हरियाली का अध्ययन किया गया और देखा गया कि वे गर्मी और इंसानी आराम पर कैसे असर डालती हैं।

शहर क्यों गर्म हो रहे हैं?

शहरों में गर्मी बढ़ने का एक बड़ा कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव है। इसमें सड़कें, इमारतें और सीमेंट की सतहें दिन में सूरज की गर्मी सोख लेती हैं और रात में धीरे-धीरे उसे वापस छोड़ती हैं। इससे शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हो जाते हैं।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन भी लू या हीटवेव को और तेज और खतरनाक बना रहा है। ऐसे में शहरों को ठंडा रखने के लिए हरियाली को एक महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है।

पेड़ कैसे मदद करते हैं

पेड़ लगाने का सबसे बड़ा फायदा छाया मिलना है। जब लोग पेड़ों के नीचे चलते हैं तो उन्हें सीधी धूप नहीं लगती, जिससे शरीर पर गर्मी का असर कम होता है। पेड़ आसपास की सतहों जैसे सड़क और दीवारों द्वारा सोखी जाने वाली गर्मी को भी कम करते हैं।

लेकिन सिर्फ हवा का तापमान ही गर्मी महसूस करने का एकमात्र कारण नहीं है। इंसान गर्मी को कई तरीकों से महसूस करता है, जैसे सूरज की सीधी किरणें, नमी और हवा का चलना। इसलिए कभी-कभी पेड़ होने के बावजूद जगह असहज महसूस हो सकती है।

अध्ययन में क्या पाया गया

शोध में तीन तरह की जगहों का अध्ययन किया गया, खाली सड़कें, सिर्फ पेड़ों वाली जगहें और “लेयर्ड वेजिटेशन” यानी पेड़, झाड़ियां और घास मिलाकर बनाई गई हरियाली।

मेलबर्न में पाया गया कि पेड़ों ने लोगों पर पड़ने वाली गर्मी (रेडिएंट हीट) को 18 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा कम किया। इससे छायादार सड़कें काफी ठंडी महसूस हुईं, भले ही हवा का तापमान बहुत कम न बदला हो।

म्यूनिख में सबसे अच्छा असर उन जगहों पर दिखा जहां पेड़, झाड़ियां और घास मिलाकर हरियाली बनाई गई थी। यहां गर्मी का तनाव लगभग आठ डिग्री सेल्सियस तक कम हुआ।

हांगकांग में भी हरियाली से फायदा मिला, खासकर छाया के कारण। लेकिन यहां नमी या उमस ज्यादा होने की वजह से असर मिश्रित रहा।

हरियाली हमेशा फायदेमंद क्यों नहीं होती

शोध में यह भी पाया गया कि हरियाली हमेशा गर्मी कम नहीं करती। कभी-कभी यह उल्टा असर भी डाल सकती है। हांगकांग जैसे उमस वाले शहरों में ज्यादा पेड़-पौधे हवा में नमी बढ़ा देते हैं। इससे पसीना आसानी से सूख नहीं पाता और लोगों को चिपचिपी गर्मी महसूस होती है।

वहीं म्यूनिख की कुछ संकरी सड़कों में घनी हरियाली ने हवा के बहाव को रोक दिया। इससे गर्म हवा और प्रदूषण वहीं फंस गए और स्थिति असहज हो गई।

शहरों के लिए क्या सीख है

इस अध्ययन का सबसे बड़ा संदेश यह है कि हर शहर के लिए एक जैसा समाधान काम नहीं करता। सिर्फ ज्यादा पेड़ लगाना ही पर्याप्त नहीं है।

शहरों को अपने मौसम, सड़क की चौड़ाई और हवा के बहाव को ध्यान में रखकर हरियाली की योजना बनानी होगी। कुछ जगहों पर ज्यादा छाया जरूरी है, तो कुछ जगहों पर हवा के आने-जाने का रास्ता खुला रखना जरूरी है।

हरियाली शहरों को ठंडा रखने का एक मजबूत तरीका है, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कैसे डिजाइन किया गया है। सही योजना के साथ पेड़, झाड़ियां और घास मिलकर शहरों को रहने योग्य बना सकते हैं। लेकिन गलत डिजाइन से वही हरियाली कभी-कभी असुविधा भी बढ़ा सकती है।

जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, शहरों के लिए जरूरी हो गया है कि वे सिर्फ पेड़ लगाने पर नहीं, बल्कि “स्मार्ट ग्रीन डिजाइन” पर ध्यान दिया जाना चाहिए।