डीजल जनरेटर; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
वायु

डीजल जनरेटर प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी, एनजीटी ने राज्यों को भेजा नोटिस

अदालत को बताया गया कि अब तक 15 राज्यों ने अलग-अलग क्षमता वाले डीजल जनरेटर सेटों में एमिशन कंट्रोल डिवाइस लगाने के निर्देश जारी किए हैं

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अहम मामलों में प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए।

  • एक ओर डीजल जनरेटरों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय निर्देशों का पालन न करने पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया गया, वहीं दूसरी ओर दिल्ली के स्कूलों के पास कचरे के ढेर पर नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए गए।

  • इन मामलों ने साफ कर दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियम और आदेश मौजूद होने के बावजूद उनका पालन जमीनी स्तर पर गंभीर रूप से कमजोर है, जिससे लोगों खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा बना हुआ है।

आरोप है देश के कई राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अब भी डीजल जनरेटरों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (आरईसीडी) लगाने के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।

9 अप्रैल, 2026 को इस मामले पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों, केंद्रशासित प्रदेशों की प्रदूषण नियंत्रण समितियों और सीपीसीबी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने सभी संबंधित पक्षों को 21 जुलाई 2026 की अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मुद्दा पहले भी 6 अगस्त 2019 के आदेश में उठाया जा चुका है। इस मामले में सीपीसीबी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीपीसीबी ने 800 किलोवाट तक क्षमता वाले डीजल जनरेटर इंजनों के लिए रेट्रो-फिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (आरईसीडी) की उत्सर्जन अनुपालन जांच हेतु प्रक्रिया और मानक तय करते हुए एक सर्कुलर जारी किया था।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इन निर्देशों का पालन सभी राज्यों के लिए जरूरी है।

अदालत को बताया गया कि अब तक महज 15 राज्यों ने अलग-अलग क्षमता वाले डीजल जनरेटर सेटों में एमिशन कंट्रोल डिवाइस लगाने के निर्देश जारी किए हैं। उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 नवंबर 2020 को जारी सर्कुलर का जिक्र किया है।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 29 सितंबर 2023 को एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन अधिनियम, 2021 की धारा 12 के तहत यह निर्देश जारी किए थे। हालांकि, एनसीआर के कई राज्यों ने अब तक इन निर्देशों का पालन नहीं किया है।

डीजल जनरेटरों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा स्रोत है, लेकिन कई राज्यों की सुस्ती के कारण प्रदूषण नियंत्रण के अहम उपाय अब भी जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। ऐसे में एनजीटी की सख्ती ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब नियम मौजूद हैं, तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा?

दिल्ली के दो स्कूलों के पास कचरे का ढेर, एनजीटी ने नगर निगम और डीपीसीसी को दिए कार्रवाई के निर्देश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सफदरजंग एन्क्लेव स्थित दो स्कूलों के पास कथित रूप से जमा किए जा रहे कचरे के ढेर पर गंभीर रुख अपनाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को मौके का निरीक्षण कर कूड़े की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

अदालत ने इस मामले में एमसीडी, डीपीसीसी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।

इस मामले में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सफदरजंग एन्क्लेव के दो स्कूलों के पास अवैध रूप से म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट को डंप किया जा रहा है। यह कचरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे इलाके में गंभीर प्रदूषण फैल रहा है और तेज दुर्गंध के कारण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों व स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को तस्वीरें दिखाते हुए बताया कि कूड़े का ढेर स्कूल की दीवार से सटा हुआ है, जिससे वहां पढ़ने वाले हजारों बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई कर स्थिति में सुधार लाने के निर्देश दिए हैं।