खेती से होने वाले पर्यावरण नुकसान का वैश्विक नक्शा तैयार, कुछ क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर सामने आया।
कृषि भूमि के छोटे हिस्से से भी हो रहा जैव विविधता और कार्बन भंडारण को बड़ा नुकसान।
घरेलू जानवरों पर आधारित उत्पादों का पर्यावरण पर सबसे ज्यादा दबाव, अध्ययन में सामने आए गंभीर आंकड़े।
मेक्सिको और मध्य अमेरिका, ब्राजील के कुछ हिस्से, पश्चिमी अफ्रीका, भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां खेती का पर्यावरण पर असर बहुत ज्यादा है।
बेहतर खेती और भोजन की आदतों में बदलाव से कम किया जा सकता है पर्यावरण पर दबाव, बचाई जा सकती है प्रकृति।
कृषि मानव जीवन के लिए सबसे जरूरी गतिविधियों में से एक है। दुनिया की बड़ी आबादी का भोजन खेती से मिलता है। लेकिन खेती का विस्तार अब पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती भी बनता जा रहा है। धरती की कुल रहने योग्य जमीन का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि के लिए इस्तेमाल होता है। इसका असर जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता यानी पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की विविधता पर पड़ रहा है।
एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि दुनिया में किन जगहों पर खेती से पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। यह अध्ययन नीदरलैंड्स के लीडेन विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान संस्थान (सीएमएल) की वैज्ञानिकों की टीम ने किया है। यह शोध पत्रिका ‘नेचर फूड’ में प्रकाशित हुआ है।
खेती के नुकसान का तैयार किया गया नक्शा
वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में कृषि भूमि, जैव विविधता, प्राकृतिक कार्बन भंडारण और अलग-अलग खाद्य उत्पादों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके आधार पर उन्होंने ऐसे नक्शे तैयार किए, जिनसे पता चलता है कि खेती का दबाव किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा है।
अध्ययन में पाया गया कि कृषि से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान समान रूप से नहीं फैले हैं। दुनिया में जैव विविधता की लगभग दो-तिहाई का नुकसान और प्राकृतिक कार्बन भंडारण की दो-तिहाई कमी केवल एक-तिहाई कृषि भूमि पर हो रही है। इसका मतलब है कि अगर कुछ खास इलाकों और खेती के तरीकों पर ध्यान दिया जाए तो पर्यावरण को होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।
कई देशों में बने बड़े खतरे वाले क्षेत्र
अध्ययन के अनुसार, मेक्सिको और मध्य अमेरिका, ब्राजील के कुछ हिस्से, पश्चिमी अफ्रीका, भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां खेती का पर्यावरण पर असर बहुत ज्यादा है।
इन इलाकों में दो तरह की समस्याएं दिखाई देती हैं। कुछ जगहों पर खेती बहुत अधिक मात्रा में और गहन तरीके से की जा रही है, जबकि कुछ स्थान ऐसे हैं जहां जंगलों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों को खेती के लिए बदला जा रहा है।
उष्णकटिबंधीय जंगलों जैसे इलाकों में बड़ी मात्रा में कार्बन जमा रहता है और वहां अनेक प्रकार के जीव-जंतु पाए जाते हैं। जब इन क्षेत्रों को खेतों में बदला जाता है तो एक साथ दो नुकसान होते हैं। जंगलों के खत्म होने से कार्बन भंडारण कम होता है और कई प्रजातियों का प्राकृतिक आवास भी नष्ट हो जाता है।
पशुपालन से बढ़ रहा पर्यावरणीय दबाव
शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि कौन से खाद्य उत्पाद पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसमें मवेशी पालन यानी गायों से जुड़े उत्पाद सबसे बड़े कारणों में सामने आए।
बीफ और दूध उत्पादन से दुनिया भर में खाद्य उत्पादन के कारण होने वाली जैव विविधता हानि का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा जुड़ा है। वहीं, कृषि से होने वाले प्राकृतिक कार्बन भंडारण के नुकसान में इनका योगदान लगभग 29 प्रतिशत है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, मवेशियों को पालने के लिए बहुत अधिक जमीन की जरूरत होती है। उन्हें चराने के लिए जमीन चाहिए और उनके चारे के लिए भी बड़ी मात्रा में खेती करनी पड़ती है। इसी कारण पशु आधारित भोजन का पर्यावरण पर प्रभाव अधिक होता है।
छोटे बदलावों से मिल सकते हैं बड़े फायदे
वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हर जगह एक जैसी नीति अपनाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि सबसे ज्यादा नुकसान कुछ खास क्षेत्रों और उत्पादों से हो रहा है, इसलिए वहां विशेष ध्यान देकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
खेती के बेहतर तरीकों को अपनाना, जंगलों और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करना और ऐसे खाद्य विकल्पों को बढ़ावा देना जिनमें कम जमीन की जरूरत हो, पर्यावरण संरक्षण में मदद कर सकता है।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि जिन इलाकों में आज सबसे ज्यादा नुकसान दिखाई दे रहा है, वही क्षेत्र भविष्य में सुधार के सबसे बड़े अवसर भी दे सकते हैं। यदि इन इलाकों को दोबारा प्राकृतिक रूप दिया जाए तो जलवायु और जैव विविधता दोनों को फायदा मिल सकता है।
कृषि केवल पर्यावरण की समस्या का कारण नहीं है, बल्कि समाधान का हिस्सा भी बन सकती है। सही योजनाओं और जिम्मेदार खेती के जरिए भोजन की जरूरत पूरी करते हुए प्रकृति की रक्षा करना संभव है।