उत्तराखंड के जंगलों में खोजी गई मकड़ी की नई अनोखी प्रजाति 'हिमालयन हैप्पी-फेस स्पाइडर'; फोटो: आशीर्वाद त्रिपाठी और देवी प्रियदर्शिनी  
वन्य जीव एवं जैव विविधता

उत्तराखंड: हिमालय की वादियों में मिली ‘मुस्कुराने वाली’ दुर्लभ मकड़ी, जानें क्यों है खास

भारतीय वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य में ‘हिमालयन हैप्पी-फेस स्पाइडर’ की नई प्रजाति खोजी है, जिसकी पीठ पर लाल मुस्कुराते चेहरे जैसा अनोखा पैटर्न बना हुआ है।

Lalit Maurya

  • उत्तराखंड के केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य में भारतीय वैज्ञानिकों ने ‘हिमालयन हैप्पी-फेस स्पाइडर’ नाम की एक नई और बेहद अनोखी मकड़ी की प्रजाति खोजी है।

  • इस मकड़ी की पीठ पर लाल रंग की मुस्कुराते चेहरे जैसी आकृति बनी हुई है, जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।

  • अब तक ऐसी ‘हैप्पी-फेस’ मकड़ी केवल हवाई द्वीपों में पाई जाती थी, लेकिन डीएनए जांच में यह नई प्रजाति उससे करीब 8.5 फीसदी आनुवंशिक रूप से अलग निकली। इससे पुष्टि हुई कि यह एशिया में स्वतंत्र रूप से विकसित हुई एक अलग प्रजाति है।

  • फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के आशीर्वाद त्रिपाठी और रीजनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की शोधकर्ता देवी प्रियदर्शिनी द्वारा की गई यह खोज संयोग से हुई, जब वे मूल रूप से चींटियों पर अध्ययन कर रहे थे।

  • शोध में मकड़ी के 32 अलग-अलग रंगों और पैटर्न वाली किस्मों की पहचान की गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके शरीर पर बने मुस्कुराते पैटर्न जंगल में जीवित रहने में मदद कर सकते हैं, हालांकि उनका असली उद्देश्य अब भी रहस्य बना हुआ है। यह खोज हिमालय की समृद्ध लेकिन अब तक अनछुई जैव विविधता की ओर एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।

हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी मकड़ी खोजी है, जिसकी पीठ पर लाल रंग की मुस्कुराती आकृति बनी हुई है। रंग-बिरंगी, बेहद छोटी और अपनी पीठ पर चटक लाल रंग की 'मुस्कान' बिखेरती हुई 'हैप्पी-फेस' मकड़ी दुनिया के सबसे अनोखे जीवों में से एक है।

अब तक माना जाता था कि इस तरह की मकड़ी सिर्फ अमेरिका के हवाई द्वीपों पर ही पाई जाती है। लेकिन अब भारत में उत्तराखंड के जंगलों में इस नई अनोखी प्रजाति के मिलने से वैज्ञानिक भी हैरान हैं।

वैज्ञानिकों ने हिमालय पर्वतमाला को सम्मान देने के लिए इस प्रजाति का नाम 'थेरिडियन हिमालयना' यानी हिमालयन हैप्पी-फेस स्पाइडर रखा है। यह प्रजाति समुद्र तल से 2,000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर पाई गई है।

हिमालय में मिली ‘मुस्कुराने वाली’ रहस्यमयी मकड़ी

इस खोज को अंजाम देने वाले वैज्ञानिकों में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े आशीर्वाद त्रिपाठी और रीजनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की शोधकर्ता देवी प्रियदर्शिनी शामिल थी।

दिलचस्प बात यह है कि यह खोज पूरी तरह संयोग से हुई। वैज्ञानिक मूल रूप से चींटियों पर अध्ययन कर रहे थे, लेकिन सर्वे के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों से मिली मकड़ियों की तस्वीरों ने शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

अध्ययन से जुड़ी वैज्ञानिक देवी प्रियदर्शिनी ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि "मेरे साथी आशीर्वाद ऊंचे इलाकों से मुझे मकड़ियों की तस्वीरें पहचान के लिए भेजते रहते थे। एक दिन उन्होंने 'डैफ्निफाइलम' पौधे की पत्ती के नीचे बैठी एक मकड़ी की फोटो भेजी। उसे देखते ही मैं हैरान रह गई! मैंने अपनी पढ़ाई के दौरान हवाई द्वीप की मशहूर मुस्कुराने वाली मकड़ी के बारे में पढ़ा था।“

“उसकी शक्ल इतनी मिलती-जुलती थी कि मुझे तुरंत समझ आ गया कि हमें एक बहुत बड़ा 'जैकपॉट' मिल गया है। मैंने उनसे कहा कि वे इसके जितने भी अलग-अलग रूप मिलें, सब भेजें। इसके बाद अक्टूबर 2023 से अगले कुछ महीनों में इस नई प्रजाति की पुष्टि हुई।"

32 रंग, अलग-अलग पैटर्न और एक अनोखी प्रजाति

उन्होंने कहा, “इस खोज ने हमें हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली दूसरी बहुरूपी (पॉलीमॉर्फिक) प्रजातियों को समझने और खोजने का नया रास्ता दिखाया है।“आशीर्वाद ने भी कहा कि अगर बड़े पैमाने पर सर्वे किए जाएं, तो इस प्रजाति के और भी अलग-अलग रूप सामने आ सकते हैं।

इस प्रजाति के बारे में विस्तृत जानकारी प्रतिष्ठित ओपन-एक्सेस जर्नल इवोल्यूशनरी सिस्टेमैटिक्स में प्रकाशित हुई है।

इस अध्ययन में मकड़ी की 32 अलग-अलग रंगों और पैटर्न वाली किस्मों (मॉर्फ्स) की पहचान हुई है। ये नमूने उत्तराखंड के केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य में तीन स्थानों मक्कू, ताला और मंडल से जुटाए गए थे।

डीएनए जांच से पता चला है कि यह मकड़ी हवाई की हैप्पी-फेस मकड़ी से करीब 8.5 फीसदी आनुवंशिक रूप से अलग है। इससे पुष्टि हुई कि यह एशिया में स्वतंत्र रूप से विकसित हुई एक अलग प्रजाति है।

वैज्ञानिकों का इसकी पीठ पर दिखाई देने वाले मुस्कुराते चेहरे के बारे में कहना है कि शरीर पर बने रंगीन और मुस्कुराते पैटर्न शायद इसे जंगल में जीवित रहने में मदद करते हैं, लेकिन उनका असली उद्देश्य अभी भी रहस्य बना हुआ है।

क्या है मकड़ी की पीठ पर बनी ‘मुस्कान’ का राज?

प्रियदर्शिनी ने कहा, “इस प्रजाति में इतने अलग-अलग रूप और रंग क्यों दिखाई देते हैं, इसकी वजह काफी जटिल और अनोखी है।“ आशीर्वाद ने बताया कि इस मकड़ी के आसपास कई छोटे जीव मौजूद थे, जिनके शरीर पर भी मिलते-जुलते रंग और पैटर्न दिखाई दे रहे थे।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि ये मकड़ियां अक्सर अदरक प्रजाति के पौधों पर पाई जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि हवाई की हैप्पी-फेस मकड़ियां भी ऐसे ही पौधों के आसपास रहती हैं। चूंकि अदरक हवाई का मूल पौधा नहीं है, इसलिए वैज्ञानिक इस समानता को लेकर काफी उत्साहित हैं और इसके विकासवादी संबंध को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

सच कहें तो हिमालय की वादियों में मिली यह ‘मुस्कुराने वाली’ मकड़ी केवल एक नई प्रजाति की खोज नहीं, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि प्रकृति अब भी अपने भीतर अनगिनत रहस्य समेटे हुए है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय के दुर्गम जंगलों में ऐसी कई अनदेखी और अद्भुत प्रजातियां अभी भी छिपी हो सकती हैं, जो जैव विविधता और विकासवाद की हमारी समझ को पूरी तरह बदल सकती हैं।