डियर पार्क में हिरणों का झुंड; फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स 
वन्य जीव एवं जैव विविधता

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हौज खास डियर पार्क से वन्यजीव अभ्यारण्यों में शिफ्ट किए जाएंगें हिरण

सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि डियर पार्क में अधिकतम 38 हिरण ही रखे जा सकते हैं। शेष हिरणों को उपयुक्त वन्यजीव अभयारण्यों में शिफ्ट किया जाएगा

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसले में दिल्ली के हौज खास स्थित ए एन झा डियर पार्क से हिरणों को समयबद्ध तरीके से वन्यजीव अभयारण्यों में भेजने का आदेश दिया।

  • अदालत ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों को पूरी तरह स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि पार्क में अधिकतम 38 हिरण ही रखे जा सकते हैं, जबकि बाकी को उपयुक्त प्राकृतिक आवासों में स्थानांतरित किया जाएगा।

  • कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वन्यजीवों को पिंजरों या सीमित बाड़ों में रखना सामान्य स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

  • न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को भी बरकरार रखा। साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण को हिरणों की देखभाल के लिए बेहतर ढांचा, संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डियर पार्क के “संरक्षित वन” के दर्जे को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

  • अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय को सीईसी द्वारा तैयार वैज्ञानिक दिशानिर्देशों को छह महीने में लागू करने और उन्हें कानूनी दर्जा देने पर विचार करने को कहा। सीईसी की रिपोर्ट में हिरणों की अनियंत्रित बढ़ती संख्या और प्रबंधन में कमी को स्थानांतरण का मुख्य कारण बताया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए दिल्ली के एएनझा डियर पार्क (हौज खास) से हिरणों को समयबद्ध तरीके से दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। यह काम केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की निगरानी में किया जाएगा और इस दौरान सीईसी द्वारा वन्यजीवों के स्थानांतरण (एनिमल ट्रांसलोकेशन) को लेकर बनाए दिशानिर्देशों का पूरी तरह सख्ती से पालन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “यह अनदेखा नहीं किया जा सकता कि हिरण, एक वन्यजीव प्रजाति हैं और उन्हें कानून व पारिस्थितिक कारणों से केवल अत्यंत विशेष और मजबूरी वाली परिस्थितियों को छोड़कर पिंजरों या सीमित बाड़ों में रखना उचित नहीं है।“

हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

इसके साथ ही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें हिरणों को दिल्ली से बाहर शिफ्ट करने और कुछ हिरणों को ए एन झा डियर पार्क में रखने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की सभी सिफारिशों को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि डियर पार्क में अधिकतम 38 हिरण ही रखे जा सकते हैं। शेष हिरणों को उपयुक्त वन्यजीव अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाएगा। अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिया है कि वह हिरणों की देखभाल और प्रबंधन के लिए जरूरी व्यवस्था, ढांचा और प्रशिक्षित स्टाफ की पूरी व्यवस्था को मजबूत और बेहतर बनाए।

साथ ही डियर पार्क को वन क्षेत्र के रूप में संरक्षित रखना अनिवार्य होगा, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही “संरक्षित वन” घोषित है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इसे हमेशा ऐसे ही बनाए रखा जाना चाहिए।

अदालत ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भविष्य में वन्यजीवों के स्थानांतरण के लिए सीईसी द्वारा तैयार व्यापक दिशानिर्देशों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इन दिशानिर्देशों में वैज्ञानिक प्रक्रिया, पहचान और टैगिंग, कानूनी सुरक्षा उपाय, परिवहन और पशु चिकित्सा संबंधी आवश्यकताएं, पारिस्थितिक उपयुक्तता का आकलन और स्थानांतरण के बाद निगरानी जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। ये सभी प्रावधान मौजूदा कानूनों और आईयूसीएन के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं।

पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक बदलावों के साथ छह महीने के भीतर इन दिशानिर्देशों को लागू करने को कहा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि इन दिशानिर्देशों को कानूनी दर्जा दिया जाना चाहिए। साथ ही, इस आदेश के पालन संबंधी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी।

सीईसी रिपोर्ट पर कोर्ट की सहमति

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी को निर्देश दिया था कि वह डियर पार्क का ऑन-ग्राउंड सर्वे करे और एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे। इस रिपोर्ट में पार्क में हिरणों की मौजूदा आबादी, जगह, चारे की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सुविधाएं, बाड़ों की स्थिति और डियर पार्क की इकोलॉजिकल कैपेसिटी की जानकारी शामिल होनी चाहिए।

साथ ही रिपोर्ट में यह आकलन भी शामिल चाहिए कि पार्क में कितने हिरणों को सुरक्षित मानवीय तरीके से रखा जा सकता है और कितने हिरण अतिरिक्त हैं, जिन्हें दूसरे स्थानों पर भेजे जाने की आवश्यकता है।

सीईसी को रिलीज साइट्स राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का भी निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 6 मार्च 2026 को समिति ने वन्यजीवों को दूसरी जगह भेजने की मानक प्रक्रिया सहित अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी।

बढ़ती आबादी बनी बड़ी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीईसी रिपोर्ट स्पष्ट रूप से हिरणों को उपयुक्त वन्यजीव अभयारण्यों में भेजने के फैसले का समर्थन करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हिरणों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ गई है, क्योंकि जन्म नियंत्रण और नसबंदी के उपाय प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए गए।

यह भी सामने आया कि डियर पार्क को “मिनी जू” का दर्जा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) पहले ही रद्द कर चुका है, क्योंकि नियमों का लगातार उल्लंघन हुआ था। साथ ही 2021 में पार्क का लाइसेंस समाप्त हो चुका है। ऐसी स्थिति में हिरणों को पार्क में रखना पर्यावरण और कानूनी तौर पर उचित नहीं है, क्योंकि उनके सही प्रबंधन के लिए कोई मान्यता प्राप्त व्यवस्था मौजूद नहीं है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को होगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर जारी होने वाली रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि वन्यजीवों का भविष्य पिंजरों में नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षित है।