प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
वन्य जीव एवं जैव विविधता

18 वर्षों से अधर में सरिस्का का ईको सेंसिटिव जोन, बेतरतीब होटलों ने बढ़ाया संकट

संयुक्त समिति के मुताबिक सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर के दायरे में कुल 62 होटल और रिसॉर्ट चल रहे हैं

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के 18 वर्ष बाद भी सरिस्का टाइगर रिजर्व का ईको सेंसिटिव जोन अंतिम रूप नहीं ले पाया है।

  • संयुक्त समिति की रिपोर्ट में बेतरतीब होटलों, कमजोर निगरानी और अधूरी प्रक्रियाओं को गंभीर खतरा बताया गया है।

  • संयुक्त समिति के मुताबिक सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर के दायरे में कुल 62 होटल और रिसॉर्ट चल रहे हैं।

  • इनमें से 12 ने जमीन ट्रांसफर कराई है। वहीं चार के पास तहसीलदार द्वारा दी गई एनओसी है, जबकि 46 जमीन के बिना ट्रांसफर के चल रहे हैं।

  • राज्य सरकार कानूनी प्रक्रिया में है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण के लिए त्वरित और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के 18 साल पुराने निर्देशों के बावजूद सरिस्का टाइगर रिजर्व का ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में 25 नवंबर 2025 को दाखिल संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, ईको सेंसिटिव जोन की ड्राफ्ट अधिसूचना 2 नवंबर 2023 को जारी हुई थी, हालांकि अंतिम अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई है।

राजस्थान सरकार ने शुरू की प्रक्रिया, पर काम अधूरा

रिपोर्ट से पता चला है कि राजस्थान सरकार ने सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट में बदलाव की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक विधिवत बनाई समिति इस बारे में जारी प्रस्ताव की जांच कर उसे मंजूरी दे चुकी है।

अब सरकार इस मामले से जुड़े सभी लोगों की आपत्तियां सुनने और उनकी जांच की प्रक्रिया में है। इसके बाद ही प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चल रही है। रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि फिलहाल महज एक किलोमीटर के दायरे की ही जानकारी उपलब्ध है।

बाकी क्षेत्र के लिए जिला प्रशासन, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग को मिलकर विस्तृत सर्वेक्षण करना होगा।

संयुक्त समिति के मुताबिक सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर के दायरे में कुल 62 होटल और रिसॉर्ट चल रहे हैं। इनमें से 12 ने जमीन ट्रांसफर कराई है। वहीं चार के पास तहसीलदार द्वारा दी गई एनओसी है, जबकि 46 जमीन के बिना ट्रांसफर के चल रहे हैं।

इनमें से छह होटल तो अभयारण्य की सीमा के भीतर हैं, जिन्हें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की मंजूरी आवश्यक है, लेकिन किसी ने भी यह अनुमति नहीं ली है। प्रदूषण नियंत्रण के मामले में भी स्थिति चिंताजनक है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में पाए गए इन्हीं 62 होटलों में से महज 17 के पास संचालन के लिए मान्य सहमति (सीटीओ) है, वहीं दो ने इसे रिन्यू करने के लिए आवेदन किया है।

बाकी 43 होटलों को बोर्ड ने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

वन्यजीवों के साथ बढ़ रहा संघर्ष का खतरा

याचिकाकर्ता देवीदास खत्री का इस मामले में कहना है कि पिछले 10 से 15 वर्षों में सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास बड़ी संख्या में होटल और रिसॉर्ट खुल गए हैं। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। उनका यह भी कहना है कि अधिकांश होटल और रिसॉर्ट राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमति लिए बिना ही बनाए गए हैं।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि 4 दिसंबर 2006 सुप्रीम कोर्ट ने ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का निर्देश दिया था। हालांकि 18 साल बाद भी इस बारे में अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसके साथ ही रिजर्व की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अधूरी प्रक्रियाएं, बेतरतीब निर्माण और कमजोर निगरानी सरिस्का टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं। अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार ईको सेंसिटिव जोन और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट की प्रक्रिया को कितनी जल्दी और सख्ती से पूरा करती है, ताकि देश के प्रमुख बाघ आवासों में से एक को वास्तविक रूप से सुरक्षा मिल सके।