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मौसम

दक्षिण-पूर्व एशिया पर मौसम की दोहरी मार: 'अल नीनो' की वापसी से बढ़ेगी गर्मी, कमजोर रह सकता है मानसून

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अल नीनो के मजबूत होने से दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, कमजोर मानसून और सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

Lalit Maurya

  • दक्षिण-पूर्व एशिया एक बार फिर अल नीनो के बढ़ते प्रभाव की चपेट में आता दिख रहा है। आसियान की ताजा मौसम रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर में तेजी से बदलती परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि आने वाले महीनों में क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी और कई देशों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है।

  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो सक्रिय हो सकता है और वर्ष के अंत तक इसके और मजबूत होने की आशंका है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी फिलीपींस, ब्रुनेई, सिंगापुर और समुद्री दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े हिस्सों में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है, जबकि मध्य थाईलैंड, कंबोडिया और दक्षिणी वियतनाम जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में पानी का संकट गहरा सकता है।

  • इसके साथ ही, पूरे क्षेत्र में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

  • विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौसम का यह बदलता मिजाज जल संसाधनों, कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और बिजली की मांग पर गंभीर दबाव डाल सकता है। ऐसे में आने वाले महीने दक्षिण-पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों के जीवन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।

दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकांश हिस्सों में आने वाले महीनों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की आशंका है, जबकि कई देशों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस साल क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को भीषण गर्मी और सूखे जैसी गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) द्वारा जारी ताजा मौसम रिपोर्ट के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तेजी से बदलती परिस्थितियां इस बात का साफ संकेत दे रही हैं कि दुनिया एक बार फिर खतरनाक ‘अल नीनो' के प्रभाव की चपेट में आ रही है। इसके चलते जहां अधिकांश देशों में तापमान सामान्य से कहीं अधिक रह सकता है, वहीं कई इलाकों में बारिश में भारी कमी देखी जा सकती है।

बदल रहा है कुदरत का मिजाज

रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि फिलीपींस के दक्षिणी हिस्सों, ब्रुनेई, सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े समुद्री भाग (मैरीटाइम कॉन्टिनेंट) में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया के मुख्य भूमि वाले इलाकों में कहीं कम तो कहीं अधिक बारिश देखने को मिल सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अप्रैल से मई के महीनों में समुद्र की सतह का तापमान भले ही तटस्थ रहा हो, लेकिन प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्सों में लगातार हो रही गर्माहट और आसमान में बादलों की घटती तादाद यह बताती है कि 'अल नीनो' के पैर पसारने की जमीन पूरी तरह तैयार हो चुकी है। वैश्विक जलवायु मॉडलों का अनुमान है कि जून से अगस्त के बीच एक मध्यम स्तर का अल नीनो पूरी तरह सक्रिय हो सकता है।  

चिंता की बात यह है कि साल के अंतिम महीनों में इसके और अधिक मजबूत तथा आक्रामक होने की आशंका है। दूसरी ओर, हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) फिलहाल तटस्थ स्थिति में है।

हालांकि साथ ही वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि बहुत शक्तिशाली अल नीनो भी विकसित होता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि प्रभाव हमेशा अधिक गंभीर होंगे, लेकिन अल नीनो से जुड़े सामान्य प्रभावों के दिखने की आशंका बढ़ सकती है।

जल, खेती, खाद्य सुरक्षा पर बढ़ सकता है संकट

सरल शब्दों में कहें तो अल नीनो के इस बेहद मजबूत रूप का मतलब यह नहीं कि कोई अप्रत्याशित आपदा आएगी, बल्कि इसका सीधा अर्थ यह है कि क्षेत्र में भीषण गर्मी और कम बारिश का जो पारंपरिक मिजाज रहा है, उसके सच होने की आशंका अब सौ फीसदी के करीब पहुंच चुकी है।

इस बदलते मिजाज का सबसे बड़ा असर मानसून और बारिश के वितरण पर पड़ने जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि जून से अगस्त के दौरान इस समुद्री क्षेत्र में चक्रवातों और समुद्री तूफानों की आवृत्ति सामान्य या उससे भी कम रहने की उम्मीद है, लेकिन बारिश की कमी इस राहत को चिंता में बदल सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकांश हिस्सों में अमूमन सामान्य समय के आसपास हुआ है या होने की उम्मीद है। हालांकि वियतनाम और लाओस में मानसून ने तय वक्त से देरी से दस्तक दी है। आने वाले दिनों में म्यांमार के तटीय इलाकों, उत्तरी लाओस और थाईलैंड के कुछ हिस्सों में तो अच्छी या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, लेकिन मुख्य भूमि के एक बड़े हिस्से के लिए पूर्वानुमान अच्छे नहीं हैं।

कमजोर पड़ सकता है मानसून, कई देशों में घट सकती है बारिश

वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि बारिश के मामले में तस्वीर मिली-जुली रहने वाली है। दक्षिणी फिलीपींस, ब्रुनेई और सिंगापुर समेत समुद्री दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। वहीं मलेशिया के भी अधिकांश इलाकों में सामान्य या उससे थोड़ा कम बारिश हो सकती है।

फिलीपींस के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, मध्य थाईलैंड, मध्य कंबोडिया और दक्षिणी वियतनाम जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि यहां मानसून का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।

चिलचिलाती गर्मी के लिए रहे तैयार

पानी की इस कमी के बीच आसमान से बरसती आग आग में घी का काम करेगी। तापमान के लिहाज से दक्षिण-पूर्व एशिया का अधिकांश हिस्सा सामान्य से अधिक गर्म रहने वाला है। हालांकि उत्तरी वियतनाम, म्यांमार के कुछ हिस्सों और दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों में तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक या सामान्य के आसपास रह सकता है।

इस पूर्वानुमान में 'सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक तापमान' का अर्थ है कि तापमान के सामान्य से अधिक रहने की 50 फीसदी, सामान्य रहने की 40 फीसदी और सामान्य से कम रहने की 10 फीसदी संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो मजबूत होता है, तो क्षेत्र में गर्मी और सूखे की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे जल संसाधनों, कृषि और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ने का खतरा रहेगा। ऐसे में मौसम का यह मिजाज कृषि उत्पादन, जल प्रबंधन और बिजली की मांग को लेकर सरकारों की परीक्षा लेगा। आने वाले महीने दक्षिण-पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं, जिससे निपटने के लिए अभी से व्यापक रणनीतियां बनाने की जरूरत है।