26 जनवरी से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी बढ़ेगी।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी से तापमान गिरा, पर्यटन बढ़ा, लेकिन बिजली और यातायात प्रभावित हुए।
हिमाचल प्रदेश में तीन महीने बाद हुई बारिश किसानों, सेब उत्पादकों और गेहूं की फसल के लिए बड़ी राहत बनी।
दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद ठंड बढ़ी, तापमान 5-6 डिग्री गिरने की संभावना, तेज हवाएं और हल्का कोहरा रहेगा।
उत्तर अरब सागर और तटीय इलाकों में 60 किमी प्रति घंटे तक तूफानी हवाएं, मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह।
जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में उत्तर भारत और आसपास के क्षेत्रों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ऊपरी वायुमंडल में तेज हवाएं चल रही हैं, जिन्हें उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम कहा जाता है। इन हवाओं की गति लगभग 135 नॉट है और ये जमीन से लगभग 12.6 किमी की ऊंचाई पर सक्रिय हैं। इसी कारण उत्तर भारत में मौसम बार-बार बदल रहा है।
मौसम विभाग के द्वारा आज, 24 जनवरी, 2026 को जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि 26 जनवरी से एक बार फिर एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। यह उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बदलाव कर सकता है। इसके कारण पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है।
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी
उत्तराखंड में 23 जनवरी, 2026 से मौसम ने अचानक करवट ली। पहाड़ों में बर्फबारी शुरू हो गई, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश हुई। इस वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मुक्तेश्वर में न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बर्फबारी का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ी क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला है।
हिमाचल प्रदेश को मिली राहत
हिमाचल प्रदेश पिछले तीन महीनों से सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहा था। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों और सेब उत्पादकों पर पड़ा था। लेकिन 23 जनवरी से राज्य के कई इलाकों में बारिश और बर्फबारी शुरू हुई, जो किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
यह बारिश गेहूं की फसल और सेब के बागानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जा रही है। पर्यटन उद्योग को भी इससे राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य के कुछ हिस्सों में आज भी बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इसके साथ ही, कुछ इलाकों में शीतलहर चलने का भी अंदेशा जताया गया है।
जम्मू और कश्मीर में भारी बर्फबारी
जम्मू और कश्मीर में लगातार हो रही बर्फबारी से पहाड़ और घाटियां पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर से ढक गई हैं। इससे राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मैदानी इलाकों में हो रही बारिश ने सूखे जैसी स्थिति से राहत दी है। यह मौसम सेब उत्पादकों और गेहूं की खेती के लिए बहुत फायदेमंद माना जा रहा है। माता वैष्णो देवी मंदिर क्षेत्र में भी भारी बर्फबारी दर्ज की गई है।
हालांकि लगातार बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण कुछ समस्याएं भी सामने आई हैं। कई जगहों पर लोग फंस गए और बिजली आपूर्ति बाधित हुई। भारी बर्फबारी के बाद प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है और पांच जिलों में हिमस्खलन (एवलांच) की चेतावनी जारी की गई है।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी ठंड
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश के बाद ठंड और बढ़ गई है। आज दिल्ली में आसमान में बादल छाए रहेंगे। सुबह के समय हल्का कोहरा देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में पांच से छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। 27 से 29 जनवरी के बीच तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रह सकता है।
कहां छाएगा घना कोहरा?
मौसम विभाग ने बताया है कि हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ इलाकों में घना कोहरा छा सकता है। इससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
तापमान में उतार-चढ़ाव
उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान तीन से पांच डिग्री तक गिर सकता है। मध्य भारत में अगले तीन दिनों तक तापमान में दो से चार डिग्री की गिरावट आ सकती है।
महाराष्ट्र और गुजरात में भी तापमान में हल्की गिरावट के बाद धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने का पूर्वानुमान है। देश के बाकी हिस्सों में तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होने की संभावना है।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, 23 जनवरी, 2026 को कर्नाटक के कारवार में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के लुधियाना में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
समुद्री इलाकों में तूफानी हवाओं की चेतावनी
मौसम विभाग ने कहा है कि उत्तरी पाकिस्तान और उसके आस-पास के इलाकों में बना कम दबाव का क्षेत्र और उससे जुड़ा चक्रवाती प्रसार ऊंचाई के साथ उत्तर-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। साथ ही चक्रवाती प्रसार के साथ उत्तर-पूर्वी अरब सागर तक, समुद्र तल से 1.5 से 5.8 किमी के बीच एक हवाओं का ट्रफ बना हुआ है।
उपरोक्त मौसमी गतिविधियों के चलते उत्तर अरब सागर, गुजरात, ओमान तट, बंगाल की खाड़ी, तमिलनाडु और श्रीलंका के तटीय इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं में और इजाफा होकर 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में तब्दील होने के आसार हैं। इन गतिविधियों को देखते हुए विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, यह मौसम किसानों, बागवानों और पर्यटन उद्योग के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन साथ ही ठंड, कोहरा, बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण सावधानी बरतना भी जरूरी है। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी जाती है।