प्रतीकात्मक तस्वीर: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट  
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पानी या जहर? सुरक्षित पेयजल से महरूम हैं दुनिया का हर चौथा इंसान: डब्ल्यूएचओ

भले ही हम विकास की कितनी भी बड़ी-बड़ी बाते करें लेकिन आंकड़ों का कड़वा सच यही है कि दुनिया में आज भी 210 करोड़ लोगों को पीने का सुरक्षित पानी नसीब नहीं है

Lalit Maurya

  • दुनिया में स्वच्छ पेयजल का संकट अब भी गहराता जा रहा है। डब्ल्यूएचओ की नई रिपोर्ट के अनुसार, हर चौथा व्यक्ति सुरक्षित पेयजल से वंचित है और 10.6 करोड़ लोग सीधे सतही जल स्रोतों पर निर्भर हैं।

  • इस चुनौती से निपटने के लिए संगठन ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें दूषित पानी का उपचार करने के बजाय पूरी जल आपूर्ति प्रणाली में जोखिमों की पहले से पहचान कर उन्हें रोकने की रणनीति अपनाने की सिफारिश की गई है।

  • डब्ल्यूएचओ का कहना है कि पीने के पानी में बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों से होने वाला प्रदूषण आज भी स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक है। बदलते वक्त के साथ पानी से फैलने वाले कई नए और खतरनाक वायरस सामने आए हैं, जिन्हें लेकर स्वास्थ्य संगठन ने एक विशेष फैक्ट-शीट जारी की है ताकि दुनिया भर के अस्पताल और प्रशासनिक अमले पहले से अलर्ट रह सकें।

  • रिपोर्ट में सरकारों से निगरानी तंत्र मजबूत करने, छोटे जल स्रोतों की नियमित जांच करने और उभरते रासायनिक व जैविक प्रदूषकों पर कड़ी नजर रखने का आह्वान किया गया है।

  • भविष्य की इस तैयारी में 'पीएफएएस' (फॉरएवर केमिकल्स) जैसे बेहद जिद्दी और कभी नष्ट न होने वाले जहरीले रसायनों पर नकेल कसी जाएगी।

पानी जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत है, लेकिन दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए आज भी साफ-सुरक्षित पेयजल एक सपना बना हुआ है। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पीने के पानी की गुणवत्ता संबंधी दिशा-निर्देशों का नया और तीसरा अपडेट जारी किया है।

इसका उद्देश्य देशों को ऐसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय उपलब्ध कराना है, जिनकी मदद से हर व्यक्ति तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जा सके। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भले ही तकनीक के मामले में आगे बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी जरूरत यानी साफ पानी का संकट अब भी गंभीर बना हुआ है।

आंकड़ों में छिपा जल संकट

आंकड़ों का कड़वा सच यह है कि दुनिया में आज भी 210 करोड़ लोगों को पीने का सुरक्षित पानी नसीब नहीं है। चिंता की बात है कि इनमें से 10.6 करोड़ लोग ऐसे हैं जो आज भी नदियों, झीलों या तालाबों का दूषित पानी बिना साफ किए सीधे पीने को मजबूर हैं।

इस गंभीर संकट पर चिंता जताते हुए डब्ल्यूएचओ के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर रुडिगर क्रेच ने कहा, "स्वच्छ पेयजल केवल बेहतर स्वास्थ्य की जरूरत नहीं, बल्कि मानव विकास और गरिमापूर्ण जीवन की बुनियाद है। यह मानवाधिकार का भी मूल आधार है।"

उन्होंने उम्मीद जताई कि पेयजल गुणवत्ता संबंधी नए दिशा-निर्देश दुनिया भर के देशों को अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेंगे, ताकि पानी लोगों तक पहुंचने से पहले ही सुरक्षित बनाया जा सके और वह बीमारियों का कारण बनने के बजाय जीवन का आधार बने।

क्या कहते हैं नए दिशा-निर्देश?

डब्ल्यूएचओ की यह नई गाइडलाइंस केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि जमीनी अनुभवों और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर तैयार किया गया एक सुरक्षा कवच है। संगठन ने 'रोकथाम आधारित जोखिम प्रबंधन' को सबसे प्रभावी तरीका बताया है।

इसका मतलब है कि पानी दूषित होने के बाद उसे साफ करने के बजाय, जल स्रोत से लेकर लोगों के घर तक पूरी जल आपूर्ति प्रणाली में संभावित खतरों की पहले ही पहचान कर उन्हें रोकने की योजना बनाई जाए। इसके तहत जल प्रणालियों में किसी भी संभावित खतरे या लीकेज की पहचान पहले ही करनी होगी।

वायरस, बैक्टीरिया और खतरनाक रसायनों पर वार

इसके साथ ही, व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए स्वतंत्र निगरानी को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है ताकि मानकों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही या समझौते की गुंजाइश न रहे।

इस पूरी योजना का एक बेहद अहम हिस्सा गांवों और छोटे कस्बों में मौजूद पानी की टंकियों और कुओं की समय-समय पर स्वच्छता जांच करना है, क्योंकि अक्सर छोटे जल स्रोत ही सबसे पहले अनदेखी का शिकार होते हैं। डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में सरकारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

दिशा-निर्देशों में छोटे गांवों और सीमित संसाधनों वाले जल स्रोतों के लिए भी विशेष सलाह दी गई है। इसमें बताया गया है कि नियमित स्वच्छता निरीक्षण के जरिए संभावित खतरों की पहचान, निगरानी और समय पर रखरखाव कैसे किया जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि पीने के पानी में बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों से होने वाला प्रदूषण आज भी स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक है। बदलते वक्त के साथ पानी से फैलने वाले कई नए और खतरनाक वायरस सामने आए हैं, जिन्हें लेकर स्वास्थ्य संगठन ने एक विशेष फैक्ट-शीट जारी की है ताकि दुनिया भर के अस्पताल और प्रशासनिक अमले पहले से अलर्ट रह सकें।

रासायनिक प्रदूषकों पर भी नया मार्गदर्शन

नई गाइडलाइन में पीने के पानी में पाए जाने वाले कुछ रासायनिक प्रदूषकों, विशेष रूप से मच्छर के नियंत्रण में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों, के बारे में भी अपडेटेड जानकारी दी गई है। इससे देशों को पेयजल गुणवत्ता संबंधी नियमों और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

यह अपडेट डब्ल्यूएचओ की चौथी गाइडलाइंस का आखिरी और सबसे सुधरा हिस्सा है। संगठन ने जानकारी दी है कि इन दिशा-निर्देशों के पांचवें संस्करण पर भी काम शुरू हो चुका है।

भविष्य की इस तैयारी में 'पीएफएएस' (फॉरएवर केमिकल्स) जैसे बेहद जिद्दी और कभी नष्ट न होने वाले जहरीले रसायनों पर नकेल कसी जाएगी। इस ऐतिहासिक बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए स्वास्थ्य संगठन जल्द ही दुनिया भर के देशों में तकनीकी ट्रेनिंग, वेबिनार और जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है ताकि इस नीति को हर देश के कानून और हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, घटते जल स्रोतों और तेजी से बढ़ती आबादी के बीच सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

ऐसे में डब्ल्यूएचओ के नए दिशा-निर्देश केवल एक तकनीकी दस्तावेज नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों को बीमारियों से बचाने, भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और हर व्यक्ति के सुरक्षित व स्वच्छ पानी के अधिकार को वास्तविकता में बदलने की दिशा में एक अहम वैश्विक पहल हैं।