सूर्य से निकला विशाल चुंबकीय बादल पृथ्वी की ओर बढ़ते समय 21 प्रतिशत तक फैल गया, वैज्ञानिकों ने इसे दुर्लभ घटना बताया।
नवंबर 2021 के सौर विस्फोट से बने चुंबकीय बादल में असामान्य विस्तार दर्ज हुआ, जिसने वैज्ञानिकों को चौंका दिया।
सोलर ऑर्बिटर और विंड अंतरिक्ष यानों ने एक ही चुंबकीय बादल का अध्ययन कर महत्वपूर्ण बदलावों का खुलासा किया।
सौर हवाओं से टकराने के बाद बादल के भीतर का प्लाज्मा तीन गुना गर्म हुआ और तेजी से फैला।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज अंतरिक्ष मौसम की बेहतर भविष्यवाणी और पृथ्वी की सुरक्षा में मदद करेगी।
वैज्ञानिकों ने सूर्य से निकले एक विशाल चुंबकीय बादल में पृथ्वी की ओर बढ़ते समय हुए असाधारण विस्तार का पता लगाया है। यह खोज अंतरिक्ष मौसम को समझने और भविष्य में आने वाले सौर तूफानों की बेहतर भविष्यवाणी करने में मदद कर सकती है। इस अध्ययन का नेतृत्व अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के शोधकर्ताओं ने किया है।
रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, सूर्य से निकले इस चुंबकीय बादल का आकार पृथ्वी की ओर आते समय बहुत तेजी से बढ़ गया। वैज्ञानिकों ने इस घटना को "सुपर एक्सपैंशन" यानी अत्यधिक विस्तार का नाम दिया है। यह विस्तार सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं अधिक था।
क्या होता है चुंबकीय बादल?
सूर्य पर समय-समय पर बड़े विस्फोट होते हैं, जिन्हें कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) कहा जाता है। इन विस्फोटों के दौरान अत्यधिक गर्म और चुंबकीय गुणों वाला प्लाज्मा अंतरिक्ष में फैल जाता है। इसी प्रक्रिया से चुंबकीय बादल बनते हैं।
जब ऐसे बादल पृथ्वी की दिशा में आते हैं, तो वे उपग्रहों, संचार प्रणालियों, जीपीएस सेवाओं और बिजली ग्रिडों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिक इनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं।
नवंबर 2021 की घटना का अध्ययन
यह चुंबकीय बादल चार और पांच नवंबर 2021 के दौरान सूर्य पर हुए एक बड़े विस्फोट से बना था। पृथ्वी की ओर बढ़ते हुए इस बादल को दो अंतरिक्ष यानों ने अलग-अलग स्थानों से रिकॉर्ड किया।
पहले इसे सोलर ऑर्बिटर नामक अंतरिक्ष यान ने देखा, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच लगभग 0.84 खगोलीय इकाई (एयू) की दूरी पर था। इसके बाद विंड अंतरिक्ष यान ने इसे 0.98 एयू की दूरी पर दर्ज किया।
दोनों अंतरिक्ष यान लगभग एक ही सीध में मौजूद थे। यह बहुत दुर्लभ स्थिति थी, जिसके कारण वैज्ञानिकों को एक ही चुंबकीय बादल में समय के साथ होने वाले बदलावों का अध्ययन करने का मौका मिला।
केवल 2.1 करोड़ किलोमीटर में 21 प्रतिशत बढ़ा आकार
शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों अंतरिक्ष यानों के बीच लगभग 2.1 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करने के दौरान चुंबकीय बादल का आकार 21 प्रतिशत बढ़ गया। यह वृद्धि वैज्ञानिकों के लिए आश्चर्यजनक थी।
अध्ययन के अनुसार, यह विस्तार सूर्य से निकलने वाली तेज सौर हवाओं के साथ टकराव के कारण हुआ। शुरुआत में बादल पर दबाव बढ़ा और वह कुछ समय के लिए संकुचित हुआ। लेकिन बाद में उसके भीतर मौजूद प्लाज्मा का तापमान तेजी से बढ़ गया।
वैज्ञानिकों ने पाया कि बादल के अंदर का प्लाज्मा पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक गर्म हो गया था। इसी गर्मी के कारण बादल तेजी से फैलने लगा।
सामान्य से कहीं अधिक रही विस्तार की गति
शोध में बताया गया है कि इस चुंबकीय बादल की विस्तार गति लगभग 192 किलोमीटर प्रति सेकंड थी। आमतौर पर ऐसे बादलों की विस्तार गति 50 से 100 किलोमीटर प्रति सेकंड के बीच रहती है।
इस तरह यह घटना सामान्य मामलों की तुलना में काफी अलग थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतना तेज विस्तार पहले बहुत कम देखा गया है।
वैज्ञानिकों के लिए चौंकाने वाला परिणाम
अध्ययन के दौरान एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। अब तक के कई वैज्ञानिक मॉडल यह बताते थे कि ऐसे बादलों के फैलने पर उनके अंदर का चुंबकीय दबाव बदल जाता है। लेकिन इस मामले में चुंबकीय दबाव लगभग स्थिर बना रहा।
इससे संकेत मिलता है कि चुंबकीय बादलों के व्यवहार को लेकर वैज्ञानिकों की वर्तमान समझ अधूरी हो सकती है। भविष्य में इस विषय पर और अधिक शोध की आवश्यकता होगी।
अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में मिलेगी मदद
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज अंतरिक्ष मौसम के अध्ययन में महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि पृथ्वी की ओर आने वाले चुंबकीय बादल अचानक इतना अधिक फैल सकते हैं, तो उनके प्रभाव का सही अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बेहतर जानकारी मिलने से वैज्ञानिक सौर तूफानों की सटीक भविष्यवाणी कर सकेंगे। इससे उपग्रहों, संचार नेटवर्क, नेविगेशन प्रणालियों और बिजली आपूर्ति को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
यह अध्ययन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और भविष्य में सूर्य तथा पृथ्वी के बीच होने वाली जटिल प्रक्रियाओं को समझने के लिए नए रास्ते खोल सकता है।