एक फरवरी से सूर्य की गतिविधियां तेज हुई, शक्तिशाली सौर ज्वालाओं ने अंतरिक्ष एजेंसियों को सतर्क रहने पर मजबूर किया
तीन और चढ़ फरवरी को निकली एक्स1.5 श्रेणी की सौर ज्वालाएं हाल के महीनों की सबसे तीव्र घटनाओं में शामिल रहीं
सौर ज्वालाओं से निकलने वाली ऊर्जा पृथ्वी के आयनमंडल को प्रभावित कर रेडियो और नेविगेशन सेवाओं में बाधा बन सकती है
इसरो अपने पचास से अधिक सक्रिय उपग्रहों की सुरक्षा के लिए लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है
नासा और नोआ सूर्य की गतिविधियों पर नजर रखकर अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी चेतावनियां और अपडेट जारी कर रहे हैं
हाल के दिनों में सूर्य बहुत अधिक सक्रिय हो गया है। एक फरवरी से सूर्य से लगातार शक्तिशाली सौर ज्वालाएं (सोलर फ्लेयर्स) निकल रही हैं। इन ज्वालाओं के कारण दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिका की नासा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
तीन फरवरी को अमेरिकी समय अनुसार सुबह 9:08 बजे सूर्य से एक बहुत तेज सौर ज्वाला निकली। इसके बाद चार फरवरी को सुबह 7:13 बजे एक और शक्तिशाली ज्वाला देखी गई। नासा ने इसकी पुष्टि अपने स्पेस अलर्ट के जरिए की। इन घटनाओं को नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) ने अपने कैमरों में कैद किया। यह उपग्रह सूर्य पर हर समय नजर रखता है।
अंतरिक्ष एजेंसियों के अनुसार, यह सौर ज्वाला अक्टूबर 2024 के बाद की सबसे तेज ज्वाला है। साथ ही, इसे 1996 के बाद अब तक की 20 सबसे शक्तिशाली सौर ज्वालाओं में शामिल किया गया है।
इस सौर ज्वाला को एक्स1.5 श्रेणी में रखा गया है। सौर ज्वालाओं को उनकी ताकत के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
ए, बी और सी श्रेणी की ज्वालाएं कमजोर होती हैं
एम श्रेणी की ज्वालाएं मध्यम ताकत की होती हैं
एक्स श्रेणी की ज्वालाएं सबसे अधिक शक्तिशाली होती हैं
एक्स के बाद आने वाला अंक उसकी तीव्रता को दर्शाता है। इसलिए एक्स1.5 का मतलब है कि यह बहुत तेज और प्रभावशाली ज्वाला है।
सौर ज्वालाएं सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा की अचानक और तेज विस्फोटक तरंगें होती हैं। इनमें से निकलने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें पृथ्वी तक कुछ ही मिनटों में पहुंच जाती हैं। अच्छी बात यह है कि इनसे पृथ्वी पर मौजूद इंसानों को कोई सीधा खतरा नहीं होता।
लेकिन ये ज्वालाएं पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल, जिसे आयनमंडल कहा जाता है, को प्रभावित कर सकती हैं। इसके कारण कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे:
रेडियो संचार में रुकावट
हवाई जहाजों और जहाजों के नेविगेशन सिस्टम में दिक्कत
उपग्रहों के काम में बाधा
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पास 50 से अधिक सक्रिय उपग्रह हैं। इसरो इन सभी उपग्रहों की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी संभावित नुकसान से बचा जा सके।
नासा ने बताया कि सौर ज्वालाएं केवल संचार ही नहीं, बल्कि बिजली ग्रिड, अंतरिक्ष यानों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी खतरा बन सकती हैं। इसलिए सूर्य की गतिविधियों पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है।
नासा सूर्य और उसके आसपास के अंतरिक्ष वातावरण का अध्ययन करने के लिए कई उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों का उपयोग करता है। ये उपकरण सूर्य की सतह, उसके वातावरण और पृथ्वी के चारों ओर मौजूद कणों और चुंबकीय क्षेत्रों पर नजर रखते हैं।
अगर लोग यह जानना चाहते हैं कि यह अंतरिक्ष मौसम पृथ्वी को कैसे प्रभावित कर सकता है, तो वे नोआ के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर की वेबसाइट देख सकते हैं। यह अमेरिका की सरकारी संस्था है, जो अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी चेतावनियां और जानकारी देती है।
फिलहाल, वैज्ञानिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह घटनाएं हमें यह जरूर याद दिलाती हैं कि सूर्य की गतिविधियां हमारे आधुनिक तकनीकी जीवन को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।