वैज्ञानिकों ने सूर्य के कोरोना में अत्यधिक ऊर्जावान कणों का नया समूह खोजा जो गामा किरणों का स्रोत है। फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स, नासा
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सूर्य के ऊपरी वातावरण में अत्यधिक ऊर्जावान कणों की नई खोज

सोलर फ्लेयर्स की ऊर्जा उपग्रह, संचार, जीपीएस और बिजली ग्रिड को प्रभावित करती है, इसलिए सूर्य के व्यवहार को समझना बेहद जरूरी है।

Dayanidhi

  • वैज्ञानिकों ने सूर्य के कोरोना में अत्यधिक ऊर्जावान कणों का नया समूह खोजा जो गामा किरणों का स्रोत है।

  • नए कण सामान्य फ्लेयर कणों से अलग हैं क्योंकि इनमें कम नहीं बल्कि अधिक ऊर्जा वाले कण होते हैं।

  • ये कण ब्रेम्सस्ट्रालुंग प्रक्रिया से गामा किरणें बनाते हैं जब तेज इलेक्ट्रॉन सूर्य के प्लाज्मा से टकराते हैं।

  • यह खोज सोलर फ्लेयर भौतिकी समझने, कण त्वरण जानने और भविष्य में अंतरिक्ष के मौसम का बेहतर पूर्वानुमान में सहायक है।

वैज्ञानिकों ने सूर्य के ऊपरी वातावरण, जिसे कोरोना कहा जाता है, में अत्यधिक ऊर्जावान कणों का एक नया प्रकार खोजा है। यह खोज सूर्य के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों, यानी सोलर फ्लेयर्स, के दौरान निकलने वाली रहस्यमय गामा किरणों को समझने में मदद करती है। यह शोध नेचर एस्ट्रोनॉमी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और इसे न्यू जर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनजेआईटी) के सेंटर फॉर सोलर-टेरेस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने किया है।

कई सालों से वैज्ञानिक जानते थे कि जब सूर्य पर बहुत बड़ा सोलर फ्लेयर होता है, तो उससे बहुत शक्तिशाली गामा किरणें निकलती हैं। लेकिन यह साफ नहीं था कि ये किरणें ठीक कैसे और कहां बनती हैं। अब इस नई खोज से यह पहेली काफी हद तक सुलझ गई है।

क्या कहती है यह नई खोज?

शोधकर्ताओं ने सूर्य के कोरोना में कणों का एक ऐसा समूह पहचाना है जो सामान्य सोलर फ्लेयर कणों से बिल्कुल अलग है। ये कण लाखों इलेक्ट्रॉन वोल्ट (एमईवी) तक की ऊर्जा रखते हैं और लगभग प्रकाश की गति से चलते हैं। आमतौर पर सोलर फ्लेयर्स में कम ऊर्जा वाले कण ज्यादा और ज्यादा ऊर्जा वाले कण कम होते हैं, लेकिन इस नए समूह में अधिकतर कण बहुत ज्यादा ऊर्जा वाले हैं और कम ऊर्जा वाले कण बहुत कम हैं। यही बात इन्हें खास बनाती है।

कैसे हुई खोज?

यह खोज 10 सितंबर 2017 को हुए एक बेहद शक्तिशाली एक्स 8.2 श्रेणी के सोलर फ्लेयर के अध्ययन से हुई। वैज्ञानिकों ने दो अलग-अलग उपकरणों से मिले आंकड़ों को एक साथ विश्लेषण किया। पहला था नासा का फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप, जिसने गामा किरणों को मापा। दूसरा था एक्सपैंडेड ओवेन्स वैली सोलर एरे (ईओवीएसए), जो कैलिफोर्निया में स्थित एक रेडियो टेलीस्कोप है और माइक्रोवेव तरंगों के जरिए ऊर्जावान कणों की गतिविधि दिखाता है।

जब दोनों उपकरणों के आंकड़ों को मिलाया गया, तो वैज्ञानिकों को सूर्य के कोरोना में एक छोटा सा क्षेत्र मिला, जिसे उन्होंने “रीजन ऑफ इंटरेस्ट 3” या आरओआई-3 कहा। इस क्षेत्र में गामा किरणें और माइक्रोवेव संकेत एक ही जगह से आ रहे थे। इससे यह साफ हो गया कि वहीं पर अत्यधिक ऊर्जावान कण मौजूद हैं।

गामा किरणें कैसे बनती हैं?

वैज्ञानिकों के अनुसार, ये ऊर्जावान कण गामा किरणें ब्रेम्सस्ट्रालुंग नाम की प्रक्रिया से बनाते हैं। इस प्रक्रिया में जब बहुत तेज गति से चलने वाले हल्के आवेशित कण, जैसे इलेक्ट्रॉन, सूर्य के घने प्लाज्मा से टकराते हैं, तो वे बहुत उच्च ऊर्जा की किरणें छोड़ते हैं। यही गामा किरणें होती हैं।

शोध में यह भी दिखाया गया कि इन कणों की ऊर्जा का वितरण सीधे तौर पर देखे गए गामा-रे स्पेक्ट्रम से मेल खाता है। इससे यह पुष्टि हुई कि गामा किरणों का असली स्रोत यही नया कण समूह है।

क्यों अहम है यह खोज?

यह खोज सोलर फ्लेयर भौतिकी को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सूर्य अपने चुंबकीय क्षेत्र में जमा ऊर्जा को अचानक छोड़कर कणों को बहुत अधिक ऊर्जा तक पहुंचा सकता है। यह जानकारी भविष्य में सोलर गतिविधि के बेहतर मॉडल बनाने में सहायक होगी।

बेहतर मॉडल का मतलब है अंतरिक्ष के मौसम की बेहतर भविष्यवाणी। सोलर फ्लेयर्स और उनसे निकलने वाली ऊर्जा पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार प्रणालियों, जीपीएस और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सूर्य के व्यवहार को समझना हमारे रोजमर्रा के जीवन के लिए भी जरूरी है।

आगे क्या?

अब भी कुछ सवाल बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये कण इलेक्ट्रॉन हैं या पॉजिट्रॉन। वैज्ञानिकों का मानना है कि माइक्रोवेव उत्सर्जन की ध्रुवण (पोलराइजेशन) मापकर इसका जवाब मिल सकता है।

जल्द ही ईओवीएसए को ईओवीएसए-15 में अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें नए एंटीना और बेहतर तकनीक जोड़ी जाएगी। इससे वैज्ञानिकों को और भी सटीक आंकड़े मिलेंगे और वे इन रहस्यमय कणों के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी हासिल कर सकेंगे।

सूर्य के कोरोना में अत्यधिक ऊर्जावान कणों की यह नई खोज सोलर विज्ञान में एक बड़ा कदम है। इसने वर्षों पुराने सवालों के जवाब दिए हैं और भविष्य के शोध के लिए नए रास्ते खोले हैं। साथ ही, यह हमें सूर्य की ताकत और उसके पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।