जम्मू कश्मीर में पुंछ नदी के किनारे वर्षों से जमा कचरा (लीगेसी वेस्ट) अब केवल सफाई का नहीं, बल्कि पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली प्रगति चाहिए। ट्रिब्यूनल ने पुंछ नगर निगम से शपथपत्र के जरिए यह बताने को कहा है कि अब तक कितना कचरा हटाया गया, पूरा काम कब तक पूरा होगा और मानसून के दौरान कचरे से निकलने वाले जहरीले लीचेट को नदी में जाने से रोकने के लिए कौन-कौन से ठोस इंतजाम किए गए हैं।
अदालत ने उन आरोपों पर भी जवाब मांगा है, जिनमें कहा गया कि कचरे को हटाने के बजाय वहीं दबाकर जमीन समतल की जा रही है।
साथ ही, उपायुक्त को भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
एनजीटी की सख्ती यह संकेत देती है कि पर्यावरणीय मामलों में अब देरी, अधूरी कार्रवाई और कागजी दावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगली सुनवाई में प्रशासन को केवल रिपोर्ट नहीं, बल्कि नदी और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए किए गए वास्तविक कार्यों का ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा।
जम्मू-कश्मीर में पुंछ नदी के किनारे लम्बे समय से फेंके जा रहे कचरे (लीगेसी वेस्ट) को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।
15 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पुंछ नगर निगम को निर्देश दिया कि वह शपथपत्र के माध्यम से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे। इसमें यह बताया जाए कि अब तक कचरा हटाने की दिशा में क्या प्रगति हुई है? साथ ही यह पूरा कचरा कब तक साफ कर दिया जाएगा और इसके लिए स्पष्ट समय-सीमा क्या होगी।
एनजीटी ने यह भी कहा कि आगामी मानसून के दौरान कचरे से निकलने वाला गन्दा पानी (लीचेट) बहकर नदी में नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए नगर निगम ने कौन-कौन से एहतियाती कदम उठाए हैं, इसकी जानकारी भी शपथपत्र में दी जाए।
तस्वीरों से खुली जमीनी हकीकत
सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने अदालत के समक्ष तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया कि नगर निगम कचरा हटाने के बजाय उसी स्थान पर दबाकर जमीन को समतल कर रहा है। इस पर ट्रिब्यूनल ने नगर निगम को अगली रिपोर्ट में इस आरोप पर भी स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दिया।
एनजीटी ने पुंछ के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) को भी निर्देश दिया कि 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016' के तहत सुधार के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं और इस संबंध में अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर के पुंछ शहर के पास शेर-ए-कश्मीर ब्रिज (एनएच-144ए) से लेकर पुंछ नदी और बेलार नाले के संगम तक अवैध और अवैज्ञानिक रूप से हो रही कचरा डंपिंग और उसके निपटान से जुड़ा है। आरोप है कि यहां न सिर्फ घरेलू बल्कि खतरनाक बायो-मेडिकल कचरा भी खुले में फेंका जा रहा है।
इससे पहले भी सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पाया था कि नदी किनारे बड़ी मात्रा में पुराना कचरा (लीगेसी वेस्ट) पड़ा है। इसे हटाने के लिए ट्रिब्यूनल ने नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया था।
ढुलमुल रवैये पर ट्रिब्यूनल ने जताई नाराजगी
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि कचरा हटाने के लिए 'मेसर्स लॉर्ड शिवा एंटरप्राइजेस' को वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है और जल्द ही काम शुरू होगा। ट्रिब्यूनल ने इस ढुलमुल रवैये पर असंतोष जताया, क्योंकि नगर निगम ने 8 जुलाई की अपनी रिपोर्ट में खुद माना था कि कचरा अब भी वहीं मौजूद है।
हालांकि, निगम ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन के लिए पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है, जिसका आंशिक भुगतान किया जा चुका है। मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन को जवाबदेही के साथ ठोस कदम उठाने होंगे।
ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद अब असली परीक्षा प्रशासन की है। यदि तय समय में लीगेसी वेस्ट नहीं हटाया गया और लीचेट को नदी में जाने से नहीं रोका गया, तो अगली सुनवाई में अधिकारियों को सिर्फ प्रगति रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि अपनी जवाबदेही भी अदालत के सामने साबित करनी होगी।