प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
स्वच्छता

मुंडका में अवैध कचरा डंपिंग पर एमसीडी का बड़ा एक्शन, आरएमसी प्लांट सील: रिपोर्ट

रिपोर्ट में विशेषकर बिजली के तारों सहित अन्य कचरे को खुले में जलाने को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया गया है

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े दो अहम मामलों में प्रशासन और न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है।

  • मुंडका क्षेत्र में फैक्टरी कचरे की अवैध डंपिंग और खुले में जलाने के मामले में एमसीडी ने व्यापक कार्रवाई करते हुए 209 स्थानों से वर्षों से जमा कचरा हटाया, रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट को सील किया और क्षेत्र में विशेष निगरानी दल तैनात किए हैं।

  • रिपोर्ट में खासतौर पर बिजली के तारों सहित अन्य कचरे को खुले में जलाने को वायु प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।

  • दूसरी ओर, पटाखों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या कुछ विशेष प्रकार के ग्रीन पटाखों के लिए शोर संबंधी नियमों में वैज्ञानिक आधार पर सीमित छूट दी जा सकती है।

  • ये दोनों घटनाक्रम संकेत देते हैं कि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण और पर्यावरणीय कानूनों के प्रभावी पालन की दिशा में निगरानी तथा जवाबदेही लगातार मजबूत की जा रही है।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) मुंडका और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने और कचरे को अवैध रूप से फेंकने की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नगर निगम ने 23 जुलाई को दायर अपनी रिपोर्ट में यह कहा है। एमसीडी ने इस रिपोर्ट में मुंडका क्षेत्र में औद्योगिक कचरे और प्लास्टिक के खुले में फेंके और जलाए जाने के मामले में की गई व्यापक कार्रवाई की जानकारी दी है।

यह मामला दिल्ली के मुंडका इलाके में फैक्टरी से निकलने वाले हानिकारक कचरे को खुले में फेंकने और जलाने से जुड़ा है।

यह कचरा दिल्ली-रोहतक रोड और दिल्ली-रोहतक रेलवे लाइन के बीच स्थित क्षेत्र के साथ-साथ मुंडका, नांगलोई और रणहौला थाना क्षेत्रों की बाहरी सीमा में खुलेआम डंप और जलाया जा रहा था, जिससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।

209 स्थानों से हटाया गया कचरा

रिपोर्ट के अनुसार, अवैध कचरा डंपिंग और खुले में कचरा जलाने की शिकायत मिलते ही नरेला जोन के उपायुक्त कार्यालय ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। एमसीडी अधिकारियों की टीम ने मौके का निरीक्षण किया, जिसके बाद प्रभावित क्षेत्र की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान 209 स्थानों पर सफाई कर्मियों को तैनात कर मिश्रित कचरा, वर्षों से जमा ठोस कचरा (लीगेसी वेस्ट), गाद, प्लास्टिक रैपर और पॉलीथिन सहित अन्य कचरे को हटाकर सुरक्षित तरीके से उठाया और निपटान किया गया।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के साथ संयुक्त निरीक्षण में यह भी पाया गया कि क्षेत्र से घरेलू और प्लास्टिक कचरा पूरी तरह हटा दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि निर्माण एवं तोड़फोड़ (सी एंड डी) से जुड़े कचरे का अवैध ढेर पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन रहा था। इसे रोकने के लिए रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट को सील कर दिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध डंपिंग न हो सके।

बिजली के तार जलाने से बढ़ा प्रदूषण का खतरा

एमसीडी ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो इसे रोकने के लिए एक विशेष निगरानी दल तैनात किया गया है।

रिपोर्ट में खुले में, विशेषकर बिजली के तारों सहित अन्य कचरे को जलाने को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। यह भी कहा गया है कि एमसीडी और डीपीसीसी की संयुक्त टीमें लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं, ताकि अवैध डंपिंग और कचरा जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

मुंडका में की गई यह कार्रवाई केवल अवैध कचरा डंपिंग रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि यदि निगरानी और कानून का सख्ती से पालन हो तो पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

पटाखों के शोर पर सुप्रीम कोर्ट की नजर: सीपीसीबी से मांगा जवाब

पटाखों के इस्तेमाल और कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से महत्वपूर्ण जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) को निर्देश दिया कि वे सीपीसीबी से यह स्पष्ट करें कि क्या कुछ विशेष प्रकार के पटाखों के मामले में खासकर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों में आंशिक छूट देना संभव है।

इस मामले में अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।

यह मामला देश में पटाखों के नियमन और कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखों के उपयोग से जुड़ा है। अदालत अब यह जानना चाहती है कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शोर संबंधी नियमों में किसी सीमित राहत की वैज्ञानिक और तकनीकी संभावना है या नहीं।