प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
नदी

यमुना किनारे 33 जगहों पर जमा कचरे के ढेर, सीपीसीबी रिपोर्ट से हुआ खुलासा

सीपीसीबी की निगरानी में यमुना और उससे जुड़े नालों के आसपास 52 में से 33 स्थानों पर ठोस कचरा मिला, जबकि दिल्ली की तीनों डंपसाइटों पर अब भी 109 लाख टन से अधिक कचरे का निपटान बाकी है।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • यमुना को स्वच्छ बनाने के दावों के बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने एक चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है।

  • मई 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान यमुना, साहिबी नदी (नजफगढ़ ड्रेन), शाहदरा ड्रेन और उनसे जुड़े नालों के 52 निगरानी स्थलों में से 33 स्थानों पर ठोस कचरे के ढेर पाए गए।

  • यह खुलासा बताता है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं और लगातार निगरानी के बावजूद यमुना के किनारे कचरे की अवैध डंपिंग अब भी बदस्तूर जारी है।

  • इसी बीच दिल्ली की तीनों प्रमुख डंपसाइटों—भलस्वा, गाजीपुर और ओखला—पर 109.37 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का निपटान अभी बाकी है, जिससे शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती और गंभीर नजर आती है।

  • टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद सीपीसीबी ने डीपीसीसी को आरोपों की जांच, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

  • यह मामला केवल यमुना की सफाई का नहीं, बल्कि दिल्ली में कचरा प्रबंधन की जवाबदेही, निगरानी व्यवस्था और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

यमुना और इसमें मिलने वाले प्रमुख नालों के किनारे बड़े पैमाने पर ठोस कचरा फेंके जाने का मामला सामने आया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 22 जुलाई 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सौंपी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि मई 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान निगरानी किए गए 52 स्थानों में से 33 जगहों पर ठोस कचरा जमा मिला।

रिपोर्ट के अनुसार, यमुना नदी में प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने सीपीसीबी के साथ मिलकर जल गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया। इसके तहत यमुना के साथ-साथ इसके दो प्रमुख सहायक नालों—साहिबी नदी (नजफगढ़ ड्रेन) और शाहदरा ड्रेन—को भी निगरानी कार्यक्रम में शामिल किया गया।

निगरानी में उजागर हुई यमुना किनारे कचरे की हकीकत

मई 2025 से सीपीसीबी, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) संयुक्त रूप से हर महीने 52 स्थानों की निगरानी कर रहे हैं। इनमें साहिबी नदी और शाहदरा ड्रेन के अलावा इनके 25 सहायक नाले (साहिबी से जुड़े 19 और शाहदरा से जुड़े 6 नाले) भी शामिल हैं।

संयुक्त निगरानी में बड़ी संख्या में स्थानों पर कचरा मिलने के बाद सीपीसीबी ने अपनी मासिक रिपोर्ट एनएमसीजी, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), डीपीसीसी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी है।

इसके बाद डीपीसीसी ने भी एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), लोक निर्माण विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी), शहरी विकास विभाग, डीएसआईआईडीसी और दिल्ली छावनी बोर्ड सहित कई एजेंसियों को कचरा हटाने और कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

अखबार में खबर से खुली पोल, एनजीटी ने लिया स्वतः संज्ञान

15 मई 2026 को डीपीसीसी ने संबंधित एजेंसियों को दोबारा याद दिलाया कि नालों के किनारों से ठोस कचरा और निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) सम्बन्धी मलबा हटाया जाए, पानी में तैर रहे कचरे की सफाई की जाए और भविष्य में दोबारा कचरा फेंकने पर रोक सुनिश्चित की जाए।

गौरतलब है कि टाइम्स ऑफ इंडिया में 2 अप्रैल 2026 को प्रकाशित एक खबर के आधार पर एनजीटी ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। इस खबर में आरोप लगाया गया था कि दक्षिण दिल्ली के मदनपुर खादर क्षेत्र में यमुना किनारे ओखला लैंडफिल का कचरा डाला जा रहा है ताकि ओखला, भलस्वा और गाजीपुर डंपसाइट को तय समय सीमा के भीतर खाली किया जा सके।

109 लाख टन से ज्यादा कचरा अब भी डंपसाइटों पर बाकी

सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी है कि 31 मई 2026 तक दिल्ली की तीन प्रमुख डंप साइट्स - भलस्वा, गाजीपुर और ओखला - में बायोमाइनिंग का काम जारी है। यह भी पुष्टि हुई है कि जून 2022 में इन तीनों डंपसाइटों पर कुल 203 लाख मीट्रिक टन कचरा था।

जुलाई 2022 से मई 2026 के बीच 201.6 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे की बायोमाइनिंग की गई, जबकि इसी अवधि में 107.97 लाख मीट्रिक टन नया कचरा भी इन स्थानों पर पहुंचा।

इसके कारण अब भी 109.37 लाख मीट्रिक टन कचरे का निपटान बाकी है। इसमें से 15.52 लाख मीट्रिक टन कचरा अकेले ओखला डंपसाइट पर मौजूद है। सीपीसीबी के मुताबिक, भलस्वा डंपसाइट में दिसंबर 2026 तक कचरे का निपटान पूरा हो जाएगा, जबकि ओखला में अक्टूबर 2026 और गाजीपुर में दिसंबर 2027 तक इस काम के पूरा होने की उम्मीद है।

सीपीसीबी का रिपोर्ट में कहना है यमुना किनारे कचरा डंप करने का मामला दिल्ली नगर निकायों की कार्यप्रणाली से जुड़ा है। इसलिए सीपीसीबी ने 13 जुलाई 2026 को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को पत्र लिखकर खबर में लगाए गए आरोपों की जांच करने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के उल्लंघन पर कार्रवाई करने और कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया हैं। इस पत्र की प्रति संबंधित जिला अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

सीपीसीबी की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाने की कोशिशों के बावजूद उसके किनारों पर कचरा फेंकने की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। ऐसे में सिर्फ कचरा हटाना ही नहीं, बल्कि अवैध डंपिंग रोकने और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी होगा।