गंगा नदी फोटो: आईस्टॉक
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गंगा फ्लडप्लेन में रेलवे पुल निर्माण पर एनजीटी सख्त, एनएमसीजी की कार्रवाई पर जताई नाराजगी

ट्रिब्यूनल ने कहा कि अनुमति के बिना निर्माण शुरू करना नियमों का उल्लंघन है और सिर्फ प्रोजेक्ट डायरेक्टर नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान भी जरूरी है।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रयागराज में गंगा नदी के फ्लडप्लेन में रेलवे पुल निर्माण पर एनएमसीजी की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।

  • एनजीटी ने कहा कि बिना अनुमति के निर्माण कार्य शुरू करना नियमों का उल्लंघन है। एनएमसीजी की कार्रवाई केवल प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक सीमित है, जबकि असली जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान जरूरी है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रयागराज में दारागंज और झूंसी के बीच गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में रेलवे पुल निर्माण को लेकर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि रेलवे ने गंगा नदी (पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के तहत एनएमसीजी से अनुमति लिए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।

सिर्फ प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर कार्रवाई क्यों?

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 29 जनवरी 2026 को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को अंतिम निर्णय से पहले सुनवाई का अवसर दिया गया है।

लेकिन एनजीटी ने इस रुख पर सवाल उठाया। पीठ ने कहा कि एनएमसीजी की कार्रवाई केवल आरवीएनएल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि असल में उन अधिकारियों की पहचान जरूरी है जिन्होंने एनएमसीजी की अनुमति के बिना पुल निर्माण का निर्णय लिया और उसे आगे बढ़ाया।

जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश

अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि गंगा नदी (पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के तहत जिला स्तरीय समिति के प्रमुख की जिम्मेदारी थी कि उनके जिले में नियमों का उल्लंघन न हो।

इसके बावजूद एनएमसीजी ने रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पत्राचार नहीं रखा जिससे पता चले कि जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस भेजा गया या उनकी पहचान की गई।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एनएमसीजी के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि न तो किसी अधिकारी की पहचान के लिए कदम उठाए गए और न ही कोई कार्रवाई शुरू की गई। मामले की कई बार सुनवाई टली और जवाब दाखिल हुए, लेकिन यह तथ्य सामने नहीं आया।

अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट देने का आदेश

एनजीटी ने एनएमसीजी को निर्देश दिया है कि वह अधिकरण की टिप्पणियों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करे और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले रिपोर्ट दाखिल करे। इस मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को होनी है।

क्या है पूरा मामला

इस विवाद की शुरुआत मई 2023 में हुई थी, जब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने जिला मजिस्ट्रेट और जिला गंगा समिति के अध्यक्ष को पत्र भेजा था। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजा गया।

फील्ड जांच के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने रिपोर्ट दी और 6 नवंबर 2023 को एनएमसीजी ने जिला प्रशासन को रेलवे ब्रिज प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को रोकने तथा एनएमसीजी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेने का निर्देश दिया।

रेल विकास निगम लिमिटेड के जनरल मैनेजर ने 1 मार्च 2024 को एनएमसीजी से अनुमति के लिए आवेदन किया था। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 11 नवंबर 2024 को बताया कि एनएमसीजी, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश राज्य मिशन के सदस्यों वाली समिति ने 28 अक्टूबर 2024 को बैठक की थी।

समिति ने यह स्पष्ट राय दी कि इस विवादित निर्माण को बाद में मंजूरी (पोस्ट फैक्टो अप्रूवल) नहीं दी जा सकती।