नदियों में बढ़ती गाद और बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए बिहार सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है।
134 स्थलों की पहचान कर सफाई अभियान शुरू किया गया है, जबकि झरही-दाहा नदियों के लिए विस्तृत प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। हालांकि अब भी राज्य में स्पष्ट सिल्ट नीति का अभाव बना हुआ है।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि विभिन्न विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की सिफारिशों के आधार पर विभाग ने राज्य में गाद निकलने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य नदियों की जल वहन क्षमता को बढ़ाना और बाढ़ के खतरे को कम करना है।
बिहार जल संसाधन विभाग ने साफ किया है कि राज्य की नदियों से गाद (सिल्ट) हटाने और नदी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए वह लगातार कदम उठा रहा है।
विभाग ने कहा है कि उपलब्ध संसाधनों की मदद से प्रभावी कार्रवाई की जा रही है और बड़े पैमाने पर नदी प्रबंधन व पर्यावरण संरक्षण के लिए अन्य विभागों और केंद्र सरकार के साथ समन्वय भी किया जा रहा है।
यह जानकारी 19 फरवरी 2026 को दायर किए गए जवाबी हलफनामे में दी गई है।
एनजीटी के निर्देशों पर हुई कार्रवाई
विभाग ने जानकारी दी है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 19 फरवरी, 2025 को जारी निर्देशों पर अमल करते हुए, बिहार के जल संसाधन विभाग ने छोटी नदियों से गाद निकालने के लिए जरूरी कार्रवाई की है। हालांकि अभी तक, बिहार में नदियों से गाद निकालने के लिए कोई स्पष्ट और अलग नीति मौजूद नहीं है।
बिहार सरकार ने केंद्र सरकार से कई बार अनुरोध किया है कि देशभर में नदियों की गाद के प्रभावी प्रबंधन और उपयोग के लिए एक व्यापक “राष्ट्रीय सिल्ट प्रबंधन नीति” बनाई जाए।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि विभिन्न विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की सिफारिशों के आधार पर विभाग ने राज्य में गाद निकलने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य नदियों की जल वहन क्षमता को बढ़ाना और बाढ़ के खतरे को कम करना है।
गाद की समस्या के स्थाई समाधान और निकाली गई गाद के वैकल्पिक उपयोग के लिए विभाग ने 134 संभावित स्थलों की पहचान की है। इन स्थलों की सूची खान एवं भूविज्ञान विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
झरही और दाहा नदियों के लिए विशेष परियोजना
बिहार जल संसाधन विभाग ने झरही और दाहा नदियों से गाद निकालने के लिए विस्तृत परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
छाड़ी नदी में अतिक्रमण के मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कदम उठाए गए हैं। गोपालगंज के जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि नदी और उसके आसपास के सभी अतिक्रमण हटाए जाएं, ताकि पानी का प्रवाह निर्बाध रहे और नदी तंत्र को और नुकसान न पहुंचे।
स्पष्ट है कि नीति के अभाव के बावजूद बिहार में नदियों से गाद हटाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की नीति कब तक तैयार करती है और राज्य की इन परियोजनाओं को कितनी जल्दी मंजूरी मिलती है।