नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी में गिरते सीवेज पर सख्त रुख अपनाया है।
एनजीटी ने दुर्ग नगर निगम को छह महीने के भीतर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया है। जब तक एसटीपी चालू नहीं होते, तब तक वैकल्पिक उपचार तकनीकों से गंदे पानी का उपचार किया जाए।
यह मामला दुर्ग निवासी अमरचंद सुराणा द्वारा दायर आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने शिवनाथ नदी पर बने भाटगांव और उरला-बेलौदी एनीकट को लेकर शिकायत की थी।
संयुक्त समिति ने दुर्ग शहर में सीवेज प्रबंधन की स्थिति पर चिंता जताई है। तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के चलते शहर का गंदा पानी प्राकृतिक नालों के जरिए शिवनाथ नदी में पहुंच रहा है।
संयुक्त समिति ने कहा कि फिलहाल नदी पर प्रदूषण का प्रभाव सीमित है, लेकिन भविष्य में इसे गंभीर समस्या बनने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने जरूरी हैं।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पीने के पानी के स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़े निर्देश दिए हैं। जस्टिस श्यो कुमार सिंह की पीठ ने 16 जनवरी 2026 को कहा कि शिवनाथ नदी पर बनने वाले किसी भी एनीकट या स्टॉप डैम का निर्माण ऐसे स्थान पर किया जाए, जहां नालों का पानी नदी में न मिलता हो, ताकि जल स्रोत प्रदूषित न हों।
दुर्ग नगर निगम द्वारा शिवनाथ नदी में गिरने वाले दो नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रस्तावित हैं। एनजीटी ने निर्देश दिया है कि इन एसटीपी का निर्माण जल्द से जल्द पूरा किया जाए। जब तक एसटीपी पूरी तरह चालू नहीं हो जाते, तब तक पारंपरिक और वैकल्पिक उपचार तकनीकों से गंदे पानी का उपचार किया जाए।
ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि किसी भी हालत में बिना उपचार के सीवेज को खुले मैदान या जल स्रोतों में न छोड़ा जाए।
ट्रिब्यूनल ने एसटीपी को छह महीने के भीतर पूरा करने की समय-सीमा तय की है। साथ ही, छह महीने बाद निर्माण की प्रगति और अस्थाई उपचार व्यवस्था की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार को सौंपने का निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि यह मामला दुर्ग निवासी अमरचंद सुराणा द्वारा दायर आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने शिवनाथ नदी पर बने भाटगांव और उरला-बेलौदी एनीकट को लेकर शिकायत की थी। ये एनीकट तांडुला जल संसाधन विभाग ने पानी के भंडारण के लिए बनाए थे, लेकिन निर्माण में खामियों के कारण ये अब प्रदूषित पानी के भंडार बनते जा रहे हैं। संयुक्त समिति ने मौके का निरीक्षण भी किया है।
शिवनाथ नदी, महानदी की प्रमुख सहायक नदी है। इसका उद्गम महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के गोदारी गांव से होता है और इसकी कुल लंबाई करीब 383 किलोमीटर है। रिपोर्ट के अनुसार, इसका करीब 23.5 किलोमीटर हिस्सा दुर्ग जिले में है।
संयुक्त समिति ने दुर्ग शहर में सीवेज प्रबंधन की स्थिति पर चिंता जताई है। तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के चलते शहर का गंदा पानी प्राकृतिक नालों के जरिए शिवनाथ नदी में पहुंच रहा है। फिलहाल दुर्ग शहर का करीब छह एमएलडी सीवेज सेप्टिक टैंकों में एकत्र करके भिलाई स्टील प्लांट के 30 एमएलडी एसटीपी में ट्रीट किया जाता है। बाकी घरेलू अपशिष्ट जल सोक पिट और सेप्टिक टैंकों से ओवरफ्लो होकर शंकर नाला और पुलगांव नाला के जरिए शिवनाथ नदी में मिल रहा है।
रिपोर्ट में यह बताया गया कि दुर्ग का सीवेज करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय कर बेलौदी में शिवनाथ नदी से मिलता है। इस दौरान प्राकृतिक शुद्धिकरण की प्रक्रिया से कुछ हद तक प्रदूषण कम हो जाता है।
दुर्ग और भिलाई की जलापूर्ति योजनाओं के इनटेक वेल पुलगांव नाला और शिवनाथ नदी के संगम पर बने महमारा एनीकट के ऊपर स्थित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुर्ग शहर का ढलान बीच के हिस्से से दोनों ओर नीचे की तरफ है, जिससे प्राकृतिक जल निकासी दो हिस्सों में बंट जाती है। पहला क्षेत्र शंकर नाले और दूसरा पुलगांव नाला का जलग्रहण क्षेत्र है।
जल्द से जल्द कदम उठाने की है जरूरत
संयुक्त समिति ने कहा कि फिलहाल नदी पर प्रदूषण का प्रभाव सीमित है, लेकिन भविष्य में इसे गंभीर समस्या बनने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने जरूरी हैं।
इस मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी) की ओर से बताया गया कि एसटीपी का निर्माण शुरू हो चुका है और नगर निगम अस्थाई रूप से इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीकों से अपशिष्ट जल के उपचार की व्यवस्था कर रहा है।
एनजीटी ने अपने आदेश में साफ संकेत दिए हैं कि अगर तय समय-सीमा में काम पूरा नहीं हुआ, तो आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।