कर्नाटक के बेलगावी में स्थित हिरण्यकेशी सहकारी चीनी मिल पर पर्यावरणीय उल्लंघनों का गंभीर आरोप लगा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में खुलासा हुआ है कि मिल जुलाई 2023 से बिना वैध मंजूरी के चल रही है और जल व वायु कानूनों की अनदेखी कर रही है।
निरीक्षण में कच्चे लैगून में भारी मात्रा में स्पेंट वॉश जमा मिला, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित नहीं है और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
उद्योग ने इंडस्ट्री परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए एनवायर्नमेंटल स्टडी करने प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस मामले में कोई प्रगति रिपोर्ट सबमिट नहीं की है।
दूषित अपशिष्ट के कारण हिरण्यकेशी नदी और आसपास के पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार न होने पर बोर्ड ने कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
उद्योग ने इंडस्ट्री परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए एनवायर्नमेंटल स्टडी करने प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस मामले में कोई प्रगति रिपोर्ट सबमिट नहीं की है।
कर्नाटक के बेलगावी जिले की हुक्केरी तालुका में चल रहे 'हिरण्यकेशी एसएसके नियामित' चीनी उद्योग पर पर्यावरणीय उल्लंघनों के गंभीर आरोप लगे हैं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बार-बार चेतावनियों और अवसरों के बावजूद उद्योग ने पर्यावरण मानकों के पालन में कोई ठोस सुधार नहीं किया है। यह खुलासा कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केएसपीसीबी) की 24 फरवरी 2026 को दाखिल निरीक्षण रिपोर्ट में हुआ है।
बिना वैध अनुमति के चल रही चीनी मिल
रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग 1 जुलाई 2023 से अब तक बोर्ड की वैध सहमति (कंसेंट) के बिना ही चल रहा है। यह सीधे तौर पर जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अनिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अनिनियम, 1981का उल्लंघन है।
बोर्ड ने निर्देशों का पालन न करने और बोर्ड की सही मंजूरी न होने के कारण नियमों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की है।
क्या कुछ आया निरीक्षण में सामने?
सहमति की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं इसकी जांच के लिए 31 दिसंबर, 2025 को उद्योग का निरीक्षण किया गया। पालन न करने पर, कर्नाटक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 9 जनवरी, 2026 को इंडस्ट्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
14 जनवरी 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बेलगावी के क्षेत्रीय अधिकारी को दोबारा निरीक्षण कर ताजा स्थिति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
निरीक्षण में सामने आया कि कम्पोस्ट पिट खाली करके खोई से भर दिए गए हैं। लेकिन उद्योग ने बड़ी मात्रा में गन्दा पानी (एफ्लुएंट) बिना लाइनिंग वाले तालाबों (लैगून) में जमा कर रखा है। चार में से तीन लैगून की केवल दीवारों पर लाइनिंग है, तल अब भी कच्चा है। वहीं चौथे लैगून की मरम्मत का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
इंस्पेक्शन के दौरान, यह देखा गया कि इंडस्ट्री ने नए बिना लाइनिंग वाले लैगून में स्पेंट वॉश मिला गंदा पानी जमा कर रखा था।
अब तक नहीं लगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
प्रेस मड और बॉयलर राख खुले में रखी है, जिससे धूल प्रदूषण का खतरा है। ऐसे में पानी के छिड़काव की व्यवस्था के साथ एक खास स्टोरेज एरिया की जरूरत है ताकि फ्यूजिटिव एमिशन को रोका जा सके।
उद्योग ने इंडस्ट्री और स्टाफ क्वार्टर से निकलने वाले सीवेज को ट्रीट करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए एक प्रस्ताव दिया था। लेकिन, एसटीपी आज तक स्थापित नहीं किया गया।
कागजों तक सीमित योजनाएं
उद्योग ने इंडस्ट्री परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण पर लम्बे समय में पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए एनवायर्नमेंटल स्टडी करने प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस मामले में कोई प्रगति रिपोर्ट सबमिट नहीं की गई है।
साथ ही उद्योग और आस-पास भूजल की गुणवत्ता को समझने के लिए एक अध्ययन करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन उसपर भी कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। उद्योग की तरफ से एक अंडरटेकिंग दी गई थी कि स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट प्लान 2025 के मॉनसून सीजन के शुरू होने से पहले लागू किया जाएगा, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।
इसी तरह 12 अप्रैल 2025 से पहले उद्योग से निकलने वाले उपचारित/दूषित अपशिष्ट को हिरण्यकेशी नदी में जाने से रोकने की कार्ययोजना लागू करने का आश्वासन भी पूरा नहीं हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारी मात्रा में स्पेंट वॉश कच्चे लैगून में भरा हुआ है और मौजूदा एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में इसके उपचार का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया।
काला धुआं और खराब प्रदूषण नियंत्रण
रिपोर्ट में कहा गया है कि निरीक्षण के समय चीनी यूनिट, को-जनरेशन यूनिट और डिस्टिलरी यूनिट सभी चालू थे। 100 टीपीएच बॉयलर की चिमनी से काला धुआं (ब्लैक एमिशन) निकलता पाया गया। वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहे थे। उद्योग 1 जुलाई, 2023 से अब तक कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बिना वैध मंजूरी के चल रहा था।
स्पष्ट है कि चेतावनियों और आश्वासनों के बावजूद उद्योग ने पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी। अब सवाल यह है कि क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कड़ी कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दब कर रह जाएगा?