भोपाल के बरखेड़ा पठानी में करोड़ों रुपये की लागत से बना भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले छह महीनों से बंद पड़ा है। नतीजतन, गंदे पानी के जमा होने और ओवरफ्लो होने की शिकायतें सामने आई हैं।
आसपास रहने वाले लोगों और किसानों के लिए यह गंदगी और असहनीय बदबू परेशानी का सबब बन गई है। जिस संयंत्र से सीवेज का सुरक्षित निस्तारण होना चाहिए था, उसके ठप पड़ने से स्थानीय पर्यावरण और लोगों के जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को दो सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है।
समिति मौके का निरीक्षण कर स्थिति की जांच करेगी और कार्रवाई रिपोर्ट सौंपेगी। अधिकरण ने मध्य प्रदेश सरकार, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल नगर निगम और बीएचईएल के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
एक अक्टूबर को राज एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के आधार पर एनजीटी ने इस मामले का संज्ञान लिया। अब जांच से पता चलेगा कि करोड़ों रुपये की लागत से बना यह संयंत्र महीनों से बंद क्यों है और लोगों को गंदगी व बदबू से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
करोड़ों रुपए की लागत से बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जब धूल फांकने लगे और जनता गंदे पानी और असहनीय बदबू के साए में जीने को मजबूर हो जाए, तो व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना लाजमी है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के एसटीपी प्लांट का भी यही हाल है। पिछले छह महीनों से यह प्लांट ठप पड़ा है, जिससे आसपास के रहने वाले लोगों और किसानों का जीना मुहाल हो गया है।
इसके चलते गंदे पानी के जमा होने और परिसर में उसके ओवरफ्लो होने की शिकायतें सामने आई हैं। आसपास रहने वाले लोगों और किसानों का कहना है कि जमा गंदे पानी और उससे उठती तेज बदबू के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हस्तक्षेप किया है।
एनजीटी की भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लेगी और इस संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करेगी।
एनजीटी ने भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, भोपाल नगर निगम के आयुक्त और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल), भोपाल के जनसंपर्क अधिकारी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
इन सभी संबंधित पक्षों को मामले पर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
यह मामला भोपाल के बरखेड़ा पठानी स्थित बीएचईएल के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ा है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपए की लागत से बना यह संयंत्र पिछले कई महीनों से काम नहीं कर रहा। इसके बंद रहने से सीवेज के निपटान पर असर पड़ा है और परिसर में गंदा पानी जमा होने तथा बाहर फैलने की शिकायतें सामने आई हैं।
आसपास रहने वाले लोगों और किसानों के मुताबिक, जमा गंदा पानी और उससे उठने वाली दुर्गंध उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई है। सीवेज के उचित निपटान में बाधा से स्थानीय पर्यावरण और लोगों के रहन-सहन पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई गई है।
इस मामले पर एक अक्टूबर 2026 को राज एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर, ‘करोड़ों का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट छह महीने से बंद, आसपास फैली गंदगी’, के आधार पर एनजीटी ने संज्ञान लिया है।
ऐसे में अब संयुक्त समिति की जांच और संबंधित विभागों के जवाब से स्पष्ट हो सकेगा कि प्लांट क्यों बंद पड़ा है, गंदे पानी के निपटान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और लोगों को इस परेशानी से राहत दिलाने के लिए आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।